इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन ने अभियंता दिवस मनाया


विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एनालिटिक्स के क्षेत्र में कार्यरत विश्वेश्वरैया पीएचडी फैलो के साथ ऑनलाइन वार्तालाप का आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 15 SEP 2020 7:24PM by PIB Delhi

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी के लिए विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एनालिटिक्स के क्षेत्र में कार्यरत विश्वेश्वरैया पीएचडी शोधकर्ताओं एवं डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं टीम के बीच 15 सितंबर 2020 को एक ऑनलाइन वार्तालाप का आयोजन किया गया।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विश्वेश्वरैया पीएचडी की योजना ईएसडीएम और आईटी/आईटीईएस क्षेत्रों में पीएचडी की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से 2014 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंजूरी के साथ शुरू की गई थी। आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों सहित 97 संस्थानों में 908 पूर्णकालिक, 304 अंशकालिक पीएचडी उम्मीदवार और 158 वाईएफआरएफ को नामांकित किया गया है। 170 पीएचडी उम्मीदवारों ने पीएचडी पोर्टल के माध्यम से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।

एआई के क्षेत्र में कार्यरत 35 पीएचडी शोधकर्ताओं को उनके शोध कार्य को प्रस्तुत करने के लिए चुना गया था। उक्त वार्तालाप के दौरान,11 पीएचडी शोधकर्ताओं ने अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। आईआईटी दिल्ली से मयंक शर्मा और प्रांशु जैन, जेएनयू दिल्ली से श्री हर्ष भसीन, एनआईटी अरुणाचल प्रदेश से श्री सायन सिकदर, हैदराबाद विश्वविद्यालय से श्री धर्मसोतू भीक्या, आंध्र यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, विशाखापत्तनम से के. नारायण राव और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, डिजाइन और विनिर्माण संस्थान, जबलपुर से श्री कैलाश वामनराव कलारे जैसे शोधकर्ताओं ने मशीन अधिगम, गहन अध्ययन, समानांतर कंप्यूटिंग और वायरलेस सेंसर नेटवर्क अनुसंधान क्षेत्र के विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किये।

आंध्र यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, विशाखापत्तनम से सुश्री चामर्थी अनुषा और श्री डी वेंकट सुब्बैया ने मशीन इंटेलिजेंस के माध्यम से ऑब्जेक्ट इमेज डिटेक्शन और कैमरा इमेज की पहचान पर अपने शोध प्रस्तुत किये।

एनआईटी दुर्गापुर से श्री नारायण चांगदर ने मल्टी-एजेंट्स गठबंधन संरचना निर्माण के लिए नोवल एल्गोरिदम पर अपना शोध प्रस्तुत किया है।

सुश्री कीर्ति कुमार ने सोशल मीडिया पर साइबरबुलिंग की स्वचालित जाँच पर अपना शोध प्रस्तुत किया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा शोध कार्य की अत्यंत सराहना की गई।

सत्र के समापन में डीआईसी के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अभिषेक सिंह ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में एआई और एनालिटिक्स के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। शोध के अग्रिम चरणों के शोधकर्ताओं को उनके परिणामों/तकनीकों को व्यावहारिक परिदृश्यों में लागू करने के तरीकों पर अत्यधिक ध्यान देने का सुझाव दिया गया। कम्प्यूटरीकरण क्षमताओं, मंत्रालयों, विभागों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के साथ सहयोग और सही डेटा तक पहुंच आदि के संदर्भ में अपने शोध कार्य को आगे बढ़ाने के दौरान आने वाले मुद्दों के लिए उन्हें डीआईसी/ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से परामर्श लेने की भी सलाह दी गई थी।

भारत हर वर्ष 15 सितंबर को महानतम भारतीय अभियंता भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्मदिवस पर उनको श्रद्धांजलि देने के रूप में अभियंता दिवस मनाता है। वह भारत में अभियांत्रिकी के अग्रदूत थे। समाज के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए, भारत सरकार ने वर्ष 1955 में इस महान विभूति को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।

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