जल शक्ति मंत्रालय
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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और टेरी द्वारा जल के पुन: उपयोग पर उत्‍कृष्‍टता केंद्र का शुभारंभ

अनुसंधान और नवाचार की रूपरेखा बनाने और उसे प्रोत्‍साहित करने के लिए  उत्‍कृष्‍टता केंद्र का गठन

अपशिष्‍ट जल को पुन: उपयोग में लाए जा सकने वाले संसाधन के रूप में देखा जाएगा : महानिदेशक, एनएमसीजी

Posted On: 24 DEC 2021 6:32PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक और द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) के महानिदेशक ने नई दिल्‍ली स्थित टेरी के मुख्‍यालय में एनएमसीजी-टेरी के उत्‍कृष्‍टता केंद्र का शुभारंभ किया। एनएमसीजी और टेरी के बीच सहयोग के जरिए स्‍थापित होने वाला जल के पुन: उपयोग से संबंधित यह उत्‍कृष्‍टता केंद्र देश में अपने किस्‍म का पहला केंद्र है।

यह केंद्र एनएमसीजी, टेरी, उद्योग जगत के साझेदारों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि निकायों के बीच एक चतुष्‍पक्षीय गठबंधन है, जो गुरुग्राम में ग्‍वाल पहाड़ी स्थित टेरी परिसर में बनाया जाएगा। यह अनुसंधान और नवाचार की रूपरेखा बनाने और उसे प्रोत्‍साहित करने के लिए गंगा ज्ञान केंद्र (जीकेसी) के उद्देश्‍यों की पूर्ति करेगा, जिनमें अनुसंधान  के लिए ज्ञान संबंधी खामियों और नए विचारों की आवश्‍यकता की पहचान करना, लक्षित अनुसंधान में सहायता करना तथा सस्‍ती, किफायती और एकीकृत उपचार प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्‍यक नवाचार को प्रोत्‍साहित और विकसित करना शामिल है, जो उपचार की वर्तमान खामियों को दूर करने, क्षमता में वृद्धि करने तथा पुन: उपयोग के लिए सुरक्षित उपचारित जल उपलब्‍ध कराने में समर्थ होंगी। इस प्रकार यह उत्‍कृष्‍टता केंद्र जीकेसी के अंतर्गत परिकल्पित गतिविधियों के साथ मेल खाने की दृष्टि से भी अपने किस्‍म का पहला केंद्र होगा।

        इस शुभारंभ के अवसर पर एनएमसीजी के महानिदेशक श्री राजीव रंजन मिश्रा ने कहा,“उपचार के बाद अपशिष्‍ट जल का हरसंभव उपयोग किया जाएगा। गंगा अथवा किसी नदी या शहर को स्‍वच्‍छ बनाने का उद्देश्‍य उसे लम्‍बे अर्से तक वहनीय बनाना है;इस वहनीयता का आशय इसे अपशिष्‍ट जल के रूप में नहीं, बल्कि पुन: उपयोग किए जा सकने वाले संसाधन के रूप में देखने से है।” श्री मिश्रा ने जल का पुन: उपयोग दक्षता से करने के लिए अनुसंधान  संस्‍थाओं और उद्योगों सहित हितधारकों के साथ साझेदारियों की जरूरत पर बल दिया। उन्‍होंने कहा, “ हमें अपशिष्‍ट जल के उपचार के क्षेत्र में कार्य कर रहे उद्योगों से बातचीत करनी होगी, उपचार संयंत्रों की स्‍थापना करनी होगी, जल का पुन: उपयोग बढ़ाना होगा और सुरक्षित पुन: उपयोग के लिए उपचारित जल उपलब्‍ध कराना होगा।”

टेरी की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि अत्याधुनिक अनुसंधान का लक्ष्य बड़े पैमाने पर समुदाय की मदद करना होना चाहिए। डॉ. धवन ने कहा, “जो अनुसंधान प्रयोगशाला तक सीमित रहता है उसका उपयोग बहुत कम होता है”उन्‍होंने कहा कि टेरी ने हमेशा उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्रोत पर अपशिष्ट जल का उपचार न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि वहनीयता के उपाय के रूप में भी महत्वपूर्ण है।

टेरी के जल संसाधन प्रभाग में विशिष्ट फेलो और वरिष्ठ निदेशक डॉ. एस. के. सरकार ने कहा, “अपशिष्ट जल के उपचार और पुन: उपयोग की पारंपरिक प्रौद्योगिकियों की सीमाएं हैं, इसलिए नई प्रौद्योगिकियां एक आवश्यकता हैं। इस संबंध में, टेरी ने जेडएलडी हासिल करते हुए और जल का पुन: उपयोग बढ़ाते हुए अपशिष्ट जल के उपचार के लिए टेरी उन्नत ऑक्सीकरण प्रौद्योगिकी (टेडॉक्‍स®) विकसित की है।इस उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना से ऐसे प्रौद्योगिकीय कदमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

चर्चा के दौरान श्री जगमोहन गुप्ता ने दूषित जल के क्षेत्र में भी प्रौद्योगिकीय नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। श्री माधव कुमार ने मलयुक्त-गाद प्रबंधन (फीकल स्लज मैनेजमेंट) को शामिल करने और प्लग इन और प्ले टेक्‍नोलॉजीज़ विकसित करने की बात रखी। श्री अर्घ्य पॉल ने गैस उत्पादन और इस पद्धति  में नेट ज़ीरो टार्गेट प्राप्त करने के लिए कीचड़ या स्लज का उपयोग करने का सुझाव दिया। केंद्र के नेतृत्व का दायित्‍व टेडॉक्‍स ® टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर वाटर रीयूज़, जल संसाधन प्रभाग, टेरी में फेलो और क्षेत्रीय संयोजक, डॉ नूपुर बहादुर संभालेंगी।उन्होंने कहा कि “यह केंद्र एक विश्व स्तरीय संस्थान के रूप में उभरेगा,  जो उद्योगों और औद्योगिक समूहों, अपशिष्ट जल उपचार में संलग्‍न अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों में शामिल विश्वविद्यालयों जैसे हितधारकों को लाभान्वित करेगा और साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों और उद्योगों को अपशिष्ट जल उपचार और जल पुन: उपयोग में प्रौद्योगिकीय परामर्श, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान करेगा।”

इस कार्यक्रम में टेरी के जल संसाधन प्रभाग में विशिष्ट फेलो और वरिष्ठ निदेशक डॉ. एस. के. सरकार, एनएमसीजी के सलाहकार श्री जगमोहन गुप्ता, एनएमसीजी के आर्थिक और वित्तीय सलाहकार श्री माधव कुमार आर,को- लीड इंस्टीट्यूशनल, एनएमसीजीश्री अर्घ्य पॉल,श्री संदीप पांडे, और एनएमसीजी तथा टेरी के अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

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