जल शक्ति मंत्रालय
संसद प्रश्न: मराठवाड़ा में निजी टैंकरों पर निर्भरता
Posted On:
25 MAR 2025 2:11PM by PIB Delhi
केन्द्र सरकार, महाराष्ट्र सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में, अगस्त, 2019 से देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल से पानी की आपूर्ति के लिए जल जीवन मिशन लागू कर रही है।
पेयजल राज्य का विषय है और पेयजल आपूर्ति योजनाओं/परियोजनाओं की योजना बनाने, इनके अनुमोदन और इन्हें लागू करने की शक्ति राज्य सरकार के पास है। जल जीवन मिशन परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य जल और स्वच्छता मिशन (एस डब्ल्यू एस एम) और जिला जल और स्वच्छता मिशन (डी डब्ल्यू एस एम) पर राज्य और जिला स्तर पर जल जीवन मिशन के समग्र कार्यान्वयन का दायित्व है।
जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत, पेयजल और स्वच्छता विभाग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी पेयजल आपूर्ति योजनाएं लागू करने के लिए वित्तीय, नीति मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करता है। केंद्र सरकार के स्तर पर जल टैंकरों द्वारा पेयजल उपलब्ध कराए जा रहे ग्रामों का विवरण नहीं रखा जाता है।
केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने की खेती के लिए अत्यधिक भू-जल निष्कर्षण के कारण जल उपलब्धता प्रभावित होने का आकलन नहीं किया गया है। हालांकि, केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) 2022 से राज्य सरकारों के सहयोग से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र सहित पूरे देश में गतिशील भूजल संसाधनों का वार्षिक मूल्यांकन कर रहा है।
वर्ष (2024) के नवीनतम मूल्यांकन के अनुसार, मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन 7 दशमलव 676 बिलियन क्यूबिक मीटर है। सभी उपयोगों के लिए वार्षिक भूजल निष्कर्षण 3 दशमलव 891 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जिसमें से लगभग 3 दशमलव 669 बिलियन क्यूबिक मीटर (94 दशमलव तीन प्रतिशत) का उपयोग सिंचाई कार्यों के लिए किया गया है। भूजल निष्कर्षण चरण, वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन पर सभी उपयोगों (सिंचाई, औद्योगिक और घरेलू उपयोग) के वार्षिक भूजल निष्कर्षण का माप है। मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए यह समग्र रूप से 50 दशमलव 70 प्रतिशत है।
जल राज्य का विषय है इसलिए राज्य सरकारें हीं जल संसाधनों के संवर्द्धन, संरक्षण और कुशल प्रबंधन के कदम उठाती हैं। जल जीवन मिशन के तहत पेयजल स्रोत विकास/सुदृढ़ीकरण/संवर्द्धन के प्रावधान किए गए हैं। साथ ही पानी की कमी वाले सूखाग्रस्त और रेगिस्तानी क्षेत्रों में इसकी पहुंच, जल उपचार और जल वितरण प्रणालियों के बुनियादी ढांचे के अलावा, भूजल स्रोत विहिन गांव में जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्रावधान किए गए हैं। पेयजल सुरक्षा के लिए, प्रत्येक गांव को जल जीवन मिशन के तहत 5 साल की ग्राम कार्य योजना तैयार करनी होगी, जिसमें अन्य उपायों के साथ ही मनरेगा सहित ग्रामीण स्तर की अन्य, योजनाओं के साथ अभिसरण में पेयजल स्रोतों का संवर्द्धन और सुदृढ़ीकरण शामिल है। 15वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी)/पीआरआई, एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी), राज्य योजनाओं, जिला खनिज विकास निधि, सीएसआर निधि, सामुदायिक योगदान आदि के अनुदान से संबंधित कदम उठाए हैं।
केंद्र सरकार द्वारा मराठवाड़ा क्षेत्र सहित देश में सतत भूजल प्रबंधन और जल की कमी दूर करने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण उपायों को यहां देखा जा सकता है
https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3a70dc40477bc2adceef4d2c90f47eb82/uploads/2024/07/20240716706354487.pdf.
जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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