रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
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एनबीएस योजना के तहत पोषक तत्व सामग्री के आधार पर सब्सिडी वाले पीएंडके उर्वरकों पर एक तय राशि प्रदान की जाती है


सरकार ने किसानों को किफायती मूल्य पर डीएपी की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के आधार पर एनबीएस सब्सिडी दरों के अतिरिक्त डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) पर विशेष पैकेज प्रदान किए हैं

यूरिया किसानों को वैधानिक रूप से अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है; यूरिया के 45 किलोग्राम के बैग का एमआरपी 242 रुपये प्रति बैग है (नीम कोटिंग के लिए शुल्क और लागू करों को छोड़कर) जो 1 मार्च 2018 से आज तक अपरिवर्तित रहा है

Posted On: 18 MAR 2025 4:34PM by PIB Delhi

सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटासिक (पीएंडके) उर्वरकों के लिए 1 अप्रैल 2010 से पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना लागू की है । पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत वार्षिक/अर्ध-वार्षिक आधार पर तय की गई सब्सिडी की एक निश्चित राशि, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) सहित उनके पोषक तत्व सामग्री के आधार पर सब्सिडी वाले पीएंडके उर्वरकों पर प्रदान की जाती है। एनबीएस योजना के तहत पीएंडके क्षेत्र को नियंत्रणमुक्त कर दिया गया है। उर्वरक कंपनियों को उचित स्तर पर एमआरपी तय करने की अनुमति है, जिसकी निगरानी सरकार द्वारा की जाती है। उर्वरक कंपनियां बाजार के अनुसार उर्वरकों का निर्माण/आयात करती हैं।

इसके अलावा किसानों को सस्ती कीमतों पर डीएपी की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जरूरत के आधार पर एनबीएस सब्सिडी दरों के अलावा डीएपी पर विशेष पैकेज प्रदान किए हैं। हाल ही में 2024-25 में वैश्विक राजनीतिक स्थिति के कारण उर्वरक कंपनियों द्वारा डीएपी की खरीद की व्यवहार्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हुए, सरकार ने 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2024 तक की अवधि के लिए डीएपी की वास्तविक पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) बिक्री पर एनबीएस दरों से परे डीएपी पर एकमुश्त विशेष पैकेज को 3500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से मंजूरी दी है। इसकी समय-सीमा को अब किसानों को सस्ती कीमत पर डीएपी की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 31 मार्च 2025 तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा पीएंडके उर्वरक कंपनियों द्वारा निर्धारित एमआरपी के मूल्यांकन पर दिशानिर्देश भी ओडिशा सहित देशभर के किसानों को सस्ती कीमतों पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं।

यूरिया किसानों को वैधानिक रूप से अधिसूचित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर उपलब्ध कराया जाता है। यूरिया के 45 किलोग्राम बैग का एमआरपी 242 रुपये प्रति बैग है (नीम कोटिंग और लागू करों के लिए शुल्क को छोड़कर) और एमआरपी 1 मार्च  2018 से अभी तक अपरिवर्तित बनी हुई है। यूरिया के खेत पर आपूर्ति की गई लागत और यूरिया इकाइयों द्वारा शुद्ध बाजार प्राप्ति के बीच का अंतर भारत सरकार द्वारा यूरिया निर्माता/आयातकर्ता को सब्सिडी के रूप में दिया जाता है। तदनुसार, सभी किसानों को रियायती दरों पर यूरिया की आपूर्ति की जा रही है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 'दीर्घकालिक उर्वरक प्रयोग' पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत प्रमुख फसल प्रणालियों के अंतर्गत विभिन्न मिट्टी प्रकारों (निश्चित स्थानों) में रासायनिक उर्वरकों के दीर्घकालिक उपयोग के प्रभाव का आकलन किया है। निश्चित स्थानों पर पांच दशकों में किए गए अध्ययन से पता चला है कि संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग के साथ मिट्टी की उर्वरता पर रासायनिक उर्वरकों का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता है। हालांकि, वर्षों से कम कार्बनिक पदार्थों के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट के साथ-साथ कई पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। अकेले नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक के लगातार उपयोग करने से मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता पर हानिकारक प्रभाव पड़ा और इसमें अन्य पोषक तत्वों की कमी देखी गई। पिछले कुछ दशकों में पता चला है कि एनपीके निषेचित प्रणाली में भी , सूक्ष्म और द्वितीयक पोषक तत्वों की कमी के रूप में पोषण संबंधी विकार कुछ वर्षों के बाद सामने आए ड्रिप सिंचाई (फर्टिगेशन) के मामले में उच्च जल और पोषक तत्व उपयोग दक्षता के कारण कम पानी और उर्वरकों के साथ तुलनीय फसल उपज प्राप्त की जा सकती है।

आईसीएआर रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग और मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए पौधों के पोषक तत्वों के अकार्बनिक और कार्बनिक दोनों स्रोतों (खाद, जैव-उर्वरक आदि) के संयुक्त उपयोग के माध्यम से मृदा परीक्षण आधारित संतुलित और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की सिफारिश करता है। आईसीएआर इन सभी पहलुओं पर किसानों को शिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण भी देता है और  एफएलडी आदि का भी आयोजन करता है। ये सभी उपाय देश में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करते हैं।  

इसके अलावा, सरकार ने गोबरधन पहल के तहत संयंत्रों में उत्पादित जैविक खाद, यानी खाद को बढ़ावा देने के लिए 1500 रुपये/एमटी की दर से बाजार विकास सहायता (एमडीए) को मंजूरी दी है। इसमें हितधारक मंत्रालयों/विभागों की विभिन्न बायोगैस/सीबीजी सहायता योजनाएं/कार्यक्रम शामिल हैं, जैसे कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) की किफायती परिवहन के लिए सतत विकल्प (एसएटीएटी) योजना, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) का 'अपशिष्ट से ऊर्जा' कार्यक्रम, पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) का स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), आदि। कुल परिव्यय 1451.84 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26) है, जिसमें अनुसंधान अंतराल वित्त पोषण आदि के लिए 360 करोड़ रुपये का कोष शामिल है।

यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को राज्यसभा में दी।

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