वस्‍त्र मंत्रालय
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संसद प्रश्न: वस्त्र क्षेत्र के लिए रोडमैप

Posted On: 02 APR 2025 1:00PM by PIB Delhi

"टेक्सटाइल 2030 विज़न" को प्राप्त करने के लिए सरकार उच्च तकनीक और उच्च विकास वाले उत्पाद खंडों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, अंतर्निहित शक्तियों का लाभ उठा रही है, बड़े पैमाने पर प्लग एंड प्ले बुनियादी ढांचे का विकास कर रही है, स्थिरता को केंद्र में रख रही है, साथ ही बड़े पैमाने पर आजीविका के अवसर सुनिश्चित कर रही है, हथकरघा और हस्तशिल्प सहित पारंपरिक क्षेत्रों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है और देश भर में विभिन्न योजनाओं/पहलों को लागू करके कच्चे माल की मूल्य श्रृंखला में आत्मनिर्भर बन रही है। प्रमुख योजनाओं/पहलों में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्क स्कीम शामिल है, जिसका उद्देश्य एक आधुनिक, एकीकृत, विश्व स्तरीय टेक्सटाइल अवसंरचना का निर्माण करना है; बड़े पैमाने पर विनिर्माण को बढ़ावा देने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) फैब्रिक, एमएमएफ अपैरल और तकनीकी वस्त्रों पर ध्यान केंद्रित करने वाली उत्पादन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना; अनुसंधान, नवाचार और विकास, संवर्धन और बाजार विकास पर ध्यान केंद्रित करने वाला राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन; मांग आधारित, प्लेसमेंट उन्मुख, कौशल कार्यक्रम प्रदान करने के उद्देश्य से वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए समर्थ योजना; रेशम उत्पादन मूल्य श्रृंखला के व्यापक विकास के लिए रेशम समग्र-2; हथकरघा क्षेत्र को शुरू से अंत तक समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम। वस्त्र मंत्रालय हस्तशिल्प कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना भी क्रियान्वित कर रहा है। इन योजनाओं के अंतर्गत विपणन, कौशल विकास, क्लस्टर विकास, कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी सहायता आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

वस्त्र उद्योग देश में रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है, जो सीधे तौर पर 45 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार देता है। 2023-24 के दौरान हस्तशिल्प सहित वस्त्र और परिधान का कुल 35,874 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया।

इसके अलावा, भारतीय वस्त्र की वैश्विक ब्रांडिंग के लिए सरकार ने प्रीमियम गुणवत्ता वाले भारतीय कपास को विशिष्ट पहचान देने के लिए कस्तूरी कॉटन इंडिया के ब्रांड को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत किया है।

फरवरी, 2025 में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईपीसी) द्वारा एक सफल वैश्विक मेगा टेक्सटाइल इवेंट भारत टेक्स 2025 का आयोजन किया गया और भारत सरकार के टेक्सटाइल मंत्रालय द्वारा समर्थित, कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को शामिल करते हुए एक प्रमुख टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया गया। इस आयोजन ने भारतीय वस्त्रों की विविधता और समृद्धि को उजागर किया, साथ ही उद्योग की विनिर्माण क्षमता, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, और स्थिरता व चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।

असम में हथकरघा बुनकरों के उत्थान के लिए पिछले दस वर्षों और चालू वर्ष के दौरान निम्नलिखित सहायता प्रदान की गई है:

  • 88 छोटे हथकरघा क्लस्टर और 2 मेगा हथकरघा क्लस्टर को 89.45 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे 68,652 हथकरघा श्रमिकों को लाभ मिलेगा। इनमें से, दीमाहासाओ जिले के हरंगाजाओ में एक छोटे हथकरघा क्लस्टर को 94.23 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे 626 हथकरघा श्रमिकों को लाभ मिलेगा।

  • शिल्प संवर्धन को पर्यटन के साथ एकीकृत करने के लिए मोहपारा (असम) में शिल्प हथकरघा गांव की स्थापना की गई है।

  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 1.09 लाख से अधिक लाभार्थी नामांकित हैं।

  • परिवहन सब्सिडी और मूल्य सब्सिडी के अंतर्गत कुल 15.10 लाख किलोग्राम सूत आपूर्ति किया गया, जिससे 39,000 से अधिक हथकरघा संगठनों/बुनकरों को लाभ मिला।

कारीगरों के उत्थान के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और व्यापक हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत विपणन कार्यक्रमों, कौशल विकास, क्लस्टर विकास, उत्पादक कंपनियों के गठन, कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ, अवसंरचना और प्रौद्योगिकी सहायता, अनुसंधान और विकास सहायता आदि के माध्यम से संपूर्ण सहायता के लिए आवश्यकता आधारित सहायता प्रदान की जाती है, जिससे असम के कार्बी आंगलोंग और दीमा हसाओ जिलों सहित पूरे देश में पारंपरिक शिल्प और कारीगरों को लाभ मिलता है।

यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा द्वारा दी गई।

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