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पंद्रहवें वित्त आयोग ने उत्तर प्रदेश के आरएलबी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

प्रविष्टि तिथि: 21 OCT 2019 1:30PM by PIB Delhi

पंद्रहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन.के. सिंह के नेतृत्‍व में आयोग के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आज उत्तर प्रदेश के ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की।

 

आयोग को सूचित किया गया कि:

 

·         उत्‍तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 राज्य में पंचायती राज संस्‍थाओं को नियंत्रित करने वाला अधिनियम है।

·         2015 में गठित 5वें राज्‍य वित्‍त आयोग (एसएफसी) ने 31 अक्टूबर, 2018 को अपनी रिपोर्ट दाखिल की। मंत्रिमंडल उप समिति द्वारा प्रमुख सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी इसे विधानसभा में रखा जाना बाकी है। फिलहाल राज्य में चौथी एसएफसी रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया जा रहा है।

·         संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 29 कार्यों में से केवल 15 कार्य पंचायती राज संस्‍थाओं के लिए निर्धारित हैं।

·         उत्‍तर प्रदेश में 59,073 ग्राम पंचायतें, 821 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला परिषद हैं।

·         उत्‍तर प्रदेश के प्रधान महालेखाकार के अनुसार2013-14 से 2017-18 की अवधि के दौरान, पंचायती राज संस्‍थानों के मामले में कुल राजस्व के 2-3 प्रतिशत का सृजन  किया।

 राज्य को 14वां वित्‍त आयोग का हस्‍तांतरण:

अनुदान

सभी राज्‍य (करोड़)

उत्‍तर प्रदेश   (करोड़)

कुल अनुदानों के प्रतिशत के रूप में उत्‍तर प्रदेश के लिए अनुदान

मूलभूत अनुदान

180263

32199

17.9%

निष्‍पादन अनुदान

20029

3578

17.9%

 

उत्‍तर प्रदेश सरकार के चौथे राज्‍य वित्‍त आयोग के प्रमुख अवलोकन थे:

·         राज्य के कर का 12.5 प्रतिशत ​​और वसूली की लागत का सकल गैर-कर राजस्व हस्‍तांतरित हो।

·         ग्रामीण स्‍थानीय निकायों और शहरी स्‍थानीय निकायों के बीच क्रमश: 40 और 60 के अनुपात में वितरण हो।

·         आयोग ने सिफारिश की कि पिछले राज्‍य वित्‍त आयोग की तरह, और इस चौथे राज्‍य वित्‍त आयोग के बाद राज्‍य वित्‍त आयोग की नई रिपोर्ट आने तक, सरकार इस राज्‍य वित्‍त आयोग की सिफारिशों को लागू कर सकती है।

·         राज्‍य वित्‍त आयोग ने पाया कि आवश्यक रूप से आंकड़ों को जुटाने के लिए, आयोग को सूचना जारी करने में राज्य सरकार के अधिकारियों के सहयोग की कमी थी, और आयोग के कामकाज में सरकारी अधिकारियों का अनुचित प्रशासनिक हस्तक्षेप भी था।

 

ग्रामीण स्‍थानीय निकायों के प्रतिनिधि – श्री कुलविंदर सिंह, अध्यक्ष, जिला पंचायत, मेरठ; श्रीमती सरिता द्विवेदी, अध्यक्ष, जिला पंचायत, बांदा; श्रीमती उत्तम देवी, ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत भटहट, गोरखपुर; श्री राजेश रावत, ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत, मड़ावरा, ललितपुर; श्रीमती श्वेता सिंह, ग्राम प्रधान, लतीफपुर, लखनऊ; श्री रामेश्वर सिंह, ग्राम प्रधान खोराडीह, मिर्जापुर; श्री महीप कुमार सिंह, सदस्य, जिला पंचायत, वार्ड नंबर 19, लखनऊ; श्री वीरेंद्र प्रताप सिंह, सदस्य, जिला पंचायत, झाँसी; श्री सुभाष चंद्र भारती, सदस्य, जिला पंचायत, वार्ड नंबर 4, गोरखपुर; श्री अनूप सिंह, सदस्य, क्षेत्र पंचायत बुडगोरा, वार्ड नंबर 93, बाराबंकी; श्री राज कुमार चौधरी, सदस्य, क्षेत्र पंचायत, सिद्धार्थनगर; श्री मिथिलेश, सदस्य, क्षेत्र पंचायत कर्वी, वार्ड नंबर 55, बेहार, चित्रकूट; श्री श्याम सुंदर, सदस्य, ग्राम पंचायत सर्व, सीतापुर; श्री हबीब, सदस्य, ग्राम पंचायत भनेड़ा, श्यामली; श्री राम जीवन शुक्ला, सदस्य, ग्राम पंचायत पलरा, झाँसी वित्त आयोग के साथ चर्चा के लिए उपस्थित थे।

 

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्थानीय निकायों की मुख्य आवश्यकताओं के रूप में आयोग को जिनके बारे में अवगत कराया गया था, उनमें शामिल हैं - विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी, पानी की कमी, आय के स्रोत के रूप में संपत्ति कर, खराब सामाजिक संकेतक, पंचायत भवन, शवदाह गृह जैसी नागरिक सुविधाओं की आवश्यकता, सड़क और जल निकासी का आधारभूत ढांचा, चेक डैम के निर्माण की आवश्यकता, मवेशियों की वजह से उत्‍पन्‍न होने वाली समस्याएं, सुरक्षित पेयजल की कमी, सार्वजनिक पुस्तकालयों के निर्माण के लिए धन की कमी, मनोरंजक क्षेत्र और खेल गतिविधियाँ आदि।

 

आयोग ने पंचायती राज संस्‍थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा व्‍यक्‍त की गई सभी चिंताओं पर ध्‍यान दिया और केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशों में उन्हें शामिल करने का वचन दिया।

 

आरकेमीणा/आरएनएम/एएम/एसकेएस/एसके-3703

 


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