इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) सचिव ने आईआईएससी बेंगलुरु में भारत के पहले नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोडशो का उद्घाटन किया; 7 कॉलेजों ने 100 से अधिक बौद्धिक संपदा (आईपी) और 50 से अधिक तकनीकों का प्रदर्शन किया


इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत में नवाचार के साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है,  जिसके  85,000 कुशल पेशेवरों के साथ 20230 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है: श्री एस. कृष्णन, सचिव, MeitY

सेमीकंडक्टर रोड शो में अगली पीढ़ी के चिप डिजाइन, नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स में सफलताओं का अनावरण किया गया और भारत के क्रांतिकारी स्टार्टअप का जश्न मनाया गया

Posted On: 27 MAR 2025 8:55PM by PIB Delhi

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से 27 मार्च 2025 को आईआईएससी बेंगलुरु के नेशनल साइंस सेमिनार कॉम्प्लेक्स में भारत के पहला नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोडशो का सफल आयोजन किया। इस रोडशो का उद्घाटन MeitY के सचिव श्री एस. कृष्णन और अपर सचिव श्री अभिषेक सिंह द्वारा किया गया।

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भारत के आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की ओर एक बड़ा कदम

यह आयोजन भारत के आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के नजरिए से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ। इस रोडशो में 100 से अधिक बौद्धिक संपदा (आईपी), 50 से अधिक नवीन तकनीकों और 35 से अधिक उभरते स्टार्टअप्स के नवाचारों को प्रदर्शित किया गया, ये सभी देश भर में छह अत्याधुनिक नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स केंद्रों द्वारा समर्थित थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए, इस सम्मेलन में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता को रेखांकित किया गया। MeitY द्वारा आईआईएससी और आईआईटी पारिस्थितिकी तंत्र में स्थापित नैनो सेंटरों में अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस रोडशो ने 700 से अधिक उद्योग जगत के दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाकर भारत के नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान किया।

भारत का सेमीकंडक्टर भविष्य

सभा को संबोधित करते हुए, MeitY के सचिव श्री एस. कृष्णन ने ने 85,000 पेशेवरों के सेमीकंडक्टर-तैयार कार्यबल का निर्माण करने के लिए नवाचार और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देने में MeitY के नैनो केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सरकार द्वारा उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा, "मंत्रालय का प्रमुख उद्देश्य भारत सेमीकंडक्टर मिशन को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रयासों को एकीकृत करना है। यह दुनिया के सबसे बड़े सब्सिडी और अनुदान कार्यक्रमों में से एक है। प्रमुख सेमीकंडक्टर सुविधाओं में किए जाने वाले लगभग 70-75% निवेश करदाताओं के पैसे से आते हैं, जिससे हर भारतीय इस मिशन का हितधारक है। भारत की सेमीकंडक्टर मांग, जो वर्तमान में 45-50 बिलियन डॉलर है, 2030 तक 100-110 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।"

MeitY के अपर सचिव श्री अभिषेक सिंह ने रोडशो के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे प्रौद्योगिकी हमारी जीवनशैली को बदल रही है और वैश्विक तकनीकी जगत को समेट रही है। उद्योग और अकादमिक जगत के सहयोग पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "भारत एआई मिशन के तहत, आईएनयूपी कार्यक्रम और अन्य पहलों के माध्यम से स्टार्टअप्स, उद्यमी और शोधकर्ता वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल कर रहे हैं, जिससे भारत उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है। आईआईएससी, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली और अन्य संस्थानों के सहयोग से, हम एक ऐसा इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो सुनिश्चित करता है कि भारत इस क्रांति में अग्रणी बना रहे।"

अनुसंधान और वास्तविक दुनिया के नवाचार का मेल

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आईआईएससी और आईआईटी में स्थापित नैनो सेंटर डीप-टेक रेस में भारत को आगे बढ़ा रहे हैं, सफल तकनीकों और रणनीतिक उन्नति को बढ़ावा दे रहे हैं। आईआईएससी बेंगलुरु में आयोजित नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोड शो में,इन अकादमिक केंद्रों ने अपने अनुसंधान कार्यों को व्यावहारिक नवाचार में बदलने की क्षमता का प्रदर्शन किया। छात्रों द्वारा 48 अत्याधुनिक टेक डेमो प्रस्तुत किए गए, जो अनुसंधान से वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों तक की यात्रा को दर्शाते हैं।

यह कार्यक्रम न केवल उद्योग जगत के प्रमुख संवादों के लिए एक मंच बना, बल्कि स्टार्टअप इकोसिस्टम और शिक्षाविदों के बीच सहयोग के केंद्र के रूप में भी सामने आया। इस साझेदारी का उद्देश्य अनुसंधान प्रयोगशालाओं से अत्याधुनिक तकनीकों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचाना था। इस दौरान उद्योग और शिक्षाविदों के बीच 4 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें  साझेदारी और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा मिला- आईआईएससी के साथ केएएस टेक्नोलॉजीज और एंटीगोन सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) और मदनानी केमडिस्ट नोवाटेक एलएलपी प्राइमरी हेल्थटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ।

यह रोडशो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, जिसमें चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स में नवीनतम उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। इसके साथ ही, इस आयोजन में उन स्टार्टअप्स को भी मान्यता दी गई, जिन्होंने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस कार्यक्रम ने ऐसे कई स्टार्टअप्स को सामने लाने का अवसर प्रदान किया, जिनकी तकनीक भारत के टेक इकोसिस्टम को क्रांतिकारी रूप से बदल सकती है। इस कार्यक्रम का महत्व इस तथ्य में निहित है कि यह भविष्य में और अधिक स्वदेशी तकनीकों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा, जो समाज की महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान में मददगार साबित होंगी।

सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के दिग्गजों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर,  यह आयोजन भारत की अगली बड़ी तकनीकी छलांग और नवाचार की दिशा में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्पल शाह, माइक्रोन के आनंद राममूर्ति, आईआईएससी के निदेशक गोविंदन रंगराजन, आईआईटी बॉम्बे के जुजेर वासी, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन; लैम रिसर्च के इंडिया हेड रंगेश राघवन, बिट्स पिलानी के कुलपति वी. रामगोपाल राव, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन शामिल रहे।

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