विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

उपयोग किए जाने वाले पेंट की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता हैशोधकर्ताओं ने मिट्टी में दरार उत्पन्न होने की भविष्यवाणी करने के लिए नुस्खा विकसित किया, जिससे कोटिंग्स में

Posted On: 10 DEC 2024 5:17PM by PIB Delhi

शोधकर्ता पुरानी मिट्टी में पहली दरार उत्पन्न होने के वास्तविक समय का सटीक अनुमान लगाने में सक्षम बन गए हैं। उनका शोध रक्त और पेंट जैसे कोलाइडल परतों को सुखाने के अन्य रूपों पर भी लागू होता है, यह एक ऐसी जानकारी है जो रोग निदान, रक्त की सूखने वाली बूंदों का निरीक्षण कर एनीमिया जैसी स्थितियों का निदान, फोरेंसिक और पेंटिंग पुन:स्थापन और कोटिंग्स में उपयोग किए जाने वाले पेंट की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद कर सकती है।

चिकनी मिट्टी, प्राकृतिक मिट्टी का एक प्रमुख घटक, का उपयोग पेंट और कोटिंग्स तैयार करते समय एक संशोधक के रूप में किया जाता है। सूखने के दौरान, कोलाइडल मिट्टी के निलंबन और चिकनी मिट्टी सूखने से उत्पन्न होने वाले तनाव के कारण फटने लगती है। यहां तक ​​कि जब निर्जलीकरण को दबा दिया जाता है, तब भी जलीय मिट्टी का निलंबन अपनी तन्यकता और चिपचिपाहट के साथ भौतिक उम्र बढ़ने का प्रदर्शन करते हैं, जो समय के साथ लगातार बढ़ता जाता है क्योंकि मिट्टी के कण समय-आधारित अंतर-कण इलेक्ट्रोस्टैटिक इंटरैक्शन के कारण जैल जैसे नेटवर्क में अपने आप इकट्ठे होने लगते हैं।

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) का एक स्वायत्त संस्थान में पदार्थ विज्ञान का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने पहली दरार उत्पन्न होने समय, फ्रैक्चर ऊर्जा (जो प्लास्टिक अपव्यय और संग्रहीत सतह ऊर्जा का योग है) और सूखने वाली मिट्टी के नमूने की तन्यकता के बीच एक संबंध प्रस्तावित किया है, जो पहली दरार की वास्तविक जानकारी प्रदान करने में मदद कर सकती है।

रैखिक पोरोइलास्टिसिटी के नाम से प्रसिद्ध सिद्धांत का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने दरार की शुरुआत के समय सूखने वाले नमूने की सतह पर तनाव का अनुमान लगाया। रैखिक पोरोइलास्टिसिटी छिद्रयुक्त मीडिया प्रवाह पर बना एक सिद्धांत है, जो संतृप्त तन्यक जैल के छिद्रों में पानी (या किसी मोबाइल वर्ग) के फैलाव का वर्णन करता है। उन्होंने इस तनाव की तुलना एक मानदंड द्वारा अनुमानित एक महत्वपूर्ण तनाव से की, जिसमें कहा गया है कि एक दरार तब बढ़ेगा, जब फैलने के दौरान जारी ऊर्जा एक नई दरार सतह (ग्रिफिथ की कसौटी) का निर्माण करने के लिए आवश्यक ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक होगी।

इस प्रकार से प्राप्त संबंध को प्रयोगों की एक श्रृंखला करके मान्य किया गया। उन्होंने आगे कहा कि यही स्केलिंग संबंध अन्य कोलाइडल पदार्थ के लिए भी काम करता है जैसे सिलिका जैल। यह शोध पत्रिका 'फिजिक्स ऑफ फ्लूड्स' में प्रकाशित हुआ है।

प्रोफेसर रंजिनी बंद्योपाध्याय, रियोडीएलएस लैब की प्रमुख और आरआरआई में सॉफ्ट कंडेंस्ड मैटर ग्रुप में फैकल्टी ने कहा यह सहसंबंध उत्पाद विकास के दौरान पदार्थ के डिजाइन के अनुकूलन के समय उपयोगी साबित हो सकता है। हम इस जानकारी को अपना सकते हैं और उद्योग-श्रेणी के पेंट और कोटिंग्स के निर्माण के दौरान पदार्थ संरचना में बदलाव का सुझाव दे सकते हैं, जिससे वे दरार का बेहतर प्रतिरोध कर सकें और उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार ला सकें।

लैपोनाइट का उपयोग करके, डिस्क के आकार के कणों के साथ एक सिंथेटिक मिट्टी 25 - 30 नैनोमीटर (एनएम) और मोटाई में एक एनएम, शोधकर्ताओं की टीम ने बढ़ती लोच के साथ कई लैपोनाइट नमूने बनाए। प्रत्येक नमूने को पेट्री डिश में 35 से 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर सुखाया गया। नमूनों को पूर्ण रूप से सूखने में 18-24 घंटे का समय लगा और प्रत्येक नमूने की वाष्पीकरण और तन्यकता दर मापी गई। लैपोनाइट नमूनों से जैसे ही पानी वाष्पित हुआ, कण पुन: व्यवस्थित हो गए और पदार्थ की सतह पर तनाव उत्पन्न हुआ।

उच्च नमूना तन्यकता इन तनावों के प्रभाव में नमूने की विकृत करने की बेहतर क्षमता दर्शाता है।

वैभव परमार, पेपर के पहले लेखक और आरआरआई में पीएचडी छात्र ने कहा कि पहली दरार उत्पन्न होने में 10 से 14 घंटों का समय लगा। नमूने की तन्यकता और फ्रैक्चर ऊर्जा के आधार पर, दरारों के उभरने का समय अलग-अलग होता है। तेजी से विलायक क्षति होने के कारण बढ़ते तापमान के साथ दरार शुरू होने का समय कम हो जाता है और इसलिए मिट्टी की तन्यकता में तीव्र गति से बढ़ोतरी होती है। अधिक तापमान पर नमूना तेजी से सूखता है, जिससे इसकी सतह पर तनाव विकास दर बढ़ जाती है। मिट्टी के कण और उनकी परस्पर क्रिया दरार की शुरुआत के समय को प्रभावित करती है क्योंकि वे नमूना जमने की दर को नियंत्रित करते हैं और इसलिए, फ्रैक्चर ऊर्जा और तन्यकता जैसे यांत्रिक गुणों को नियंत्रित करते हैं।

पाया गया कि दरारें सबसे पहले पेट्री डिश की बाहरी दीवारों पर विकसित होना शुरू हुईं और बाद में अंदर की ओर बढ़ती गईं। बाद में, जैसे-जैसे नमूना पुराना होता गया या समय बीतता गया दरारें विकसित होती गईं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि मिट्टी में दरार बनना एक जटिल घटना है, जो लंबाई के कई पैमानों पर देखी जाती है और इसलिए, सूखने के कारण हुई दरारों को समझने की अनिवार्य आवश्यकता थी। यह जानकारी इसमें शामिल भूभौतिकीय एवं यांत्रिक प्रक्रियाओं को ठीक प्रकार से समझने में मदद कर सकती है।

मिट्टी एक अत्यधिक गर्मी प्रतिरोधी पदार्थ है। यह एक उत्कृष्ट तापरोधी है और इसलिए ये अंतरिक्ष यान की कोटिंग्स जैसे अत्यधिक गर्मी वाले वातावरण अनुप्रयोगों के लिए पहली पसंद है। शोधकर्ताओं ने आगे कहा कि मिट्टी-पानी का मिश्रण शुरू में बहने वाले तरल की तरह व्यवहार करेगा और समय के साथ यह एक चिपचिपा ठोस में बदल सकता है, जिसमें तरल एवं ठोस दोनों के गुण प्रदर्शित होते हैं। यह अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने मिट्टी के निर्जलीकरण पर शारीरिक उम्र बढ़ने के प्रभाव का निरीक्षण करने की कोशिश की गई।

बंद्योपाध्याय ने कहा कि हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि पदार्थ जितना ज्यादा लचीला होगा, उसकी फ्रैक्चर ऊर्जा उतनी कम होगी और दरारें तेजी से विकसित होंगी। हमने नमूना तन्यकता और फ्रैक्चर ऊर्जा के संदर्भ में दरार निर्माण की भविष्यवाणी करने का एक तरीका निकाला है, जिसे प्रयोगशाला प्रयोगों में मापा जा सकता है। दैनिक तापमान में उतार-चढ़ाव का अनुकरण करने के लिए चक्रीय तापमान परिवर्तन के लिए संबंध विकसित किए जा सकते हैं।

शोध से पता चलता है कि पदार्थ की सांद्रता, नमक या पीएच स्तर को अलग-अलग करके, पदार्थ की तन्यकता को समायोजित किया जा सकता है और बदले में, इसकी दरार ठीक करना संभव है। इसका उपयोग अंतरिक्ष यान या दवा कैप्सूल पर कोटिंग्स में दरार को रोकने में किया जा सकता है, जो नियंत्रित वातावरण में किए जाते हैं।

कैप्शन 1: पहली दरार का उभरना

कैप्शन 2: अलग-अलग तन्यकता वाले नमूनों , बी और सी में समय के साथ दरारों का उभरना

 

एमजी/केसी/एके


(Release ID: 2084565) Visitor Counter : 46


Read this release in: English