कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सरकार की प्रमुख योजना के अंतर्गत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन का लक्ष्य हासिल किया गया


आत्मनिर्भर कृषि की ओर एक कदम

Posted On: 28 FEB 2025 3:21PM by PIB Delhi

परिचय

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 फरवरी, 2020 को 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और संवर्धन के लिए केंद्रीय योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना को वर्ष 2027-28 तक 6,865 करोड़ रुपए के बजट परिव्यय के साथ शुरू किया गया था। योजना की शुरुआत के बाद से, 4,761 एफपीओ को 254.4 करोड़ रुपए के प्रतिभूति अनुदान जारी किए गए हैं और 1,900 एफपीओ को 453 करोड़ रुपए का क्रेडिट गारंटी कवर जारी किया गया है।[1]

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में बिहार के भागलपुर में पीएम-किसान की 19वीं किस्त जारी करने के साथ ही 10,000वें एफपीओ का शुभारंभ किया। 10,000वां एफपीओ खगड़िया जिले में पंजीकृत किया गया है और यह मक्का, केला और धान पर केंद्रित है। एफपीओ केवल संगठन नहीं हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और छोटे किसानों को महत्वपूर्ण बाजार लाभ, मोल-भाव की शक्ति और बाजार पहुंच में सुधार के लिए सीधी पहुंच प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। देश में लगभग 30 लाख किसान एफपीओ से जुड़े हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। ये एफपीओ अब कृषि क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे हैं।[3]

इस योजना के अंतर्गत गठित प्रत्येक नए एफपीओ को पांच साल की अवधि के लिए हैंडहोल्डिंग समर्थन और योजना के अंतर्गत प्रत्येक एफपीओ को 3 साल के लिए प्रबंधन लागत के लिए 18 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त एफपीओ के प्रत्येक किसान सदस्य को 2,000 रुपए का प्रतिभूति अनुदान दिया जाएगा, जिसकी सीमा प्रति एफपीओ 15.00 लाख रुपये होगी और एफपीओ की संस्थागत ऋण पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पात्र ऋणदाता संस्थानों से प्रति एफपीओ 2 करोड़ रुपये तक के परियोजना ऋण की गारंटी सुविधा दी जाएगी[4]

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एफपीओ क्या हैं?

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) कंपनी अधिनियम के भाग IXA के सहकारी समिति अधिनियम के अंतर्गत निगमित/पंजीकृत किसान-उत्पादक संगठन को संदर्भित करता है और कृषि तथा संबद्ध क्षेत्र के उत्पादन और विपणन में पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से सामूहिक लाभ उठाने के उद्देश्य से इनका गठन किया गया है।

किसान उत्पादक संगठनों के पीछे की अवधारणा यह है कि किसान जो कृषि उत्पादों को पैदा करते हैं वे अपना समूह बना सकें। इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए  कृषि मंत्रालय के कृषि और सहकारिता विभाग ने लघु कृषक कृषि व्यवसाय संघ (एसएफएसी) को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन में राज्य सरकारों का समर्थन करने के लिए अधिकृत किया था।[5]

10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन और संवर्धनयोजना का मुख्य उद्देश्य उत्पादन और विपणन में पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं का लाभ उठाना है, ताकि कुशल, लागत प्रभावी और सतत संसाधन उपयोग के माध्यम से उत्पादकता को बढ़ाया जा सके, ताकि स्थायी आय-उन्मुख खेती सुनिश्चित की जा सके, जिससे कृषि उत्पादन की लागत में कमी आए और किसानों की आय में वृद्धि हो।[6]

एफपीओ की आवश्यकता

छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को कृषि उत्पादन चरण के दौरान प्रौद्योगिकी, गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और कीटनाशकों तक पहुंच और आवश्यक वित्त आदि चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी उपज के विपणन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

एफपीओ ऐसे छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को सामूहिक रूप से संगठित करने में मदद करते हैं। एफपीओ के सदस्य अपनी आय में तेजी से वृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी, इनपुट, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच प्राप्त करने के लिए संगठन में एक साथ अपनी गतिविधियों का प्रबंधन करेंगे।[7]

उद्देश्य

स्थायी आय-उन्मुख खेती के विकास और कृषि समुदायों के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास और कल्याण के लिए 10000 नए एफपीओ बनाने के लिए संपूर्ण तथा सहायक इकोसिस्टम प्रदान करना।

कुशल, लागत प्रभावी और संसाधनों के उपयोग के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना और अपने उत्पादों के लिए बेहतर तरलता और बाजार संपर्कों के माध्यम से उच्च लाभ प्राप्त करना।

एफपीओ के प्रबंधन, इनपुट, उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क, ऋण संपर्क और प्रौद्योगिकी के उपयोग आदि के सभी पहलुओं में इसके निर्माण के वर्ष से पांच साल तक नए एफपीओ को सहायता और समर्थन प्रदान करना।

एफपीओ को सरकार से समर्थन की अवधि से परे आर्थिक रूप से व्यवहार्य और आत्मनिर्भर बनने के लिए कृषि उद्यमिता कौशल विकसित करने के लिए प्रभावी क्षमता निर्माण प्रदान करना।[8]

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देश में एफपीओ के लिए मंत्रालयों का अभिसरण-

  1. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय: यह मंत्रालय एफपीओ को बीज, कीटनाशक और उर्वरक लाइसेंस प्राप्त करने में सहायता करता है, तथा कृषि इनपुट कंपनियों के माध्यम से डीलरशिप प्रदान करने में सहायता करता है। इस सहायता से, एफपीओ डीलर/वितरक के रूप में काम करने और आय अर्जित करने में सक्षम होते हैं। मंत्रालय एफपीओ को संस्थागत खरीदारों से जोड़कर और ओएनडीसी, ई-एनएएम आदि जैसे ई-कॉमर्स मंच के माध्यम से भी सहायता करता है।[11]
  2. खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय: वित्तीय परिव्यय के माध्यम से एफपीओ के लिए पात्र परियोजना लागत का 35 प्रतिशत क्रेडिट-लिंक्ड पूंजी सब्सिडी प्रदान करना, ब्रांडिंग और विपणन के लिए 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान की सहायता प्रदान करना।[12]
  3. सूक्ष्म एवं लघु उद्यम मंत्रालय: एफपीओ के लिए विशेष प्रावधान जैसे कि एफपीओ प्रबंधन लागत, इक्विटी अनुदान और क्रेडिट गारंटी सुविधा के रूप में निधियों तक पहुंच के अलावा क्षमता निर्माण प्रशिक्षण, मार्किंग और क्रेडिट लिंकेज की सहायता प्रदान करना। [13]
  4. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय: एफपीओ के लिए तैयार लाभ प्रदान करने के लिए बनाई गई योजनाएं, जैसे "डेयरी गतिविधियों में लगे डेयरी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों का समर्थन करना" वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान 500 करोड़ रुपये के कुल आवंटन के साथ।[14] इसके अतिरिक्त, एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) के माध्यम से 100 चारा एफपीओ का गठन और संवर्धन करना।[15]
  5. एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण): एपीडा पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए निधि (एसएफयूआरटीआई) योजना के अंतर्गत निर्यात और एमएसएमई के लिए पंजीकृत एफपीओ को उद्यम स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान करता है।[16]
  6. मसाला बोर्ड: निर्यात विकास के लिए प्रगतिशील, नवीन और सहयोगात्‍मक हस्तक्षेप (एसपीआईसीईडी) योजना मसाला क्षेत्र में स्थिरता का विस्तार करने और इलायची (छोटे और बड़े) की उत्पादकता में सुधार करने के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य फसल-उपरांत सुधार, मसालों के निर्यात संवर्धन, निर्यात में मूल्य वर्धित मसालों की हिस्सेदारी बढ़ाने, गुणवत्ता और सुरक्षा के लागू मानकों के साथ निर्यात खेपों के अनुपालन का मूल्यांकन, हितधारकों की क्षमता निर्माण और कौशल विकास आदि के माध्यम से गुणवत्ता वाले मसालों का निर्यात योग्य अधिशेष को बढ़ाना है। [17]

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एफपीओ द्वारा दी जाने वाली सेवाएं और गतिविधियां

एफपीओ अपने विकास के लिए निम्नलिखित प्रमुख सेवाएं और गतिविधियां प्रदान करते हैं:

  1. बीज, उर्वरक, कीटनाशक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन इनपुट उचित रूप से कम थोक दरों पर उपलब्ध करवाना।
  2. सदस्यों को प्रति 2 इकाई उत्पादन लागत कम करने के लिए कस्टम हायरिंग के आधार पर आवश्यकता-आधारित उत्पादन और उत्पादन के बाद की मशीनरी और उपकरण जैसे कल्टीवेटर, टिलर, स्प्रिंकलर सेट, कंबाइन हार्वेस्टर और ऐसे अन्य मशीनरी और उपकरण उपलब्ध करवाना।
  3. उपयोगकर्ता शुल्क के आधार पर उचित रूप से सस्ती दर पर सफाई, परख, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और खेत स्तर की प्रसंस्करण सुविधाएं जैसे मूल्य संवर्धन उपलब्ध करवाना। भंडारण और परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
  4. बीज उत्पादन, मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती आदि जैसी उच्च आय वाली गतिविधियां शुरू करना।
  5. किसान-सदस्यों की उपज के छोटे-छोटे समूहों का एकत्रीकरण करना; उन्हें अधिक विपणन योग्य बनाने के लिए मूल्य जोड़ना।
  6. उत्पादन और विपणन में विवेकपूर्ण निर्णय के लिए उपज के बारे में बाजार की जानकारी की सुविधा प्रदान करना।
  7. साझा लागत के आधार पर भंडारण, परिवहन, लोडिंग/अनलोडिंग आदि जैसी रसद सेवाओं की सुविधा प्रदान करना।
  8. खरीदारों और विपणन माध्‍यमों के बीच बेहतर संवाद के साथ लाभकारी मूल्य के लिए एकत्रित उपज का विपणन करना।[19]

योजना के अंतर्गत पहल

ऋण गारंटी निधि: एफपीओ को इनपुट कलेक्टिवाइजेशन, कार्यशील पूंजी, विपणन और सदस्य किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए अनुदान और ऋण दोनों प्रकार के वित्त की आवश्यकता होती है। औपचारिक वित्तीय संस्थानों से ऋण के लिए एफपीओ की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, 10,000 एफपीओ के गठन और संवर्धन के लिए केंद्रीय योजना के अंतर्गत एक समर्पित ऋण गारंटी निधि (सीजीएफ) बनाई गई है। सीजीएफ वित्तीय संस्थानों को एफपीओ को ऋण देने के लिए ऋण गारंटी कवर प्रदान करता है।[20]

ओएनडीसी मंच: देश भर में उपभोक्ताओं को ऑनलाइन उपज बेचने के लिए 8,000 पंजीकृत किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) में से लगभग 5 हजार को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। देश के किसी भी हिस्से में अपने खरीदारों तक पहुंच के लिए ओएनडीसी पर एफपीओ को शामिल करना केंद्र सरकार के उत्पादकों को बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन भुगतान, व्यवसाय-से-व्यवसाय और व्यवसाय-से-उपभोक्ता लेनदेन तक सीधी पहुँच के साथ एफपीओ को सशक्त बनाना है।[21]

10,000 एफपीओ को सीएससी में बदलने के लिए समझौता ज्ञापन: सीएससी एसपीवी (कॉमन सर्विसेज सेंटर स्पेशल पर्पज व्हीकल) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य 10,000 एफपीओ योजना के गठन और संवर्धनके अंतर्गत पंजीकृत एफपीओ को सीएससी में परिवर्तित करना और उन्हें नागरिक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान करने में मदद करना है। समझौता ज्ञापन के अनुसार, 10,000 एफपीओ को सीएससी में बदल जाएगा। सीएससी एसपीवी एफपीओ को डिजिटल सेवा पोर्टल पर उपलब्ध सेवाएं प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। एफपीओ के माध्यम से सीएससी सेवाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।[22]

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एफपीओ को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के लिए छोटे, सीमांत और महिला किसानों/महिला स्‍वयं सहायता समूह, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर अन्य श्रेणियों आदि को सदस्य के रूप में शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

आवेदन कैसे करें

एफपीओ/एफपीसी (कृषि उत्पादक कंपनी) वेबसाइट (www.enam.gov.in) या मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-एनएएम पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं या निकटतम ई-एनएएम मंडी में निम्नलिखित विवरण प्रदान कर सकते हैं:

एफपीओ/एफपीसी का नाम

अधिकृत व्यक्ति (एमडी/सीईओ/प्रबंधक) का नाम, पता, ईमेल आईडी और संपर्क नंबर

बैंक खाता विवरण (बैंक का नाम, शाखा, खाता संख्या, आईएफएससी कोड)[24]

निष्कर्ष

एफपीओ का गठन और संवर्धन कृषि को आत्मनिर्भर कृषि में बदलने की दिशा में पहला कदम है। इस केंद्रीय योजना के अंतर्गत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का सफल गठन कृषि क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सामूहिकता को बढ़ावा देने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान करके, इस पहल ने महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों सहित लाखों छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाया है। यह उपलब्धि न केवल कृषि उत्पादकता और आय को बढ़ाती है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक लचीलेपन में भी योगदान देती है। एफपीओ का निरंतर विस्तार एक आत्मनिर्भर, कुशल और समृद्ध कृषि इकोसिस्टम् को आकार देने में सहायक होगा।

संदर्भ:

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