इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
भारत सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों, भ्रामक विज्ञापनों और नकली उत्पादों से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने के लिए कदम उठा रही है
प्रविष्टि तिथि:
27 NOV 2024 7:05PM by PIB Delhi
भारत सरकार की नीतियों का उद्देश्य देश में उपयोगकर्ताओं के लिए खुली, सुरक्षित, विश्वसनीय एवं जवाबदेह इंटरनेट सेवा सुनिश्चित करना है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों, भ्रामक विज्ञापनों और नकली उत्पादों से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहल इस प्रकार हैं:
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ("एमईआईटीवाई") ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ("आईटी अधिनियम") द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ("सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021") को अधिसूचित किया है। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में मध्यस्थों पर ऐसी सूचनाओं के संबंध में विशेष सावधानी बरतने के दायित्व निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें प्लेटफॉर्म पर होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित, प्रेषित, संग्रहीत या साझा नहीं किया जाना है। मध्यस्थों को वर्तमान में लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी सूचना को होस्ट, संग्रहीत या प्रकाशित नहीं करना चाहिए। मध्यस्थों को किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी जानकारी को होस्ट, स्टोर या प्रकाशित नहीं करना चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में दिए गए अनुसार उचित परिश्रम का पालन करने में विफल रहने की स्थिति में मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत किसी भी तीसरे पक्ष की जानकारी, डेटा या संचार लिंक के लिए देयता से छूट खो देते हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ("सीपीए") के तहत स्थापित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ("सीसीपीए") ने अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के मामलों के जवाब में 6 मार्च, 2024 को एक व्यापक सलाह जारी की है। सीपीए के अनुसार, इस परामर्श में विभिन्न कानूनों के तहत निषिद्ध गैरकानूनी गतिविधियों के विज्ञापन, प्रचार एवं समर्थन पर प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ("एमआईबी") ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सहित मीडिया को 21 मार्च, 2024 को एक परामर्श जारी किया है, जिसमें ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और/या इन प्लेटफॉर्म को छद्म तरीके से दर्शाने वाले किसी भी ऐसे उत्पाद/सेवा के विज्ञापनों को प्रकाशित अथवा प्रसारित करने से परहेज करने को कहा गया है। ऑनलाइन विज्ञापन बिचौलियों को भी सलाह दी गई है कि वे ऐसे विज्ञापनों को भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखकर न दिखाएं।
साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र इस प्रकार है: सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अनुसार शिकायत के समाधान के लिए बिचौलियों द्वारा शिकायत अधिकारी की नियुक्ति की आवश्यकता होती है। ऐसे अधिकारी को इन नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध पीड़ित/शिकायतकर्ता की शिकायतों का समयबद्ध निवारण करना आवश्यक है। यदि पीड़ित/शिकायतकर्ता मध्यस्थ के शिकायत अधिकारी के निर्णय से व्यथित है या उसे समय पर निवारण नहीं मिलता है, तो वह शिकायत अधिकारी से संचार प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर शिकायत अपीलीय समिति में अपील कर सकता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ("सीपीए") को लागू करने वाला उपभोक्ता कार्य विभाग जिला से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक तीन स्तरीय अर्ध-न्यायिक मंचों के माध्यम से उपभोक्ताओं की शिकायतों का निवारण करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम अनुचित व्यापार कार्य प्रणालियों से संबंधित विवादों सहित उपभोक्ता विवादों के सरल व त्वरित निवारण का भी प्रावधान करता है। जिला/राज्य/राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आयोगों को विशिष्ट प्रकृति की राहत देने और जहां भी उचित हो, उपभोक्ताओं को मुआवजा देने का अधिकार है।
उपभोक्ता कार्य विभाग ने ई-कॉमर्स में अनुचित व्यापार प्रणालियों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए सीपीए के प्रावधानों के तहत उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 को अधिसूचित किया है। ये नियम अन्य बातों के साथ-साथ, ई-कॉमर्स संस्थाओं की जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हैं और ग्राहक शिकायत निवारण के प्रावधानों सहित मार्केट-प्लेस तथा इन्वेंट्री ई-कॉमर्स संस्थाओं की देनदारियों को निर्दिष्ट करते हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भी ई-कॉमर्स क्षेत्र में पहचाने गए तेरह निर्दिष्ट डार्क पैटर्न को सूचीबद्ध करते हुए डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के उद्देश्य से 30 नवंबर, 2023 को “डार्क पैटर्न की रोकथाम व विनियमन के लिए दिशानिर्देश, 2023” जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ("एमएचए") ने साइबर अपराधों से व्यापक एवं समन्वित तरीके से निपटने के उद्देश्य से कानून प्रवर्तन एजेंसियों ("एलईए") के लिए एक ढांचा और इकोसिस्टम प्रदान करने हेतु भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ("आई4सी") की स्थापना की है। गृह मंत्रालय ने जनता को सभी प्रकार के साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime.gov.in) भी लॉन्च किया है। इस पोर्टल पर रिपोर्ट की गई साइबर अपराध की घटनाओं को कानून के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसी को भेज दिया जाता है।
यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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एमजी/केसी/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2078278)
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