रक्षा मंत्रालय
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आतंकवाद एक उभरती चुनौती बनी हुई है, उन्नत तकनीक के उपयोग के लिए सहयोगात्मक और कार्रवाई-उन्मुख दृष्टिकोण की आवश्यकता है, आतंकवाद-निरोध पर एडीएमएम-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की 14वीं बैठक में रक्षा सचिव का बयान


कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद का मुकाबला करने के लिए ‘संपूर्ण सरकार एवं समग्र समाज’ दृष्टिकोण विकसित करने और आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क को बाधित करने के उद्देश्य से कानूनी व वित्तीय ढांचे को बढ़ाने का आह्वान किया गया

Posted On: 19 MAR 2025 5:34PM by PIB Delhi

भारत आतंकवाद के प्रति अपनी शून्य सहनशीलता की नीति पर अडिग है और एक ऐसे दृष्टिकोण में विश्वास करता है, जिसमें मजबूत घरेलू तंत्र, उन्नत खुफिया-साझाकरण तथा मजबूत क्षेत्रीय सहयोग शामिल हो। रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने 19 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में आतंकवाद-रोधी मुद्दों पर आसियान रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन (एडीएमएम) - प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) की 14वीं बैठक में मुख्य भाषण के दौरान यह बात कही।

रक्षा सचिव ने कहा कि आतंकवाद एक गतिशील व उभरती चुनौती बनी हुई है, जिसके खतरे लगातार सीमाओं को पार कर रहे हैं और आतंकवादी समूहों द्वारा उन्नत प्रौद्योगिकी, साइबर उपकरण और मानव रहित प्रणालियों के उपयोग को रोकने के लिए एक सुसंगत, दूरदर्शी एवं कार्रवाई-उन्मुख दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र, अपने भू-राजनीतिक व आर्थिक महत्व को देखते हुए तथा विशेष रूप से माध्यमिक

आतंकवाद एवं हिंसक उग्रवाद के प्रति संवेदनशील है, जिसके लिए एक व्यापक, अनुकूल और गहन सहयोगात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।

श्री राजेश कुमार सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एडीएमएम-प्लस मंच के माध्यम से भारत उभरते हुए खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रक्षा बलों, सुरक्षा एजेंसियों और नीतिगत ढांचे के बीच तालमेल बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जटिल, अत्यधिक जुड़े हुए और तेज गति वाले विश्व में, सामाजिक और पारिस्थितिक तंत्र असहाय हो जाते हैं। प्राथमिकता निर्धारण और निर्णय लेने में सरकारों को सशक्त बनाने के लिए इस जोखिम का आकलन करना महत्वपूर्ण है। आतंकवाद सरकारों को अस्थिर कर सकता है, असैन्य समाज को निर्बल कर सकता है और सामाजिक एवं आर्थिक विकास को ख़तरे में डाल सकता है। हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम निर्णय लेने वालों को अनिश्चितता को समझने और निर्णय लेने पर पड़ने वाले प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करें।

इस कार्यक्रम में आतंकवाद निरोध पर एडीएमएम-प्लस ईडब्ल्यूजी की अध्यक्षता रूस और म्यांमार से तीन साल के चक्र के लिए भारत तथा मलेशिया को सौंपी गई। रक्षा सचिव ने नए सह-अध्यक्षों की प्रतिबद्धता को व्यक्त किया कि इस चक्र के दौरान किए गए प्रयास व्यावहारिक एवं सार्थक परिणाम प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि अपनी सामूहिक विशेषज्ञता का लाभ उठाकर, क्षमता निर्माण को बढ़ाकर और गहरे विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देकर, हम क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आतंकवाद विरोधी तैयारियों को काफी मजबूत कर सकते हैं।

श्री राजेश कुमार सिंह ने कहा कि आतंकवाद-रोधी ईडब्ल्यूजी के वर्तमान चक्र में, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और संरचित संयुक्त योजनाओं के माध्यम से सशस्त्र बलों के बीच अंतर-संचालन में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग का मुकाबला करना और एआई-संचालित प्रोपेगेंडा, एन्क्रिप्टेड संचार, ड्रोन प्रौद्योगिकियों के उपयोग के माध्यम से आतंकवादियों द्वारा उत्पन्न खतरों का समाधान करना होगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कट्टरपंथ और भर्ती प्रयासों के खिलाफ साइबर लचीलापन मजबूत करना भी एक फोकस क्षेत्र होगा।

रक्षा सचिव ने कहा कि चक्र के उत्तरार्ध में व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से क्षमता निर्माण की दिशा में मिलकर काम किया जाएगा, जिसमें मलेशिया 2026 में एक टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित करेगा, जिसमें आतंकवाद-रोधी योजना और तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए रणनीतिक-स्तर के निर्णय लेने के सिमुलेशन की सुविधा होगी। 2027 में, भारत एक फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य वास्तविक दुनिया के आतंकवाद-रोधी परिदृश्यों को प्रोत्साहित करना, परिचालन समन्वय को बढ़ाना और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का परीक्षण करना है। उन्होंने कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद का मुकाबला करने तथा आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क को बाधित करने के लिए कानूनी एवं वित्तीय ढांचे को बढ़ाने के लिए एक संपूर्ण सरकार व समग्र समाज दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।

श्री राजेश कुमार सिंह ने वर्ष 2025 के लिए आसियान की अध्यक्षता संभालने के लिए मलेशिया को बधाई दी और भारत का पूरा समर्थन जताया। उन्होंने ‘समावेशीपन और स्थिरता’ विषय-वस्तु के साथ वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में आसियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने में मलेशिया के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत को मलेशिया के साथ इस महत्वपूर्ण पहल की सह-अध्यक्षता करने का सौभाग्य मिला है और वह आसियान के सदस्य देशों, प्लस देशों, आसियान सचिवालय तथा तिमोर-लेस्ते के प्रतिनिधियों की भागीदारी की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि आपकी उपस्थिति आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने में हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।

रक्षा सचिव ने आसियान के साथ भारत के संबंधों को अपनी विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ बताया, जो एक्ट ईस्ट नीति के केंद्र में है। उन्होंने स्थिर और एकीकृत आसियान के लिए भारत के गंभीर समर्थन को दोहराया, जो एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के संस्थागत स्तंभ के रूप में कार्य करता है।

इस बैठक में 10 आसियान सदस्यों (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर व थाईलैंड) और आठ संवाद भागीदार देशों (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आरओके, जापान, चीन, अमेरिका तथा रूस) के प्रतिनिधिमंडलों के साथ-साथ तिमोर लेस्ते एवं आसियान देशों के सचिव भी भाग ले रहे हैं। भारत पहली बार आतंकवाद-रोधी ईडब्ल्यूजी की सह-अध्यक्षता कर रहा है।

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एमजी/केसी/एनके


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