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55वें आईएफएफआई में प्रदर्शित ‘जिप्सी’ और ‘35 चिन्ना कथा कादु’ सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक के प्रतिष्ठित रजत मयूर पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं


‘जिप्सी’ खानाबदोश समुदाय में दृढ़ता एवं खोज की भावना की पड़ताल करती है: शशि चंद्रकांत खंडारे, निदेशक

‘35 चिन्ना कथा कादु’ प्यार, शिक्षा और एक परिवार द्वारा प्रदान किए जाने वाले पालन-पोषण के माहौल से संबंधित एक मर्मस्पर्शी कहानी है:" नंद किशोर इमानी, निदेशक

फीचर फिल्म के सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक के प्रतिष्ठित रजत मयूर पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली दो उल्लेखनीय फिल्में, ‘जिप्सी’ और ‘35 चिन्ना कथा कादु’ गोवा में जारी भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के दौरान पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन मे चर्चा के केन्द्र में रही।

निर्माता श्रद्धा शशि खंडारे और मुख्य अभिनेता कबीर खंडारे के साथ, ‘जिप्सी’ के निर्देशक शशि चंद्रकांत खंडारे ने एक खानाबदोश परिवार के अस्तित्व के संघर्ष की एक दमदार कहानी के बारे में अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। खंडारे ने कहा, “यह फिल्म विभिन्न समुदायों के लिए अभी भी अधूरी रह जाने वाली बुनियादी जरूरतों के बारे में बताती है और फिल्म के युवा नायक जोद्या के दृष्टिकोण से संवेदी अनुभवों, विशेष रूप से गंध के माध्यम से प्रदान किए गए मूल्यों पर प्रकाश डालती है।”

मीडिया को संबोधित करते हुए, ‘35 चिन्ना कथा कादु’ के निर्देशक नंद किशोर इमानी ने इस तेलुगू फिल्म को तर्क एवं भावना से जुड़ा एक दिल को छू लेने वाला नाटक बताया। उन्होंने कहा, “इस फिल्म की कहानी गणित के विषय से जूझ रहे एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिज्ञासा उसके मध्यवर्गीय परिवार के भावनात्मक आयामों को सामने लाती है। यह फिल्म बच्चे के माता-पिता, विशेष रूप से उसकी मां सरस्वती, जिसका किरदार निवेथा थॉमस ने निभाया है, द्वारा परिणामों से अधिक प्रगति के महत्व पर जोर देते हुए बच्चे की शैक्षणिक चुनौतियों से निपटने की ललक को खूबसूरती से दर्शाती है।”

अभिनेत्री निवेथा थॉमस ने अपनी भूमिका की गहराई पर प्रकाश डाला: “सरस्वती केवल एक मां ही नहीं, बल्कि त्याग एवं बिना शर्त प्यार की ऐसी प्रतीक भी है, जो भारतीय मातृत्व के सार को दर्शाती है। यह किरदार मेरे साथ गहराई से जुड़ा है, क्योंकि यह सामाजिक अपेक्षाओं को संभालने के साथ-साथ बच्चों में जिज्ञासा को बढ़ावा देने के संतुलन को चित्रित करता है।”

अभिनेता विश्वदेव रचाकोंडा ने इस फिल्म की जटिलता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “35 चिन्ना कथा कादु प्रेम, शिक्षा एवं पारिवारिक रिश्तों के विषयों को आपस में जोड़ती है और जटिल मानवीय पहलुओं की भरोसेमंद व प्रामाणिक तरीके से पड़ताल करती है।"

ये दोनों फिल्में कहानी कहने के प्रति दोनों फिल्मकारों की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जो मनोरंजन को सार्थक कहानियों के साथ जोड़ती है। विविध कहानियों को वैश्विक मंच पर लाने में इस महोत्सव की भूमिका को रेखांकित करते हुए, दोनों निर्देशकों ने उनके काम को मान्यता देने के लिए आईएफएफआई जूरी के प्रति आभार व्यक्त किया।

संवाददाता सम्मेलन का समापन उस सिनेमा का उत्सव मनाने के आह्वान के साथ हुआ, जो न केवल मनोरंजन करता है बल्कि संवाद और चिंतन को भी प्रेरित करता है।

संवाददाता सम्मेलन यहां देखें:

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एमजी / केसी / आर / डीए

 

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(रिलीज़ आईडी: 2078067) आगंतुक पटल : 53
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