मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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जलवायु अनुकूल तटीय मछुआरा गाँव (सीआरसीएफवी) कार्यक्रम

प्रविष्टि तिथि: 02 APR 2025 3:13PM by PIB Delhi

प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विल्लेजस  (CRCFV) पहल का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक सहित सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समुद्र तट के करीब स्थित मौजूदा 100 तटीय मछुआरा गांवों को क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजस (सीआरसीएफवी) के रूप में विकसित करना है। क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विल्लेजस  (सीआरसीएफवी) पहल के उद्देश्य हैं:-  (i) समुद्र तट पर स्थित तटीय मछुआरा गांवों में रहने वाले मछुआरों के लिए स्थायी आर्थिक और आजीविका के अवसर पैदा करना, (ii) तटीय गांवों में आवश्यकता आधारित मात्स्यिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, (iii) पर्यटक और तटीय व्यापार को आकर्षित करने के लिए तटीय मछुआरा गांवों को क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल  विल्लेजस और शानदार  मछुआरा गांवों के रूप में विकसित करना , (iv) मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के लिए एक स्थायी (सस्टेनेबल), जिम्मेदार, समावेशी, न्यायोचित  और पर्यावरण अनुकूल तरीके से स्थानीय मात्स्यिकी क्षमताओं का उपयोग  करना , (v) तटीय गांवों में मछुआरों को  सेफ्टी और सिक्योरिटी प्रदान करना, (vi) मात्स्यिकी और संबद्ध आर्थिक गतिविधियों में गति लाते हुए  स्थानीय मछुआरों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना, (vii) फिशिंग सामग्री, तकनीक, पोस्ट हारवेस्ट और प्रसंस्करण गतिविधियों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेफ लैंडिंग और बर्थिंग, मारकेटिंग, ऋण और विस्तार सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना, (viii) मात्स्यिकी के विकास और प्रबंधन में स्थानीय मछुआरा संगठनों, मात्स्यिकी सहकारी समितियों, एफएफपीओ, गैर-सरकारी संगठनों को शामिल करना (ix) पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय संस्कृति और विरासत के आधार पर तटीय पर्यटन की संभावना तलाशना, (x) मात्स्यिकी उद्यमिता का विकास, कौशल और उद्यमिता विकास के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना और (xi) तटीय गांवों में मछुआरों को सामाजिक सुरक्षा कवर प्रदान करना।

मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार के परामर्श से पीएमएमएसवाई के तहत क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजस के रूप में विकसित करने के लिए कर्नाटक में पांच तटीय मछुआरा गांवों की पहचान की है और राज्य में पहचाने गए गांव हैं; ( i ) उप्पुंडा मदिकल , (ii) कोटेश्वर , (iii) काडेकर , (iv) बैलुरु और (v) मत्तादाहित्लु ।  क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजस (सीआरसीएफवी) के तहत, इकाई लागत/अनुमानित लागत का 70% हिस्सा गांव में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के निर्माण के लिए और इकाई लागत/अनुमानित लागत का 30%  हिस्सा गांव में मात्स्यिकी आर्थिक गतिविधियों के निर्माण के लिए खर्च किया जाना प्रस्तावित है। कर्नाटक सरकार के परामर्श से गैप एनालिसिस स्टडी  के आधार पर कर्नाटक के निर्धारित  गांवों में विकास के लिए मल्टीपरपस फिशरीस सेन्टर्स की स्थापना, हाई मास्ट लाइटिंग पोल और लाइटिंग, फिश वेंडिंग कियोस्क, नेट मेंडिंग यार्ड्स, आइस प्लांट/कोल्ड स्टोरेज, फिश ड्रायिंग यार्ड, तट संरक्षण कार्य आदि जैसी आवश्यकता आधारित गतिविधियों की परिकल्पना की गई है ताकि गांवों को क्लाइमेट रेसिलिएंट और आर्थिक रूप से जीवंत मछुआरा गांव बनाया जा सके। क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विल्लेजस के  रूप में विकास के लिए तटीय मछुआरा गांवों की राज्यवार संख्या, राज्य में तटीय मछुआरा गांवों की कुल संख्या के अनुपात में परिकल्पित की गई है और वर्तमान में, क्लाइमेट रेसिलिएंट कोस्टल फिशरमैन विलेजस प्रोग्राम की  कवरेज के लिए  निर्धारित 100 तटीय मछुआरा गांवों से अधिक बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, श्री जॉर्ज कुरियन ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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(रिलीज़ आईडी: 2117753) आगंतुक पटल : 197
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