वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं की स्थिति

पीएलआई योजनाओं के परिणामस्वरूप भारत में 5 वर्षों में न्यूनतम उत्पादन 500 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक होने की उम्मीद

मंत्रिमंडल ने अब तक नौ पीएलआई योजनाओं को मंजूरी दी

Posted On: 07 APR 2021 4:39PM by PIB Delhi

एक फरवरी 2020 को पेश केंद्रीय बजट 2021-22 में, वित्त मंत्री ने 13 प्रमुख क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के लिए राष्ट्रीय विनिर्माण चैंपियन बनाने और देश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय की घोषणा की। इसका अर्थ है कि पीएलआई योजनाओं के परिणामस्वरूप भारत में 5 वर्षों में न्यूनतम उत्पादन 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।

पीएलआई योजनाएं आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्‍य को प्राप्त करने के लिए सरकार के कठोर प्रयत्‍न का आधार है। इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और विनिर्माण में वैश्विक चैंपियंस बनाना है। योजनाओं के पीछे की रणनीति आधार वर्ष के दौरान भारत में निर्मित उत्पादों से वृद्धिशील बिक्री पर कंपनियों को प्रोत्साहन देने की पेशकश करना है। इन्हें विशेष रूप से नये और बढ़ रहे तथा रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, सस्ते आयात पर अंकुश लगाने और आयात बिलों को कम करने, घरेलू निर्मित वस्तुओं की लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार और घरेलू क्षमता और निर्यात को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।

पहली तीन पीएलआई योजनाओं को मार्च, 2020 में मंजूरी दी गई थी और इसके बाद नवंबर, 2020 में 10 अन्य नई पीएलआई योजनाएं शुरू की गई थीं। इनमें से, पिछली तीन योजनाओं को अधिसूचित किया गया था, और नीचे दिए गए क्रम में दस नई योजनाओं में से छह को कैबिनेट ने मंजूरी दी थी:

  1. इलेक्ट्रॉनिक / प्रौद्योगिकी उत्पाद – एमईआईटीवाई(3 मार्च 2021 को अधिसूचित)
  2. फार्मास्यूटिकल्स दवाएं – फार्मास्यूटिकल्स विभाग(3 मार्च 2021 को अधिसूचित )
  3. दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद -  फार्मास्यूटिकल्स विभाग(24 फरवरी 2021 को अधिसूचित )
  4. खाद्य उत्पाद- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
  5. बिजली का बड़ा सामा(एसी और एलईडी) – डीपीआईआईटी
  6. उच्च दक्षता वाला सौर पीवी मॉड्यूल- एमएनआरई

जैसाकि नीचे दिया गया है, अन्य चार योजनाएं कैबिनेट की मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में हैं:

  1. मोटर वाहन और उनके कलपुर्जे  - भारी उद्योग विभाग
  2. एडवांस केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी – भारी उद्योग विभाग
  3. कपड़ा उत्पाद: एमएमएफ खंड और तकनीकी वस्त्र – वस्त्रमंत्रालय
  4. स्पेशलिटी इस्‍पात इस्‍पात मंत्रालय

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पहले अधिसूचित 3 पीएलआई योजनाएं, उनके कार्यान्वयन के बारे में अपडेटनीचे दिया गया है:

  • एमईआईटीवाई:  मोबाइल उत्‍पाद और निर्दिष्ट‍ इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे  

इस योजना के तहत 35,541 करोड़ रुपये के 16 आवेदन मंजूर किए गए हैं।

फार्मास्यूटिकल्सविभाग : महत्‍वपूर्ण  प्रमुख शुरूआती सामग्री/ दवा की मध्‍यवर्ती संस्‍थाएं और सक्रिय दवा सामग्री- 5400 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता के साथ 47 आवेदनों- को आखिरकार मंजूरी मिल गई है।

  • फार्मास्यूटिकल्स विभाग : 873.93 करोड़ रुपये के निवेश कीप्रतिबद्धता के साथ चिकित्‍सा उपकरणों के निर्माण के लिए -14 आवेदनों को मंजूरी दी जाती है।

पूर्व में अधिसूचित पीएलआई योजनाओं (3) की स्थिति नीचे दी गई है:

ए. एमईआईटीवाई- मोबाइल उत्‍पादन और निर्दिष्ट‍ इलेक्ट्रॉनिक  

पीएलआई में प्रमुख उपलब्धियां कार्यान्वित की जा रही हैं: यह योजना आधार वर्ष के बाद पांच साल की अवधि के लिए वृद्धिशील बिक्री पर 4% से 6% की प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। योजना को 01.04.2020 को अधिसूचित किया गया था; आवेदन करने की अंतिम तिथि 31.07.2020 थी और यह योजना 01.08.2020 को शुरू हुई। इस योजना को पहले दौर के तहत बहुत ही उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। इस योजना के पहले दौर के अंतर्गत भारतीय रुपये में 36,440 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन परिव्यय के साथ16 आवेदनों को स्वीकृति मिली (ग्लोबल चैंपियंस श्रेणी के तहत 5 कंपनियां, घरेलू चैंपियंस श्रेणी के तहत 5 कंपनियां और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट श्रेणी के तहत 6 कंपनियां)। दिसंबर 2020 में समाप्त तिमाही के लिए त्रैमासिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, योजना संचालन के पहले 5 महीनों में और चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद, आवेदक कंपनियों ने योजना के तहत ~  35,000 करोड़ रुपये का माल तैयार किया और ~ 1,300 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस अवधि के दौरान अतिरिक्त रोजगार सृजन लगभग 22,000 नौकरियां हैं।

पीएलआई योजना के पहले दौर की सफलता के बाद, पीएलआई योजना का दूसरा दौर 11.03.2021 को शुरू किया गया, जो एक जीवंत और मजबूत इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों का निर्माण इकोसिस्‍टम बनाने पर केंद्रित है। आवेदन करने की आखिरी तारीख 31.03.2021 थी। दूसरे दौर के तहत, 5% से 3% तक की प्रोत्साहन राशि का विस्‍तार भारत में निर्मित सामानों की वृद्धिशील बिक्री (आधार वर्ष, 2019-20) तक किया जा सकता है और इसमें चार वर्षोंकी अवधि के लिए पात्र कंपनियों को लक्षित खंड के तहत शामिल किया जाएगा। दूसरे दौर के तहत बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए पीएलआई योजना के प्राप्त आवेदन मूल्यांकन की प्रक्रिया में हैं। 

  1. उत्पादों के लिए प्रमुख उद्योगपतियों की प्रतिक्रिया: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए पीएलआईयोजना के तहत अनुमोदित कंपनियों में सैमसंग, फॉक्सकॉन हॉन हाई, राइजिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन शामिल हैं। इनमें से 3 कंपनियां, जैसे फॉक्सकॉन हॉ हाई, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन, एप्‍पल आईफोनके लिए अनुबंध निर्माता हैं। एप्‍पल (37%) और सैमसंग (22%) के पास मोबाइल फोन की वैश्विक बिक्री राजस्व का लगभग 60% हिस्सा है और इस योजना से देश में उनके विनिर्माण आधार में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत लावा, भगवती (माइक्रोमैक्स), पडगेट इलेक्ट्रॉनिक्स, यूटीएल नियोलिंक और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स सहित भारतीय कंपनियों को मंजूरी दी गई। इन कंपनियों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने विनिर्माण कार्यों का महत्वपूर्ण तरीके से विस्ता करें और मोबाइल फोन उत्पादन में राष्ट्रीय चैंपियन कंपनियों के रूप में विकसित हों।
  2. पीएलआई द्वारा किस प्रकार का मूल्यवर्धन लाया जाएगा-नए प्रकार के उद्योगों, एमएसएमई / धीनस्‍थ को प्रोत्साहनआदि: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए पीएलआईयोजना भी एक जीवंत और मजबूत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण करने पर विशेष ध्‍यान देती है। यह कदम भारत में आईटी हार्डवेयर, एलईडी उत्पाद, मोटर वाहन, चिकित्सा उपकरण, सौर सेल, ऊर्जा भंडारण आदि जैसे कई क्षेत्रों के लिए उत्पाद निर्माण को और मजबूत करेगा, जिसके लिए अन्य पीएलआई योजनाएं लागू होने जा रही हैं।
  3. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम: अगले पांच वर्षों में, इस योजना से कुल 10.5 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है। उत्पादन का 60% से अधिक निर्यात होने की उम्मीद है। इस योजना से 11,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की उम्मीद है। मूल्य संवर्धन वर्तमान के 20-25% से बढ़कर 2025 तक 35-40% होने की उम्मीद है। यह योजना अगले 5 वर्षों में प्रत्यक्ष रोजगार के लगभग 2 लाख अवसर पैदा करेगी और साथ ही प्रत्यक्ष रोजगार से लगभग 3 गुना अतिरिक्त अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करेगी।

बी.फार्मास्युटिकल्स विभाग –महत्‍वपूर्ण प्रमुख शुरूआती सामग्री (केएसएम) / दवा की मध्‍यवर्ती संस्‍थाएं और सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई)

पीएलआई में प्रमुख उपलब्धियां कार्यान्वित की जा रही हैं: आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और बड़ी तादाद में इन महत्वपूर्ण दवाओं में आयात निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से - देश में प्रमुख शुरूआती सामग्री / दवा की मध्‍यवर्ती संस्‍थाओं और सक्रिय दवा सामग्री, फार्मास्युटिकल्स विभाग ने उत्पादन से जुड़ी एक प्रोत्साहन ( पीएलआई) योजना शुरू की ताकि 2020-21 से 2029-30 की अवधि के लिए 6,940 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ कुल 41 उत्‍पादों के चार अलग-अलग लक्ष्य खंडों में न्यूनतम घरेलू मूल्‍य वर्धन के साथ (दो फर्मेंटेशन आधारित- कम से कम 90% और दो रासायनिक संश्लेषण आधारित - कम से कम 70%) ग्रीनफील्ड प्लांट्स की स्‍थापना कर घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।

  1. उद्योग जगत की प्रतिक्रिया:पीएलआई योजना में बड़ी तादाद में दवाओं के लिए, प्रमुख सफल उद्योगों / प्रतिभागियों में मैसर्स अरबिंदो फार्मा ग्रुप, मैसर्स हेटेरो ग्रुप, मेसर्स कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड, मैसर्स किनवान प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स नैचुरल बायोजेएक्स प्राइवेट लिमिटेडइत्यादि शामिल हैं। इनमें उन्नत बाजारों में मजबूत उपस्थिति साथ ग्‍लोबल प्‍लेयर शामिल हैं। 
  2. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम: देश भर से बड़ी तादाद में दवाओं के लिए पीएलआई योजनाओं के लिए 4 लक्ष्य खंडों में फैले 36 उत्पादों के लिए कुल 215 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से, 47 आवेदनों को सरकार द्वारा मंजूरी दे दी गई है, जिसमें 5,366.35 रुपये का कुल निवेश किया गया है। संवितरण के लिए अधिकतम प्रोत्साहन प्रस्ताव: 6,000 करोड़ रुपये और अनुमानित रोजगार सृजन लगभग 12140 है

 

सी. फार्मास्यूटिकल्स विभाग - चिकित्सा उपकरणों का विनिर्माण

  1. पीएलआई में प्रमुख उपलब्धियां कार्यान्वित की जा रही हैं: घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए, फार्मास्युटिकल विभाग ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की ताकि चिकित्सा उपकरणों के घरेलू निर्माताओं के लिए 2020-21 से 2027-28 की अवधि में कुल 3,420 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ बराबरी सुनिश्चित करने के लिए चिकित्‍सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।
  2. उद्योग जगत की प्रतिक्रिया: चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना में, प्रमुख सफल प्‍लेयर्स / प्रतिभागियों में मैसर्स सीमेंस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स विप्रो जीई हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स बीपीएल मेडिकल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स निप्रो इंडिया कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स इंटीग्रिस हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स पॉली मेडिक्योर लिमिटेड, आदि शामिल हैं।
  3. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम:चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजनाओं के लिए 4 लक्ष्य खंडों में फैले कुल 28 आवेदन देश भर से प्राप्‍त हुए हैं। इनमें से, 14 आवेदन सरकार द्वारा अनुमोदित किए गए हैं, जिनकी निवेश की कुल प्रतिबद्धता   873.93 करोड़ रुपये है; संवितरण के लिए अधिकतम प्रोत्साहन प्रस्ताव: 1,694 करोड़ और अपेक्षित रोजगार सृजन लगभग 4212 है

II. हाल ही में मंजूर पीएलआई योजनाओं की स्थिति नीचे दी गई है :

ए. डीपीआईआईटी - i. बिजली का बड़ा सामान (एसी और एलईडी)  

    1. पीएलआईमें प्रमुख उपलब्धियां कार्यान्वित की जा रही हैं:बिजली के बड़े सामान के लिए पीएलआई योजना एयर कंडीशनर और एलईडीलाइट्स के निर्माण में लगी कंपनियों को पांच साल की अवधि के लिए भारत में निर्मित सामानों की वृद्धिशील बिक्री पर 4% से 6% की प्रोत्साहन राशि देगी। पीएलआई योजना भारत में सम्‍पूर्ण इकोसिस्‍टम बनाने और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का एक अभिन्न अंग बनाने के लिए तैयार की गई है। यह योजना क्षेत्रीय अक्षमता को हटाकर, उत्‍पादन बढ़ने पर लागत में बचत कर अर्थव्यवस्थाओं को बनाने और क्षमता सुनिश्चित करने के लिए भारत में विनिर्माण को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका ि‍नभाएगी। इस योजना से वैश्विक निवेश आकर्षित करने, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने और निर्यात में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। यह नवाचार और अनुसंधान और विकास और प्रौद्योगिकी के उन्नयन में निवेश को बढ़ावा देगा। इस योजना से एसी और एलईडी उद्योगों के लिए मौजूदा दरों की तुलना में विकास दर प्राप्त करने, भारत में पूर्ण इको-सिस्टम विकसित करने और भारत में ग्‍लोबल चैंपियन निर्माण करने कई एमएसएमई सहित कई वैश्विक और घरेलू कंपनियों को लाभ होने की संभावना है। 
    2. पीएलआई के तहत उत्पादों के लिए प्रमुख उद्योगों की प्रतिक्रिया: यह योजना उपयुक्‍त हितधारकों जैसे एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट्स निर्माता और संबंधित उद्योग संघों के निर्माताओं के परामर्श से तैयार की गई है और वे इस योजना की शुरुआत के लिए उत्सुक हैं।
    3. वैश्विक पहुंच का बीड़ा कैसे उठाएं: इन्वेस्ट इंडिया के साथ समन्वय में, विदेशों में योजना को बढ़ावा देने का कार्य विशेष रूप से डीपीआईआईटीके परियोजना विकास प्रकोष्‍ठ (पीडीसी) द्वारा उपयुक्‍त क्षेत्रों में पहचानी गई बड़ी वैश्विक कंपनियों पर लक्षित किया गया है। इसमें एसी और एलईडी लाइट्स उद्योग में वैश्विक स्तर पर पहचाने जाने वाले वैश्विक देशों में भारत के दूतावासों के प्रसारकर्ता भी शामिल होंगे। इसके बाद योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सीआईआई, फिक्‍की, एसोचैम, आरएएमए, सीईएएमएऔर ईएलसीओएमएद्वारा कार्यशालाएं / वेबिनार आयोजित किए जाएंगे।

ivपीएलआईद्वारा लाया गया मूल्यवर्धन: उद्योग के अनुसार, एसीउद्योग के लिए मूल्यवर्धन 20-25% के वर्तमान स्तर से बढ़कर 75% और एलईडी लाइट्स उद्योग के लिए 40% से 70-75% तक बढ़ जाएगा; इसके परिणामस्वरूप उन कलपुर्जों या सब-असेंबली का निर्माण शुरू हो जाएगा जो वर्तमान में भारत में नहीं बनाए जा रहे हैं।

योजना का परिणाम: यह अनुमान लगाया गया है कि पांच वर्षों की अवधि में, पीएलआई योजना से 7,920 करोड़ रुपये का वृद्धिशील निवेश‍; 1,68,000 करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन; 64,400 करोड़ रुपये का निर्यात, 49,300 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजस्व होगा; इससे अतिरिक्त चार लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

 

बी. एमएआरई– उच्‍च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल 

 

  1. विभाग / मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित पीएलआईमें प्रमुख उपलब्धियाँ: वर्तमान में, देश में सौर क्षमता वृद्धि आयातित सौर पीवी कोशिकाओं और मॉड्यूल पर काफी हद तक निर्भर करती है क्योंकि घरेलू विनिर्माण उद्योग में सौर पीवी कोशिकाओं और मॉड्यूलों की परिचालन क्षमता सीमित है। इस पीएलआईयोजना के उच्च दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल की प्रमुख उपलब्धि से बिजली जैसे रणनीतिक क्षेत्र में आयात निर्भरता की संभावना में कमी आने की उम्‍मीद है।

 

  1. पीएलआई के तहत उत्पादों के लिए प्रमुख उद्योगों की प्रतिक्रिया: इस योजना की तैयारी के चरण में उद्योग के जिन हितधारकों से परामर्श किया गया उन्होंने जबरदस्त प्रतिक्रिया दिखाई है, और वह बड़ी, एकीकृत विनिर्माण क्षमता के लिए तैयार हैं, जिससे लाभ की अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करने, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    
  • iii   इस योजना की वैश्विक पहुंच बनाने के लिए, एमएनआरईफिर से वैश्विक उद्योग जगत के साथ बातचीत करेगी, विभिन्न सौर निर्माता संघों को लिखेगी, साथ ही विदेशों में विभिन्न भारतीय दूतावासों से अनुरोध करेगा कि वे अपने संबंधित देशों में संभावित निवेशकों को सूचित करें। 
  • iv. पीएलआई द्वारा किस तरह का मूल्यवर्धन लाया जाएगा - नए प्रकार के उद्योग, एमएसएमई /अधीनस्‍थ को प्रोत्साहन आदि :उत्‍पादकोंको उच्च क्षमता के सौर पीवी मॉड्यूल और घरेलू बाजार से अपनी सामग्री लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इस प्रकार, पीएलआई योजना न केवल पॉलीसिलिकॉन और वेफर्स जैसे सौर पीवी विनिर्माण के ऊपरी चरणों में घरेलू विनिर्माण क्षमताओं की स्थापना में मदद करेगी, जो वर्तमान में देश में अनुपस्थित हैं, बल्कि पूरे सौर पीवी ि‍नर्माण इकोसिस्‍टम को बढ़ाएगी, जिसमें अधीनस्‍थ इकाइयों और एमएसएमई को बढ़ावा देना भी शामिल है।

 

  1. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम: योजना से अपेक्षित परिणाम / लाभ हैं - एकीकृत सौर पीवी विनिर्माण संयंत्रों की अतिरिक्त 10,000 मेगावाट क्षमता ;सौर पीवी विनिर्माण परियोजनाओं की स्थापना में लगभग 17,200 करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश; लगभग 30,000 का प्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 1,20,000 व्यक्तियों का अप्रत्यक्ष रोजगार; हर साल लगभग 17,500 करोड़ का आयात प्रतिस्थापन; 'बैलेंस ऑफ मटीरियल्स' जैसे सोलर ग्लास, ईवा, बैकशीट, जंक्शन बॉक्स, रिबन आदि के लिए 5 वर्षों में 17,500 करोड़ की मांग से नए प्रकार के उद्योगों का विकास होगा, जहां एमएसएमई प्रमुख भूमिका निभाएंगे; सौर पीवी मॉड्यूल में उच्च दक्षता प्राप्त करने के लिए अनुसंधान और विकास को गति प्रदान करते है

 

 एमओएफपीआई-खाद्य उत्‍पाद  

    1. विभाग / मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही पीएलआई में प्रमुख उपलब्धियाँ: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को 31.3.2021 को 2021-22 से 2026-27 के दौरान कार्यान्वयन के लिए 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था। यह योजना अनिवार्य रूप से भारतीय कंपनियों और भारत में निर्मित खाद्य उत्पादों की न्यूनतम बिक्री के साथ भारत में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सहायक कंपनियों के लिए है। यह योजना चार खाद्य क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करेगी। बाजरा आधारित खाद्य पदार्थ, प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद, मोज़ेरेला चीज़ सहित पकी हुई / रेडी टू ईट (आरटीसी / आरटीई) योजना का उद्देश्य वैश्विक खाद्य विनिर्माण चैंपियन के निर्माण का समर्थन करना है; अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों के भारतीय ब्रांडों का समर्थन करना; खेती के बाहर नौकरियों के लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ाना और किसानों को कृषि उपज और उच्च आय के पारिश्रमिक मूल्य सुनिश्चित करना।

iiपीएलआईके तहत उत्पादों के लिए प्रमुख उद्योगों की प्रतिक्रिया: इस योजनाकानेस्ले, आईटीसी, ब्रिटानिया, केवेंटर एग्रो, और अमूल सहित उद्योग द्वारा स्‍वागत किया गया है।

    • iii. वैश्विक पहुंच का बीड़ा कैसे उठाएं: विदेशों में भारतीय मिशनों के माध्यम से कंपनियों तक पहुंचा जाएगा। पीएलआईएस के तहत अवसरों का लाभ उठाने के लिए संभावित निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उद्योग संघ वेबिनार के आयोजन में सहयोग करेंगे
  1. पीएलआई द्वारा किस प्रकार का मूल्यवर्धन लाया जाएगा - नए प्रकार के उद्योग, एमएसएमई / धीनस्‍थ को प्रोत्साहन आदि : जैसाकि प्रोत्साहन बिक्री पर आधारित होता है, न्यूनतम निवेश के अधीन होता है, उच्च मूल्य संवर्धन योजना में शामिल होता है। इसके अलावा, उत्पाद विशिष्ट प्रोत्साहन मूल्य वर्धित समुद्री उत्पादों के लिए बढ़ाया जाता है जैसे डिब्बाबंद, बैटर्ड और ब्रेडेड, अचार, सॉसेजेस आदियोजना के तहत अनुबंध उत्‍पादकों की भूमिका को मान्यता दी गई है और यह योजना निवेश के मानदंडप्रदान करती है जिन्हें खाद्य प्रमुख और उनके अनुबंध निर्माताओं द्वारा संयुक्त रूप से पूरा किया जाता है। इन उत्पादों को सभी छह वर्षों की योजना अवधि के लिए 10% प्रोत्साहन दिया गया है। चार खंडों में लघु और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को भी अभिनव और जैविक उत्पादों के निर्माण के लिए सहायता दी जाएगी। इस खंड के लिए 250 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए योजना की परिकल्पना की गई है 

 

    1. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम: योजना से अपेक्षित परिणाम / लाभ हैं - खाद्य प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार: 33,494 करोड़ रुपये; निर्यात: 27,816 करोड़ रुपये; रोजगार सृजन: 2.5 लाख व्यक्ति

 

डी. दूरसंचार विभाग- दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्‍पाद (अधिसूचित) 

  1. दूरसंचार विभागद्वारा कार्यान्वित की जा रही पीएलआईमें प्रमुख उपलब्धियां: दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए पांच वर्षों में 24 फरवरी 2021 को दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों के लिए पीएलआई योजना को 12,195 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ अधिसूचित किया। दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों में पीएलआईयोजना भारत को कोर ट्रांसमिशन उपकरण, 4जी/ 5जीनैक्‍स्‍टजनरेशन रेडियो एक्सेस नेटवर्क और वायरलेस उपकरण, एक्सेस और ग्राहक परिसर उपकरण (सीपीई), इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (आईओटी) एक्सेस डिवाइसेस सहित दूरसंचार उपकरणों के निर्माण, अन्य वायरलेस उपकरण और उद्यम उपकरण जैसे स्विच, राउटर आदि का एक वैश्विक केंद्र बनाएगी।

निवेशक को वृद्धिशील बिक्री के लिए 20 गुना तक प्रतिबद्ध निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उन्हें वैश्विक पैमानों पर पहुंचने और उनकी अप्रयुक्त क्षमता का उपयोग करने और उत्पादन में तेजी लाने में मदद मिलेगी। इस योजना का प्रमुख तत्‍व 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के दूरसंचार उपकरणों के भारी आयात की कमी को पूरा करना और इसे घरेलू बाजारों और निर्यात दोनों के लिए "मेड इन इंडिया" उत्पादों के साथ बढ़ाना है। इसका लक्ष्य भारत को दूरसंचार उत्पादों के लिए एक पसंदीदा वैश्विक विनिर्माण गंतव्य बनाना है और भारत को दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बनाना है। 

 

  1. उत्पादों के लिए प्रमुख उद्योगों की प्रतिक्रिया: दुनिया के अधिकांश प्रमुख दूरसंचार उद्योग भारत में विनिर्माण आधार का विस्तार या स्थापना करने के इच्छुक हैं और उनका योजना में प्रस्तावित प्रोत्साहन के साथ सकारात्मक रूख हैएरिक्‍सन स्‍वीडन और नोकियाफिनलैंड जैसी कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भारत में अपने मौजूदा परिचालन का विस्तार करने की इच्छुक हैं। वैश्विक दूरसंचार कंपनियां जैसे सैमसंग दक्षिण कोरिया, सिस्को यूएसए, सिएना यूएसए, और इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) कंपनियां जैसे जैबिल यूएसए, फॉक्सकॉन ताइवान, सनमीना यूएसए और फ्लेक्स यूएसए ने घरेलू और साथ ही दूरसंचार और नेटवर्क उत्पादों के लिए भारत में उत्‍पादन के साथ-साथ निर्यात बाजार के रूप में रुचि दिखाई है। भारतीय निर्माताओं जैसे वीवीडीएन टेक्नोलॉजीज गुरूग्राम, डिक्‍सन नोएडा, एचएफसीएल, कोरल टेलीकॉम एंड स्‍टरलाइटजैसे ि‍नर्माताओं ने भी योजनामें रुचि दिखाई है। 
  2. वैश्विक पहुंच का बीड़ा कैसे उठाएं: इस योजना के लिए इन्वेस्ट इंडिया टीम के हयोग से एक व्यापक पहुंच कार्यक्रम की योजना बनाई जा रही है, जिसमें एक है - संभावित निवेशकों के साथ साझेदारी करना; उद्योग संघों द्वारा आयोजित वैश्विक पहुंच कार्यक्रमों में भागीदारी; सलाहकारों और दूतावास के अधिकारियों, कानून फर्मों / बैंकों / अनुसंधान संगठनों / उद्योग संघों के साथ वेबिनार; योजना के लिए विभिन्न भाषाओं में कोलेटरल / फ्लायर्स का निर्माण; इन्वेस्ट इंडिया वेबसाइट पर इस योजना के लिए माइक्रोसाइट;संपूर्ण योजना इंटरफ़ेस के लिए अनुप्रयोगों के साथ-साथ चयनित विक्रेताओं के लिए अलग-अलग इंटरैक्टिव वेबसाइट; योजना का कई भाषाओं में अनुवाद।  
  3. पीएलआई द्वारा किस प्रकार का मूल्यवर्धन लाया जाएगा-नए प्रकार के उद्योग, एमएसएमई/ अधीनस्‍थ आदि को प्रोत्साहन: यह योजना निवेश से जुड़ी है जो विक्रेताओं को कम्‍पनी में अपनी भूमिका बढ़ाने के लिए निवेश करने में सक्षम बनाएगी, जिससे देश में मूल्य वर्धबढ़ेगा। वैश्विक विक्रेता अपने कलपुर्जों के आपूर्तिकर्ताओं को लाएँगे और अधीस्‍थ विकसित करेंगे। इस योजना में एमएसएमई के लिए एक विशेष श्रेणी है जिसमें इस तथ्‍य को पहचाना गया है एमएसएमई दूरसंचार विनिर्माण इको सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एमएसएमईके लिए, प्रारंभिक 3 वर्षों में एक प्रतिशत (1%) उच्च प्रोत्साहन प्रस्तावित है। एमएसएमईके ​​लिए न्यूनतम निवेश सीमा 10 करोड़ रुपये रखी गई है।  
  4. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम - अनुमान लगाया गया है कि योजना निधियों के पूर्ण उपयोग से लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये का वृद्धिशील उत्पादन और 5 वर्ष में 2लाख से अधिक का निर्यात होने की संभावना है। यह भी उम्मीद है कि योजना लगभग 3000करोड़ रुपये का निवेश लाएगी और विशाल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगी।

 

    1. एमईआईटीवाई-आईटी हार्डवेयर (अधिसूचित)

 

  1. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही पीएलआई में प्रमुख उपलब्धियां: आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना 03.03.2021 को अधिसूचित की गई। आवेदन करने की अंतिम तिथि 30.04.2021 है। यह योजना भारत में निर्मित सामानों की कुल वृद्धिशील बिक्री (आधार वर्ष) पर 4% से 2% / 1% की प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी और चार साल की अवधि के लिए इसे लक्ष्य खंड के तहत पात्र कंपनियों में(लैपटॉप, टैबलेट्स,एक पीसी, सर्वर्स) शामिल किया जाएगा। इस योजना से प्रमुख वैश्विक निर्माताओंके साथ-साथ आईटी हार्डवेयर उत्पादों के घरेलू निर्माताओं, अर्थात् लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पीसी और सर्वरों को भी लाभ मिलेगा। विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण खंड है क्योंकि वर्तमान में इन वस्तुओं के लिए भारी आयात निर्भरता है।
  1. उद्योगों की प्रतिक्रिया :

 

  • iii. वैश्विक पहुंच का बीड़ा वैश्विक पहुंच योजना में मुख्य रूप से दो दृष्टिकोण शामिल हैं। I) ग्लोबल चैंपियन कंपनियों की पहचान और केंद्रित दृष्टिकोण - वैश्विक चैंपियन कंपनियों के निर्णय कर्ताओं की पहचान और पहुंच विभिन्न चैनलों, जैसे विदेशों में भारतीय दूतावासों, भारत में विदेशी दूतावासों, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग संघों, बैंक नेटवर्क, कंसल्टेंट्स, आपूर्ति के माध्यम से होती है। एमईआईटीवाई के मंत्री, सचिव और संयुक्त सचिव को शामिल कर विभिन्न स्तरों पर वास्‍तविक या वर्चुअल बैठकें होती हैं। संबंधित सामग्री, अर्थात, योजना अधिसूचना और दिशानिर्देशों का विदेशी भाषाओं (कोरियाई, फ्रेंच, जर्मन, मेंडरिन, जापानी, हिब्रू, आदि) में अनुवाद किया जाता है) और इसे व्यापक प्रसार के लिए प्रासंगिक हितधारकों के साथ साझा किया जाता हैII) संबंधित हितधारकों के माध्यम से योजनाओं का प्रचार अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुँचाने के लिए - विभिन्न हितधारकों के जरिये विदेशों में भारतीय दूतावासों, भारत में विदेशी दूतावासों, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग संघों, ओईएम और उनके आपूर्ति सहयोगी भागीदारों, बैंकों और सलाहकार नेटवर्क, आदि के माध्यम से विभिन्न वेबिनार, राउंड टेबल और पैनल चर्चा आयोजित की जाती हैं। जहां योजनाओं का विवरण प्रस्तुतिकरण और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से समझाया जाता है। यह दृष्टिकोण नई कंपनियों तक पहुंचने में मदद करता है।
  • iv. पीएलआई द्वारा किस प्रकार का मूल्यवर्धन लाया जाएगा-नए प्रकार के उद्योग, एमएसएमई/ अधीनस्‍थ आदि को प्रोत्साहन:- इस योजना से प्रमुख वैश्विक और आईटी हार्डवेयर उत्पादों के घरेलू निर्माताओं, जैसे लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पीसी और सर्वर को लाभ मिलने की संभावना है। विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण खंड है क्योंकि वर्तमान में इन वस्तुओं के लिए भारी आयात निर्भरता है।
  1. निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में वृद्धि के संदर्भ में अपेक्षित परिणाम: अगले 4 वर्षों में, आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआईयोजना से 3,26,000 करोड़ रुपये का कुल वृद्धिशील उत्पादन होने की उम्मीद है, जिसमें से 75% से अधिक निर्यात होने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह उम्मीद की जाती है कि योजना द्वारा प्रदान की गई गति से आईटी हार्डवेयर के लिए घरेलू मूल्य वृद्धिवर्तमान 5प्रतिशत – 10प्रतिशत से2025 तक 20प्रतिशत- 25 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। यह योजना अगले 4 वर्षों में लगभग 1.8 लाख रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

 

एफ. फार्मास्‍यूटिकल्‍स मंत्रालय- फार्मास्‍यूटिकल्‍स दवाएं (अधिसूचित)  

 

  1. पीएलआई में प्रमुख उपलब्धियां विभाग / मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही हैं: यह योजना कार्यान्वयन के प्रारंभिक चरण में है। इसे 24.02.2021 को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था। योजना संबंधी दिशानिर्देश तैयार कर लिए गए हैं और आवेदन आमंत्रित करने के लिए जारी करने की प्रक्रिया में हैं। दिशानिर्देश इस सप्ताह जारी किए जाने का प्रस्ताव है।
  2. पीएलआई के तहत उत्पादों के लिए प्रमुख उद्योगों की प्रतिक्रिया: योजना के तहत प्राप्त होने वाले आवेदनों के संदर्भ में दिशानिर्देश और प्रतिक्रिया जारी करने के बाद प्रतिक्रिया का पता लगाया जा सकता है। 
  3. वैश्विक पहुंच  का बीड़ा कैसे उठाएं: फार्मा संगठनों के साथ परामर्श किया गया है जो भारत में विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों का प्रतिनिधित्व करते है। इस योजना में कुछ विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भाग लेने की उम्मीद है। 
  4. पीएलआई द्वारा किस प्रकार का मूल्यवर्धन लाया जाएगा-नए प्रकार के उद्योग, एमएसएमई/ अधीनस्‍थ आदि को प्रोत्साहन:पीएलआई योजना उत्पाद विविधीकरण की परिकल्पना करती है और उच्च मूल्य वर्धित उत्पादों के लिए जाने वाले प्रतिभागियों के प्रयासों के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा जो इस योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। यह देश के कई मध्यवर्ती उत्पादों में आत्मनिर्भर बनाने की भी परिकल्पना करता है। यह वैश्विक चैंपियन बनने की संभावनाओं के साथ कंपनियों का सहयोग करके देश में विनिर्माण क्षमताओं