गृह मंत्रालय
मादक पदार्थों की तस्करी की जांच के लिए उठाए गए कदम
Posted On:
01 APR 2025 3:48PM by PIB Delhi
विभिन्न मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों (डीएलईए) द्वारा 1985 के नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के अंतर्गत पंजीकृत मामलों, गिरफ्तारियों और जब्त किए गए मादक पदार्थों की मात्रा, जिसकी रिपोर्ट 2020-2024 के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को दी गई, अनुलग्नक-I में प्रदान की गई है। देश में विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों एवं रासायनिक दवाओं के प्रभाव में महिलाओं एवं बच्चों की हुई हत्याओं, सामाजिक अशांति जैसी घटनाओं के विशिष्ट विवरणों का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है।
देश को नशामुक्त राष्ट्र बनाने के लिए मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपने अभियान के अंतर्गत, सरकार विभिन्न उपाय कर रही है, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं: -
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट 1985, जिसे समय-समय पर संशोधित किया गया है, अवैध मादक औषधियों, मनोविकार नाशक पदार्थों और नियंत्रित पदार्थों के भूगोलिक व्यापार के लिए कठोर प्रावधान करता है जैसा कि धारा 2 (viiib) में परिभाषित किया गया है। इसके अलावा, एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के अध्याय IV में अधिनियम के संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन कर किए गए अपराधों और उनके लिए दंड का विस्तृत प्रावधान दिया गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों पर विचार करते हुए या दुरुपयोग की प्रकृति एवं प्रभाव तथा दुरुपयोग या दुरुपयोग की संभावना के संबंध में उपलब्ध जानकारी एवं साक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, राजस्व विभाग ने धारा 2(xi)(बी) के अंतर्गत 134 मादक औषधियों, धारा 3 के अंतर्गत 173 मनोविकार नाशक पदार्थों और धारा 9ए के अंतर्गत 45 नियंत्रित पदार्थों को सूचीबद्ध किया है, जिससे जनहित में उचित विनियमन, नियंत्रण या निषेध लागू किया जा सके और साथ ही एनडीपीएस अधिनियम और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों/विनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों के अधीन चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए मादक औषधियों और मनोविकार नाशक पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
- (iii) भारत में मादक पदार्थों की तस्करी एवं मादक औषधियों के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय और राज्य मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए एक 4-स्तरीय नार्को-समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) तंत्र स्थापित किया गया है। मादक पदार्थों के कानून प्रवर्तन से संबंधित जानकारी के लिए एक ऑल इन वन एनसीओआरडी पोर्टल विकसित किया गया है।
- प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में अतिरिक्त महानिदेशक/महानिरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी की अध्यक्षता में एक समर्पित मादक पदार्थ निरोधक कार्य बल (एएनटीएफ) की स्थापना की गई है, जो राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए एनसीओआरडी सचिवालय के रूप में कार्य करेगा तथा विभिन्न स्तरों पर एनसीओआरडी बैठकों में लिए गए निर्णयों को लागू करने के लिए अनुवर्ती कार्रवाई करेगा।
- महत्वपूर्ण एवं सार्थक जब्तियों की जांच की निगरानी करने के लिए भारत सरकार द्वारा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) का गठन किया गया है।
- सीमा सुरक्षा बलों (सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स और सशस्त्र सीमा बल) को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की तलाशी, जब्ती एवं गिरफ्तारी का अधिकार प्रदान किया गया है। इसके अलावा, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को भी रेलवे मार्गों पर मादक पदार्थों की तस्करी की जांच करने के लिए एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत अधिकार प्रदान किया गया है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) मादक पदार्थों की तस्करी को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त अभियान चलाने हेतु नौसेना, तटरक्षक बल, सीमा सुरक्षा बल, राज्य एएनटीएफ जैसी अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय करता है।
- सभी बंदरगाहों पर मादक पदार्थों का पता लगाने के लिए खेपों की इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग की जाती है।
- देश में मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण करने के लिए एनसीबी अन्य मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों को लगातार प्रशिक्षण दे रही है।
- एनसीबी को मजबूत करने और इसकी अखिल भारतीय उपस्थिति बढ़ाने के लिए एनसीबी में विभिन्न स्तरों पर 536 पदों का सृजन किया गया है। इस पुनर्गठन के दौरान, मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन को और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए साइबर, कानूनी एवं प्रवर्तन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) तंत्र के अंतर्गत डार्कनेट एवं क्रिप्टो-करेंसी पर एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो नार्को-तस्करी को सुविधाजनक बनाने वाले सभी प्लेटफार्मों की निगरानी, एजेंसियों/एमएसी सदस्यों के बीच मादक पदार्थों की तस्करी पर इनपुट साझा करने, मादक पदार्थओं के नेटवर्क को रोकने, रुझानों को लगातार कैप्चर करने, कार्यप्रणाली और निरंतर निगरानी, नियमित डेटाबेस अपडेट और संबंधित नियमों और कानूनों की समीक्षा पर केंद्रीत है।
- सभी डीएलईए/अन्य जांच एजेंसियों को जांच एवं सक्रिय पुलिसिंग में सहायता प्रदान करने के लिए, गिरफ्तार नार्को-अपराधियों पर राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस (निदान) पोर्टल विकसित किया गया है। यह नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत मादक पदार्थों के अपराधों में शामिल नारकोटिक्स मादक पदार्थों के अपराधियों का डेटा प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 "मादक-पदार्थ निषेध सूचना केंद्र" (मानस) को 24x7 टोल-फ्री राष्ट्रीय नारकोटिक्स कॉल सेंटर हेल्पलाइन के रूप में स्थापित किया गया है। तदानुसार, मानस को एक एकीकृत प्रणाली के रूप में कल्पित किया गया है जो नागरिकों को मादक पदार्श से संबंधित मुद्दों/समस्याओं को विभिन्न संचार साधनों जैसे कॉल, एसएमएस, चैट-बॉट, ई-मेल और वेब-लिंक के माध्यम से लॉग, रजिस्टर, ट्रैक और समाधान हेतु एकल मंच प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) में नवंबर 2022 में एक उच्च-स्तरीय समर्पित समूह (समुद्री सुरक्षा समूह - एनएससीएस) का गठन किया गया है, जो समुद्री मार्गों के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी, चुनौतियों एवं समाधानों का विश्लेषण करता है।
- एनसीबी द्वारा महानिदेशक स्तर की बैठकें पड़ोसी और अन्य देशों जैसे म्यांमार, ईरान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सिंगापुर, अफगानिस्तान, श्रीलंका आदि के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले मादक पदार्थों की तस्करी एवं समुद्री तस्करी के मुद्दों को सुलझाने के लिए आयोजित की जाती हैं।
- देश के सभी जिलों में 10,000 से अधिक मास्टर स्वयंसेवकों के माध्यम से नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) शुरू किया गया। यह 4.96 करोड़ युवा और 2.97 करोड़ महिलाओं सहित 14.79 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है।
- सरकार पूरे देश में 350 एकीकृत व्यसन पुनर्वास केन्द्रों (आईआरसीए), 46 समुदाय आधारित सहकर्मी नेतृत्व मध्यवर्तन (सीपीएलआई) केन्द्रों, 74 आउटरीच और ड्रॉप इन केन्द्रों (ओडीआईसी), 142 व्यसन उपचार सुविधाओं (एटीएफ), 124 जिला नशामुक्ति केन्द्रों (डीडीएसी) को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
- नशामुक्ति के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नं. 14446 संचालित की जाती है, जो मदद चाहने वाले लोगों को प्राथमिक परामर्श एवं तत्काल सहायता प्रदान करती है।
- सरकार अपने स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान (एनआईएसडी) और अन्य सहयोगी एजेंसियों जैसे राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) आदि के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों सहित सभी हितधारकों के लिए नियमित रूप से जागरूकता निर्माण एवं संवेदीकरण सत्रों का आयोजन करती है।
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा छात्रों (6वीं-11वीं कक्षा), शिक्षकों और अभिभावकों को मादक पदार्थों पर निर्भरता, इससे निपटने की रणनीतियों एवं जीवन कौशल के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए नवचेतना मॉड्यूल, शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।
अनुलग्नक-I
वर्ष
|
मामले
|
गिरफ्तारी
|
मात्रा (किलोग्राम में)
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2020
|
55,622
|
73,841
|
10,82,511
|
2021
|
68,144
|
93,538
|
16,09,612
|
2022
|
1,02,769
|
1,26,516
|
12,53,662
|
2023
|
1,09,546
|
1,32,954
|
13,89,725
|
2024
|
89,913
|
1,16,098
|
13,30,600
|
2020 से 2024 के दौरान विभिन्न मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों (डीएलईए) द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के अंतर्गत दर्ज मामले, गिरफ्तारियां और जब्त किए गए मादक पदार्थों की मात्रा, जैसा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को रिपोर्ट किया गया।
स्रोत: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो
यह जानकारी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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एमजी/आरपीएम/केसी/एके
(Release ID: 2117450)
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