पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा है कि सीओपी-26 को विस्तार, मात्रा और गति को ध्यान में रखते हुए जलवायु वित्तपोषण और कम लागत पर हरित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए

अनुकूलन को उचित महत्व देने की तत्काल आवश्यकता है

Posted On: 20 SEP 2021 10:20PM by PIB Delhi

संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एंटोनो गुटेरेस, और यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बोरि जॉनसन, द्वारा 20 सितंबर, 2021 को जलवायु परिवर्तन पर कुछ प्रमुख नेताओं के साथ बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र महासचिव की बैठक में वर्चुअल माध्यम से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, श्री भूपेंद्र यादव ने आगामी सीओपी-26 सहित जलवायु परिवर्तन से जुड़ी किसी भी वार्ता में कोई भी सफल परिणाम पाने के लिए यूएनएफसीसीसी प्रक्रिया के तहत निर्धारित सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

बैठक में, जलवायु संकट से निपटने के लिए वित्तपोषण, शमन और अनुकूलन पर महत्वपूर्ण जलवायु कार्रवाइयों के बारे में चर्चा की गई।

पर्यावरण मंत्री ने 2030 तक 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा समेत जलवायु संबंधी उन ठोस कदमों का भी उल्लेख किया, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत उठा रहा है।

पर्यावरण मंत्री ने उल्लेख किया कि आईपीसीसी के हालिया निष्कर्षों और यूएनएफसीसीसी की नई सिंथेसिस रिपोर्ट के आलोक में, और यह कि विकसित देशों ने 2008-2020 की अवधि में सामूहिक रूप से अपने अनुमानित उत्सर्जन भत्ते से कहीं ज्यादा उत्सर्जन किया है, उन्हें शमन पर अधिक से अधिक कार्रवाई करनी चाहिए और विकासशील देशों को वित्तीय सहायता देनी चाहिए।

श्री यादव ने जोर देकर कहा कि यूएनएफसीसीसी में भी अनुकूलन को उचित महत्व देने और इस पर चर्चा करने की तत्काल आवश्यकता है कि संसाधनों की मात्रा विकासशील देशों की जरूरतों की मात्रा के अनुरूप है या नहीं।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि विकासशील देशों में महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई पेरिस समझौते के अंतर्गत विकसित देशों से मिलने वाली महत्वाकांक्षी सहायता पर निर्भर है। उन्होंने विकसित देशों से 2009 में निर्धारित प्रति वर्ष 100 बिलियन अमरीकी डॉलर की सहायता देने का अपना वादा पूरा करने की अपील की। उन्होंने आगे कहा कि सीओपी-26 को विस्तार, मात्रा और गति को ध्यान में रखते हुए जलवायु वित्तपोषण और कम लागत पर हरित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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