ग्रामीण विकास मंत्रालय
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पीएमएवाई-जी के अंतर्गत पारदर्शिता और जवाबदेही

Posted On: 18 MAR 2025 2:55PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत लाभार्थियों की पहचान सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी)-2011 के तहत निर्धारित आवास के अभाव से संबंधित मापदंडों एवं बहिष्करण संबंधी मानदंडों और संबंधित ग्राम सभाओं द्वारा उचित सत्यापन व अपीलीय प्रक्रिया के पूरा होने पर आधारित होता है। पीएमएवाई-जी के तहत लाभार्थियों की पात्रता की पहचान करने हेतु इन मापदंडों/मानदंडों को एसईसीसी 2011 डेटाबेस और आवास+2018 के संदर्भ में लागू किया गया था।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण घरों के निर्माण के लिए सहायता प्रदान करने हेतु पीएमएवाई-जी को 5 और वर्षों (वित्तीय वर्ष 2024-25 से लेकर 2028-29 तक) के लिए बढ़ाने को मंज़ूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने संशोधित बहिष्करण संबंधी मानदंडों का उपयोग करके आवास+ सूची को अद्यतन करने को भी मंज़ूरी दे दी है। नीचे दिए गए विवरण के अनुसार, घरों की पहचान से लेकर निर्माण पूरा होने तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता को अधिकतम करने और शुचिता सुनिश्चित करने हेतु प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों का उपयोग करके राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों द्वारा एक नया सर्वेक्षण किया जा रहा है:  

  1. आवास+ 2024 ऐप- यह प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत विशेष रूप से डिजाइन किया गया एक अनूठा ऐप है, जिसमें पूर्व-पंजीकृत सर्वेक्षकों के माध्यम से सहायता प्राप्त सर्वेक्षण, आवास प्रौद्योगिकी चयन, चेहरा प्रमाणीकरण, आधार आधारित ई-केवाईसी, घरों से संबंधित आंकड़ों का दर्ज किया जाना, मौजूदा घर की स्थिति, समय की मुहर और मौजूदा घर के प्रस्तावित निर्माण स्थल की जियो टैग की गई फोटो दर्ज करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह ऐप ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन मोड में भी काम करता है। पीएमएवाईजी (2024-29) के अगले चरण के लिए आवास+2024 ऐप सर्वेक्षण में पात्र परिवारों के लिए “स्व-सर्वेक्षण” की सुविधा उपलब्ध है।
  2. धोखाधड़ी वाली गतिविधि को रोकने और संभावित कदाचार की जानकारी प्रदान करने के लिए एआई/एमएल मॉडल का उपयोग।
  3. अनुशंसा प्रणाली यह मॉड्यूल निर्माण पूर्ण हो चुके एक घर की अपलोड की गई तस्वीरों में पक्की दीवार, पक्की छत, कच्ची दीवार, कच्ची छत, प्रतीक चिन्ह (लोगो), खिड़की, दरवाजा और व्यक्ति जैसी घर से संबंधित विभिन्न विशेषताओं की पहचान करता है और अनुमोदन के लिए अंतिम तस्वीर की सिफारिश करता है।
  4. ई-केवाईसी ऐप यह ऐप आधार के साथ समन्वित है और पीएमएवाई-जी लाभार्थियों का सत्यापन करने के लिए एआई द्वारा संचालित चेहरे के प्रमाणीकरण की तकनीक का उपयोग करता है।
  5. जीवंतता संबंधी पहचान: लाभार्थियों की पहचान के लिए आवास ऐप में आई ब्लिंक/गति पहचान सुविधा।
  6. शत-प्रतिशत आधार-आधारित भुगतान: लाभार्थियों के खातों में सीधे स्थानांतरित किया जाएगा।

पीएमएवाई-जी के तहत लाभार्थियों को दी जाने वाली इकाई सहायता केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार है और वर्तमान में मैदानी क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये और पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों (जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के केन्द्र-शासित प्रदेशों सहित) में 1.30 लाख रुपये की इकाई सहायता प्रदान की जाती है। पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी राज्यों [उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर (केन्द्र-शासित प्रदेश)] के लिए केन्द्र और राज्य के बीच वित्तपोषण का पैटर्न 90:10 का है जबकि बाकी राज्यों के लिए 60:40 का है और विधानसभा रहित केन्द्र- शासित प्रदेशों के लिए शत-प्रतिशत वित्तपोषण केन्द्र द्वारा वहन किया जाता है।

इकाई सहायता के अलावा, लाभार्थियों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) के साथ अनिवार्य समन्वय के जरिए 90/95-कार्यदिवस की अकुशल श्रम मजदूरी की सुविधा दी जाती है। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी), एमजीएनआरईजीएस या वित्तपोषण के किसी अन्य समर्पित स्रोत के जरिए शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपये की सहायता भी प्रदान की जाती है।

कुछ राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश पीएमएवाई-जी के लाभार्थियों को घर निर्माण के लिए इकाई सहायता के अलावा अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। किफायती बनाने की प्रक्रिया को और अधिक समर्थन देने हेतु, इस योजना में राज्य की विशिष्टता के अनुरूप आवास के डिजाइन शामिल किए गए हैं और स्थानीय सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है, जिससे लागत और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी हो रही है।

इस योजना के तहत, पीएमएवाई-जी के लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से अधिकतम लाभ प्रदान करने हेतु अन्य योजनाओं के साथ समन्वय को प्रोत्साहित किया जाता है। दिशा-निर्देश एसबीएम-जी, एमजीएनआरईजीएस या वित्त पोषण के किसी अन्य समर्पित स्रोत के साथ समन्वय के जरिए शौचालयों के निर्माण में सहायता करते हैं। पाइपयुक्त पेयजल, बिजली कनेक्शन, एलपीजी गैस कनेक्शन, सौर लालटेन एवं खाना पकाने की स्वच्छ ऊर्जा, सौर छत, एमजीएनआरईजीएस के जरिए निर्माण सामग्री की आवश्यकता की पूर्ति और सरकारी  कार्यक्रमों के तहत एसएचजी प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ाव के लिए भी समन्वय किया जा रहा है।

मंत्रालय द्वारा राज्यों को लक्ष्य आवंटित किए जाते हैं और आगे जिलों/प्रखंडों/ग्राम पंचायतों को लक्ष्य आवंटित करने का काम राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। राज्यों द्वारा भोपाल, शहडोल, सीधी और हाथरस संसदीय क्षेत्रों में आवंटित लक्ष्य और स्वीकृत आवासों का विवरण इस प्रकार है: -

 [इकाई संख्या में]

संसदीय क्षेत्र (पीसी)

राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य

राज्य द्वारा स्वीकृत घर

राज्य द्वारा निर्माण पूर्ण किये गये घर

भोपाल*

47,719

49,971

35,575

शहडोल#

1,94,286

1,88,178

1,66,730

सीधी $

136058

124293

101908

हाथरस@

2361

2361

2327

*भोपाल पीसी  भोपाल जिले और सीहोर जिले के सीहोर प्रखंड को कवर करता है

#शहडोल पीसी अनूपपुर, उमरिया और जयसिंहनगर जिले, शहडोल के बुढ़ार प्रखंड को कवर करता है

$सीधी पीसी सीधी जिले और शहडोल जिले के ब्योहारी प्रखंड को कवर करता है

@हाथरस पीसी हाथरस जिले के हाथरस, सादाबाद, सिकंदराराऊ प्रखंड और अलीगढ़ जिले के इगलास एवं छर्रा प्रखंड (गंगरी में स्थित) को कवर करता है।

ग्रामीण विकास राज्यमंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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