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संसद प्रश्न : नदी संरक्षण प्रयासों में साझेदारों की भागीदारी
پوسٹ کرنے کی تاریخ:
10 MAR 2025 5:53PM by PIB Delhi
यह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) और शहरी स्थानीय निकायों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे नदियों और अन्य जल निकायों में छोड़े जाने से पहले सीवेज और औद्योगिक अपशिष्टों का निर्धारित मानदंडों के अनुसार आवश्यक उपचार सुनिश्चित करें। भारत सरकार देश में नदियों के प्रदूषण को कम करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम, राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) और कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (अमृत) जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों का सहयोग कर रही है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्यों सहित देश भर में नदी प्रदूषण को कम करने के प्रयासों में स्थानीय अधिकारी, समाज और गैर सरकारी संगठन शामिल हैं। नदी संरक्षण में हितधारकों की भागीदारी के लिए उठाए गए कुछ कदम इस प्रकार हैं:
स्वच्छ भारत मिशन के तहत नदियों की सफाई, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए देश भर में विभिन्न उपक्रम किए गए हैं।
जल शक्ति अभियान जल शक्ति मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य जल संरक्षण और प्रबंधन, नदियों सहित जल निकायों को पुनर्जीवित करने, जन जागरूकता, स्थानीय निकायों और समाज की भागीदारी और कुशल सिंचाई आदि को बढ़ावा देना है।
गंगा उत्सव पवित्र गंगा के प्रति सम्मान के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नदी के पुनर्जीवन और पर्यावरण जागरूकता पर जोर दिया जाता है। नदियों के महत्व और उनके संरक्षण के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए नवंबर 2021 में राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जन गंगा के माध्यम से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसी जी) का उद्देश्य एक सामूहिक समुदाय-संचालित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है जो गंगा नदी की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
प्रधानमंत्री ने सभी स्थानीय ग्राम प्रधानों से जल संरक्षण के लिए कदम उठाने को कहा साथ ही जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने का आह्वान भी किया।
जन जागरूकता अभियान के तहत फरवरी 2025 में नदियों के संरक्षण में लोगों की जागरूकता/भागीदारी के लिए आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू एवं कश्मीर, केरल, मणिपुर, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड आदि में विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नदियों के तट पर आरती, नदी सफाई अभियान, यात्राएं, स्लोगन/ड्रॉइंग/निबंध प्रतियोगिता आदि जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी)/प्रदूषण नियंत्रण समितियां (पीसीसी) और एनएमसीजी अपशिष्ट निर्वहन मानकों के संबंध में उद्योगों और सीवेज उपचार संयंत्रों की निगरानी करते हैं। इसके साथ ही ये पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत गैर-अनुपालन करने वाले उद्योगों और स्थानीय निकायों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हैं।
सीपीसीबी के अनुसार मानक का पालन न करने पर 73 अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने पर्यावरण नियमों का पालन न करने पर विभिन्न संबंधित अथॉरिटी पर जुर्माना भी लगाया है।
जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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