भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
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सीसीआई  ने प्रतिस्पर्धा-रोधी तौर-तरीकों में लिप्त होने के कारण क्राफ्ट पेपर निर्माताओं और उनके चार संघों को अपना अनुचित कारोबारी तरीका तत्‍काल रोकने का आदेश दिया

Posted On: 12 OCT 2022 6:06PM by PIB Delhi

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने क्राफ्ट पेपर निर्माताओं के उन चार क्षेत्रीय संघों, जिनमें उनके 115 सदस्य भी शामिल थे, के खिलाफ आज एक अंतिम आदेश जारी किया जिन्हें प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 3(1) के साथ-साथ धारा 3(3) के प्रावधानों का भी उल्लंघन करने का दोषी पाया गया था जिनमें प्रतिस्पर्धा-रोधी समझौते करने की सख्‍त मनाही है। गत्ते के डिब्बे बनाने वालों के तीन महासंघों/संघों द्वारा दाखिल की गई सूचनाओं के आधार पर ही इन सभी के खिलाफ यह मामला शुरू किया गया था।

यह आरोप लगाया गया था कि क्राफ्ट पेपर निर्माताओं के विभिन्न संघ समय-समय पर होने वाली बैठकों और पत्राचार के माध्यम से अपने सदस्यों (यानी क्राफ्ट पेपर मिलों) को इस बारे में निर्देश देते हैं: खरीदारों यानी गत्ते के डिब्बे बनाने वालों को बेचे जाने वाले कागज की कीमत में वृद्धि करें, गैर वाजिब मूल्यवृद्धि को लागू करने के साथ-साथ किसी क्षेत्र में सामूहिक रूप से पेपर मिलों के संचालन को बंद करने के लिए भारी किल्‍लत वाली स्थिति पैदा करें।

रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों जैसे कि बैठकों एवं ई-मेल संचार के विवरण, विभिन्‍न व्हाट्सएप ग्रुप पर व्हाट्सएप संदेशों के आदान-प्रदान और विभिन्न प्रतिनिधियों के मौखिक बयानों के आधार पर सीसीआई ने एक क्राफ्ट पेपर मिल को छोड़ क्राफ्ट पेपर निर्माताओं के चार क्षेत्रीय संघों सहित 119 पार्टियों को अधिनियम की धारा 3(3)(ए) और धारा 3(3)(बी) के साथ-साथ धारा 3(1) के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी पाया, जब‍कि उस क्राफ्ट पेपर मिल को केवल अधिनियम की धारा 3(3)(ए) के साथ-साथ धारा 3(1) के प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। 119 परस्पर विरोधी पार्टियों में से 31 क्राफ्ट पेपर मिल सीसीआई के समक्ष कम जुर्माने या पेनाल्टी वाली आवेदक थीं। अधिनियम की धारा 46 के तहत किसी गुट या कार्टेल का कोई सदस्य आयोग को कथित कार्टेल के संबंध में पूर्ण, सही और महत्वपूर्ण खुलासे प्रदान करने के बदले में कम जुर्माना लगाने की मांग करते हुए एक आवेदन दाखिल करके सीसीआई का दरवाजा खटखटा सकता है।

इस पूरे मामले के अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों के साथ-साथ इस तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कि अनेक क्राफ्ट पेपर निर्माता एमएसएमई थे और वे कोविड-19 महामारी के प्रतिकूल प्रभावों के कारण आर्थिक और वित्तीय संकट से गुजर रहे थे, सीसीआई ने नियम उल्लंघन करने वाले इन संघों और क्राफ्ट पेपर निर्माताओं पर कोई भी मौद्रिक जुर्माना लगाने से परहेज किया। इसके अलावा, कई क्राफ्ट पेपर निर्माताओं ने भी अपने द्वारा किए गए गलत कार्यों को स्वीकार किया और एक सहयोगी एवं गैर-प्रतिकूल दृष्टिकोण अपनाया। इस प्रकार सीसीआई ने उपर्युक्त तथ्यों को कोई मौद्रिक जुर्माना नहीं लगाने के लिए इसमें कमी करने वाले कारकों के रूप में माना और उल्लंघन करने वाली संस्थाओं यानी क्राफ्ट पेपर निर्माताओं को अपना अनुचित कारोबारी तरीका तत्‍काल रोकने का आदेश दिया।

वर्ष 2017 की केस संख्या 24 में आदेश की एक प्रति सीसीआई की वेबसाइट www.cci.gov.in पर उपलब्ध है।

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एमजी/एएम/आरआरएस                                               

 


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