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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट इंडिया ने प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए इंडिया फोरम का शुभारंभ किया

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट इंडिया ने शहरी जलवायु लचीलापन बनाने के लिए ईको सिस्टम-आधारित सेवाओं और प्रकृति-आधारित समाधानों को मुख्यधारा में लाने के लिए राष्ट्रीय मंच लॉन्च किया

Posted On: 29 JUN 2022 5:45PM by PIB Delhi

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) क्लाइमेट सेंटर फॉर सिटीज (एनआईयूए सी-क्यूब), वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्यूआरआई इंडिया) और उनके सहयोगियों ने आज शहरी प्रकृति-आधारित समाधान (एनबीएस) के लिए भारत का पहला राष्ट्रीय गठबंधन मंच पोलैंड में 11वें विश्व शहरी मंच के दौरान लॉन्च किया।

जलवायु परिवर्तन के चलते उत्पन्न चुनौतियों जैसे गर्मी, शहरी बाढ़, वायु और जल प्रदूषण और तूफान की लहरों को दूर करने के लिए लागत प्रभावी और टिकाऊ तरीकों के रूप में ईको सिस्टम-आधारित सेवाएं और प्रकृति-आधारित समाधान तेजी से उभर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ, एनबीएस विभिन्न सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले कमजोर शहरी समुदायों को सशक्त करने सहित कई ईको सिस्टम से जुड़े लाभ प्रदान करने में भी मदद करता है।

प्रकृति-आधारित समाधानों के लिए इंडिया फोरम का उद्देश्य निम्नलिखित तरीकों से शहरी प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ाने में मदद करने के लिए एनबीएस उद्यमियों, सरकारी संस्थाओं और समान विचारधारा वाले संगठनों का एक समूह बनाना है-

- एक साझा भाषा को परिभाषित करना और मौजूदा एनबीएस हस्तक्षेपों को बढ़ाने सहित स्थानीय स्तर पर कार्रवाई को सूचित करने वाले लाभों को संप्रेषित करना।

- बहु-हितधारक समन्वय के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देना और वितरण तंत्र को मजबूत करना।

- सूचना नीति, योजनाओं और परियोजना हस्तक्षेपों के माध्यम से भारत में शहरी ईको सिस्टम-आधारित सेवाओं और प्रकृति-आधारित समाधानों को मुख्यधारा में लाना।

प्लेटफॉर्म लॉन्च इवेंट में श्री हितेश वैद्य, निदेशक, एनआईयूए ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि जब हम जलवायु कार्रवाई पर काम करते हैं और अपने ग्रीन कवर को बढ़ाते हैं तो हमारी एप्रोच कम लागत आधारित और टिकाऊ होनी चाहिए। और यहां  भारत की लचीलेपन और अनुकूलन रणनीति के हिस्से के रूप में प्रकृति आधारित समाधानों को वरीयता दी जानी चाहिए।

इस कार्यक्रम में जीआईजेड इंडिया, इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव, द नेचर कंजरवेंसी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और वेटलैंड्स इंटरनेशनल जैसे प्रमुख भागीदार संगठनों के प्रतिनिधियों ने फोरम के उद्देश्यों को सहयोगात्मक रूप से प्राप्त करने की दिशा में अपने प्रयासों की प्रतिबद्धता जताई।

फोरम के बारे में बोलते हुए, डब्ल्यूआरआई इंडिया के सीईओ, डॉ. ओ.पी. अग्रवाल ने कहा, "फोरम के मुख्य भागीदारों की ताकत और संसाधनों के संयोजन से पूरे ईको सिस्टम के सामने आने वाली प्रमुख क्षमता चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। यह शहरी एनबीएस को मुख्यधारा में लाने और बढ़ाने में अधिक केंद्रित दृष्टिकोण को सक्षम करेगा, जबकि व्यक्तिगत संगठनात्मक प्रयासों को बढ़ाने में भी मदद करेगा।"

'इंडिया फोरम फॉर नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस' का नेतृत्व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के क्लाइमेट सेंटर फॉर सिटीज (एनआईयूए सी-क्यूब) करता है और सिटीज फॉरेस्ट्स पहल के तहत वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट इंडिया (डब्ल्यूआरआई इंडिजा) द्वारा इसे संचालित किया जाता है। यह कैटरपिलर फाउंडेशन, पर्यावरण, खाद्य और ग्रामीण मामलों के विभाग (डीईएफआरए), यूनाइटेड किंगडम सरकार और नॉर्वे की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु और वन पहल (एनआईसीएफआई) द्वारा समर्थित है।

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