मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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देश के पहले मत्स्य व्यापार इनक्यूबेटर की हरियाणा के गुरुग्राम में शुरूआत, जिसकी लागत 3.23 करोड़ रूपये है

सरकार का ध्यान 2025 तक 22 मिलियन टन मछली का उत्पादन करने और एक लाख करोड़ रुपये का निर्यात करने पर

मंत्री ने कहा कि पीएमएमएसवाई के अंतर्गत बढ़ावा दिए जा रहे मत्स्य पालन क्षेत्र के भविष्य के लिए इनक्यूबेशन यूनिट मील का पत्थर साबित होगी

Posted On: 16 NOV 2021 6:33PM by PIB Delhi

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, श्री पुरुषोत्तम रूपाला ने आज गुरुग्राम, हरियाणा  में 3.23 करोड़ रुपये की लागत से, वास्तविक बाजार-आधारित परिस्थितियों में मत्स्य पालन स्टार्ट-अप का पोषण करने के लिए देश में अपने प्रकार का पहला समर्पित बिजनेस इनक्यूबेटर का उद्घाटन किया, जिसे "लिनाक-एनसीडीसी मत्स्यपालन व्यापार इनक्यूबेशन केंद्र" (लिफिक) के रूप में जाना जाएगा।

यह बताते हुए कि यह केंद्र मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए भविष्य में एक 'मील का पत्थर' के रूप में काम करेगा, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष शुरू की गई प्रमुख केंद्रीय योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत बहुत बढ़ावा दिया जा रहा है, श्री रूपाला ने कहा कि यह इनक्यूबेशन यूनिट प्रशिक्षण, उद्यमशीलता के विचारों को बिजनेस मॉडल में तब्दील करने और इस सेगमेंट में बड़ा बनाने की इच्छा रखने वाले नए और मौजूदा व्यापार उद्यमियों के बीच सीड मनी का वितरण करने वाला हैंड होल्डिंग प्रदान करेगा।

 

शुरुआत में, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), लिफिक के लिए एक कार्यान्वयन एजेंसी, ने चार राज्यों- बिहार, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से 10 इनक्यूबेटरों के पहले बैच की पहचान की है। उनमें से 6 नवनिर्मित मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों से हैं, जिन्हें पीएमएमएसवाई के अंतर्गत वित्तीय अनुदान का समर्थन प्राप्त है।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात को साझा किया कि डेयरी क्षेत्र के विपरीत, सहकारी समितियां अब तक मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। यही कारण है कि एक अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई है जिससे कि मत्स्य पालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी समितियों को बढ़ावा मिल सके और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भरता वाले दृष्टिकोण की प्राप्ति में मदद मिल सके। साथ ही, इस दिशा में, हम बहुत जल्द ही किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की तर्ज पर मछुआरों और पशुधन व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों को क्रेडिट कार्ड प्रदान करने हेतु एक अभियान की शुरूआत करेंगे।

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री, डॉ एल मुरुगन ने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मत्स्य पालन क्षेत्र हमेशा की तरह व्यापार ही न करे बल्कि हितधारकों की आय को बढ़ाने में भी मदद करे। उन्होंने पहली बार उठाए गए विभिन्न अभिनव कदमों को सूचीबद्ध किया, जिसमें प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मत्स्य पालन इनक्यूबेशन केंद्र की स्थापना भी शामिल है।

"मत्स्य पालन भारत में एक उभरता हुआ उद्योग है, जो सालाना 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने 2025 तक 22 मिलियन टन मछली का उत्पादन करने और एक लाख करोड़ रुपये का निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। यह एक बहुत बड़ा आदेश है जिसे अगले चार वर्षों के अंदर प्राप्त करना है, इस बात को देखते हुए कि वर्तमान समय में मछली उत्पादन 130 लाख टन है और 46,000 करोड़ रुपये का निर्यात किया जा रहा है।

“भारत में मत्स्य पालन के लिए इस प्रकार की पहली व्यापार इनक्यूबेशन केंद्र की स्थापना इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमें इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मत्स्य पालन के क्षेत्र में स्टार्टअप, प्रोत्साहन और सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत सारे नवाचारों को बढ़ावा देने पर काम करने की अवश्यकता है, श्री जतिंद्र नाथ स्वेन, केंद्रीय मत्स्य सचिव ने कहा।

कुल मिलाकर मत्स्य पालन के क्षेत्र में लगभग 30,000 सहकारी समितियां हैं।

संदीप नायक, एनसीडीसी के एमडी, ने शुरूआत किए गए नए केंद्र के बारे में कहा, "यह एक विशुद्ध रूप से व्यावसायिक केंद्र है और केवल एक प्रौद्योगिकी या उत्प्रेरक केंद्र नहीं है।" उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से यह अनोखी पहल उद्यमशीलता के विचारों को व्यावसायिक मॉडल में परिवर्तित करने पर केंद्रित होगी और उसके बाद व्यवसाय संचालन की शुरूआत का समर्थन करेगी। इस क्षेत्र में दीर्धकालिक राजस्व सृजन और व्यवसाय संचालन के उद्देश्य के साथ, लिफिक बाजार की बेशुमार गतिशीलता पर बातचीत करते हुए उद्यमों को भी संभालेगा।

सफल इन्क्यूबेटरों को एक महत्वपूर्ण इनपुट, क्रेडिट लिंकेज प्रदान किया जा सकता है, जो एनसीडीसी से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर श्री रूपाला ने लिनाक परिसर में सरदार पटेल सभागार का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में पूर्व केंद्रीय मत्स्य सचिव, डॉ राजीव रंजन, अरोमामैजिक, चेयर, ब्लॉसम कोचर, मुख्य कार्यकारी, एनएफडीबी, डॉ सी सुवर्णा, एनईडीएसी बैंकॉक के निदेशक डॉ केआर सालिन और सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश वैद्य भी थे।

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