कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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भंडारण सुविधाओं के लिए सब्सिडी

Posted On: 21 MAR 2025 5:01PM by PIB Delhi

कृषक समुदाय के बीच भंडारण के लिए सब्सिडी की विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, प्रायोजित कृषि और संबद्ध क्षेत्र के कार्यक्रमों को प्रसारित करने के लिए दूरदर्शन, डीडी किसान और आकाशवाणी के माध्यम से कृषि विस्तार के लिए मास मीडिया सपोर्ट योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत, 18 क्षेत्रीय दूरदर्शन केंद्रों के माध्यम से सप्ताह में तीन दिन 30 मिनट का कृषि दर्शन कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, डीडी किसान पर सप्ताह में तीन दिन तीन कार्यक्रम अर्थात कृषि दर्शन, हैलो किसान और चौपाल चर्चा प्रसारित किए जाते हैं। आकाशवाणी पर, दो कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं: i) किसानवाणी कार्यक्रम 96 ग्रामीण आकाशवाणी एफएम रेडियो स्टेशनों के माध्यम से सप्ताह में तीन दिन, और ii) किसान की बात दिल्ली (एनसीआर) में आकाशवाणी एफएम गोल्ड चैनल के माध्यम से सप्ताह में तीन दिन।

उपरोक्त के अलावा, कृषक समुदाय के लाभ के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर संचालित डीडी, एआईआर और निजी टीवी और रेडियो चैनलों के माध्यम से ऑडियो-वीडियो स्पॉट के माध्यम से एक केंद्रित प्रचार और जागरूकता अभियान भी प्रसारित/टेलीकास्ट किया जा रहा है। इसके अलावा, देश भर के प्रमुख समाचार पत्रों में आउटडोर विज्ञापन के साथ-साथ प्रिंट विज्ञापन के माध्यम से प्रचार और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग को देखते हुए, प्रचार और जागरूकता के लिए फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स, यूट्यूब, लिंक्डइन, व्हाट्सएप और पब्लिक ऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जा रहा है।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग देश में बागवानी के समग्र विकास के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) को क्रियान्वित कर रहा है। इस योजना के तहत, 25 मीट्रिक टन क्षमता वाले कम लागत वाले प्याज भंडारण संरचना के लिए प्रति इकाई 1.75 लाख रुपये की कुल लागत के 50 प्रतिशत की दर से सहायता की परिकल्पना की गई थी।

पिछले 10 वर्षों के दौरान विभिन्न घटकों की इनपुट लागत में वृद्धि को देखते हुए, एमआईडीएच के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ लागत मानदंडों को संशोधित किया गया है, जिसके तहत कम लागत वाले प्याज भंडारण की लागत को 25 मीट्रिक टन की अधिकतम क्षमता के लिए 10,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें पात्र परियोजना लागत के 50 प्रतिशत की दर से सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसके अलावा, देश में प्याज की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए, उच्च क्षमता यानी 1000 मीट्रिक टन की अधिकतम क्षमता के साथ कम लागत वाले प्याज भंडारण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक प्रावधान भी किए गए हैं।

सभी जल्दी खराब होने वाली फसलें जैसे बागवानी फसलें एमआईडीएच योजना के अंतर्गत आती हैं। हालांकि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के एक घटक के रूप में एकीकृत कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन और संरक्षण इन्फ्रास्ट्रक्चर योजना को भी लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बागवानी और गैर-बागवानी उत्पादों की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्रदान करना है।

उपरोक्त के अलावा, बागवानी सहित शीघ्र खराब होने वाली फसलों के विकास के लिए गतिविधियां अन्य विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए), परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) आदि के तहत की जा सकती हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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