रक्षा मंत्रालय

रक्षा खरीद परिषद ने 4,276 करोड़ रुपये मूल्य के तीन रक्षा पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की, भारतीय सेना के लिए दो और भारतीय नौसेना हेतु एक प्रस्ताव को आवश्यकतानुसार मंजूरी दी गई

Posted On: 10 JAN 2023 5:59PM by PIB Delhi

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 10 जनवरी, 2023 को रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान 4,276 करोड़ रुपये मूल्य के तीन पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए आवश्यकतानुसार स्वीकृति (एओएन) को मंजूरी दी गई। इन तीन रक्षा सौदों में भारतीय सेना के दो सौदे तथा भारतीय नौसेना के लिए एक खरीद (भारतीय-आईडीडीएम श्रेणी के अंतर्गत) प्रस्तावित हैं।

रक्षा खरीद परिषद ने टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल- हेलीना, लॉन्चर और अन्य संबंधित सहायक उपकरणों की खरीद के लिए अपनी सहमति दे दी है, इन सभी रक्षा उत्पादों को उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) में एकीकृत किया जाएगा। यह मिसाइल दुश्मन के खतरे का सख्ती से मुकाबला करने के लिए उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के शस्त्रीकरण का एक अनिवार्य हिस्सा है। सैन्य शक्ति में इन रक्षा उत्पादों के शामिल होने से भारतीय सेना की आक्रामक क्षमता और अधिक सशक्त हो जाएगी।

रक्षा खरीद परिषद ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा तैयार तथा विकसित बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली- वीएसएचओआरएडी (आईआर होमिंग) मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए होने वाले सौदे को भी मंजूरी दे दी है। देश की उत्तरी सीमाओं पर हुए हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए रक्षा तंत्र में प्रभावी वायु रक्षा (एडी) हथियार प्रणालियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की गई है, खासतौर ऐसी हथियार प्रणाली जिसे मानवीय स्तर पर कहीं भी लाया तथा पहुंचाया जा सकता हो और जो देश के ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों एवं समुद्री इलाकों में तेजी से तैनात की जा सकती हो। बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली- वीएसएचओआरएडी की खरीद, एक मजबूत एवं शीघ्र तैनाती योग्य हथियार प्रणाली के रूप में भारतीय वायु रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगी।

इसके अतिरिक्त, रक्षा खरीद परिषद ने भारतीय नौसेना के लिए शिवालिक वर्ग के जहाजों तथा अगली पीढ़ी के मिसाइल वाहक युद्धपोतों (एनजीएमवी) के लिए ब्रह्मोस लॉन्चर और फायर कंट्रोल सिस्टम (एफसीएस) की खरीद के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। इन घातक हथियारों के नौसेना में शामिल किये जाने से देश के युद्धपोतों की समुद्री हमले के संचालन को अंजाम देने, शत्रु के युद्धपोतों को रोकने व नष्ट करने और आवांछित व्यापारिक जहाजों को नियंत्रित करने की क्षमता बढ़ जाएगी।

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