विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
सीएसआईआर ने विश्व टीबी दिवस मनाया
‘कोविड-19 महामारी से टीबी के लिए सबक’ पर पैनल चर्चा का आयोजन
प्रविष्टि तिथि:
25 MAR 2021 9:39PM by PIB Delhi
24 मार्च 2021 को विश्व टीबी दिवस के अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिक, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित विश्व टीबी दिवस समारोह और ‘कोविड-19 महामारी से टीबी के लिए सबक” पर पैनल चर्चा में मुख्य व्याख्यान दिया। हर साल विश्व टीबी दिवस 1882 के उस दिन की याद में मनाया जाता है जब डॉ. राबर्ट कोच ने टीबी फैलाने वाले जीवाणु की खोज की थी।
अपने संबोधन में डॉ. हर्षवर्धन ने रेखांकित किया कि सरकार ने दुनिया के ‘टीबी का खात्मा’ लक्ष्य से 5 साल पहले, 2025 तक टीबी को खत्म करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होने कहा कि मौजूदा कोविड-19 महामारी का सामना करते हुए देश के द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम अनुकरणीय है, जिससे करीब एक साल के वक्त में वैक्सीन का प्रबंध किया गया है, साथ ही यह दूसरे देशों के साथ बांटा भी जा रहा है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भारत में टीबी खत्म करने के लक्ष्य को पाने की क्षमता और योग्यता है जो कि कोविड-19 महामारी और पोलियो उन्मूलन के मामलों में भी प्रदर्शित हुई है। उन्होने आगे ये भी कहा कि तपेदिक की विपत्ति को सभी साझेदारों के मजबूत संकल्प, सहयोग, उत्साह, असाधारण प्रतिबद्धता और योगदान से खत्म किया जा सकता है।
“टीबी के लिए कोविड-19 से सबक” पर पैनल चर्चा में बोलते हुए डीजी सीएसआईआर डॉ. शेखर सी मंडे जो कि संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ हैं, ने कहा कि “जबकि माइकोबैक्टीरियम तपेदिक एक जटिल बीमारी है, कोविड-19 से मिले सबक टीबी को खत्म करने की रणनीति बनाने के लिए मार्गदर्शन कर सकते हैं।“
अग्रणी टीबी विशेषज्ञ और गंगाजेन बायोटेक्नोलजीस के अध्यक्ष डॉ. टी बालगणेश ने अपने संबोधन में संक्रमण पर तेज नियंत्रण और निगरानी के लिए टीबी के नॉन इनवेसिव डायग्नोस्टिक की जरूरत पर जोर दिया ।
पैनल चर्चा में हिस्सा लेने वाले देश के अन्य टीबी विशेषज्ञ में डॉ. अनुराग अग्रवाल, निदेशक, सीएसआईआर-आईजीआईबी, डॉ. राजेश गोखले, स्टाफ साइंटिस्ट वीआईआई, एनआईआई, प्रोफेसर जया त्यागी, बायोटेक्नोल़ॉजी विभाग, एम्स, नई दिल्ली, डॉ. चंद्र शेखर एस, निदेशक, सीएसआईआर-आईआईसीटी, डॉ. अनिल कौल, उपाध्यक्ष, रिसर्च जेएंडजे, डॉ. गीता वाणी रायसम, सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट और प्रमुख एससीडीडी, सीएसआईआर और डॉ. अंशु भारद्वाज, सीनियर साइंटिस्ट, सीएसआईआर इमटेक ने बदलाव करने वाले विचारों और मौजूदा रणनीति में मौजूद अहम कमियों की पहचान करने और कोविड-19 से मिले सबक की मदद से इसे किस तरह दूर किया जाए, पर चर्चा की।
विशेषज्ञों के पूरे पैनल ने जोर देकर कहा कि तपेदिक के मामलों में संक्रमण की जटिलता के बावजूद, जहां माइकोबैक्टीरियम हजारों सालों में इंसानों के साथ-साथ विकसित हुआ है, इसे उसी तरह नियंत्रित किया जा सकता है जिस तरह वैज्ञानिक औऱ स्वास्थ्य जगत के सामूहिक ज्ञान और प्रयासों से कोविड 19 को नियंत्रित किया जा रहा है। सभी ने सिफारिश कि है कि टीबी से निपटने के लिए हमारे मौजूदा दृष्टिकोण को चुनौती देने के लिए खुली सोच अनिवार्य है, क्योंकि मौजूदा परिदृश्य सिर्फ स्थिर बढ़त आधारित सफलता दे सकता है और कम अवधि की चिकित्सा, कारगर टीकाकरण और तेज प्वाइंट ऑफ केयर डाइग्नोस्टिक के लिए रणनीति का विकास करने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने ये भी सिफारिश दी कि नई तकनीक, बदलाव करने वाले विचार और आंकड़ों पर आधारित समग्र दृष्टिकोण टीबी के लिए निर्भीकता के साथ इस्तेमाल हों, जैसा कि कोविड-19 महामारी में देखा गया। तपेदिक और अन्य संक्रमण जो कि दुनिया भर में निरंतर बढ़ती दर से एंटीमाइक्रोबिअल प्रतिरोध हासिल कर रहे हैं, से निपटने में सामूहिक प्रयास के लिए लोगों और सभी हितधारकों की भागेदारी और समन्वय आवश्यक है।



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एमजी/एएम/एसएस/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 1707721)
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