रक्षा मंत्रालय

पूर्वावलोकन- गणतंत्र दिवस समारोह 2019

प्रविष्टि तिथि: 25 JAN 2019 1:52PM by PIB Delhi

26 जनवरी, 1950 एक ऐसा महत्वपूर्ण दिवस था, जो एक राष्ट्र के जीवन में अविस्मरणीय होता है। इस दिन हमारी प्रिय मातृभूमि ने औपनिवेशिक व्यवस्था के अंतिम अवशेष को मिटाते हुए एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बनकर एक नई सुबह की किरण देखी। भारत के प्रथम राष्ट्रपति ने पद की शपथ ली और हम भारतीयों ने इस महान प्राचीन सभ्यता के लिए एक नए युग का शुभांरभ किया। उस समय से लेकर आज तक यह एक संपूर्ण सार्थक यात्रा रही है। कल भी एक बहुत विशेष दिवस होगा जब गर्वित राष्ट्र अपना 70वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। मुख्य रंगारंग उत्सव का आयोजन ऐतिहासिक राजपथ पर किया जाएगा, जहां राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय रक्षा बल के सर्वोच्च कमांडर श्री मटामेला सिरिल रामफोसा की मेजबानी करेंगे।

 

भारत और दक्षिण अफ्रीका साझा मूल्यों और सामान्य सिद्धांतों के साथ अद्वितीय संबंधों से जुड़े हैं। इस वर्ष हम 20वीं शताब्दी के सबसे महान संत, मोहनदास करमचंद गांधी जी की जयंती का 150वां वर्ष मना रहे हैं, जिन्हें हम सभी महात्मा कहते हैं। इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का उल्लेखनीय विषय यह महान व्यक्ति स्वयं हैं। दक्षिण अफ्रीका में उनके 21 वर्ष के प्रवास ने उन्हें शांति के दूत के रूप में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस परिवर्तन को 20वीं शताब्दी के सबसे महान पुरुषों में से एक, रंगभेद विरोधी और नवीन विचारधारा से परिपूर्ण दक्षिण अफ्रीका के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.नेल्सन मंडेला द्वारा वर्णित किया गया है। उन्होंने कहा, “आपने हमें मोहनदास गांधी दिया; हमने उन्हें महात्मा गांधी के रूप में आपको लौटा दिया।

 

गणतंत्र दिवस परेड समारोह का शुभारंभ देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ होगा। मातृभूमि की सेवा में अपना जीवन बलिदान देने वाले हमारे सशस्त्र बल के जवानों के अदम्य साहस को याद करने के लिए अमर जवान ज्योति पर अग्नि की एक लौ निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है। इसे बैरल पर खड़ी एक उलटी राइफल और एक सैनिक के हेलमेट के द्वारा प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया गया है।

 

इस वर्ष असम राइफल्स के दस्ते में पहली बार सभी महिलाएं हिस्सा ले रही है। मेजर खुशबू कंवर इस दस्ते का नेतृत्व कर रही हैं। पूर्वोत्तर के इन प्रहरियों ने स्वतंत्रता से पूर्व और बाद के सभी युद्धों में सक्रिय रूप से भाग लिया हैं। यह पहाड़ी लोगों के मित्र और हमारी सीमाओं की कानून और व्यवस्था के संरक्षक भी हैं। वे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में प्रभावी रूप से शामिल रहे हैं। यह बल राष्ट्र के लिए अपनी शानदार सेवा के 183 वर्ष पूर्ण कर चुका है।

 

परंपरा के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के बाद, 21 बंदूकों की सलामी के साथ राष्ट्रगान गाया जाएगा फिर परेड का शुभारंभ होगा और राष्ट्रपति परेड की सलामी लेंगे। परेड की कमान दिल्ली क्षेत्र मुख्यालय के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल असित मिस्त्री के द्वारा संभाली जाएगी। दिल्ली क्षेत्र मुख्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ, मेजर जनरल राजपाल पुनिया  परेड में सेकंड-इन-कमांड होंगे। इसके पश्चात सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के विजेता आएंगे। इनमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेता शामिल हैं। परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन बाना सिंह (सेवानिवृत्त), सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव, 18 ग्रेनेडियर और सूबेदार संजय कुमार, 13 जेएके राइफल्स और अशोक चक्र विजेता, मेजर जनरल साइरस ए पिथेवाला (सेवानिवृत्त), कर्नल जसबीर सिंह रैना (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट कर्नल जस राम सिंह, (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट कर्नल डी श्रीराम कुमार, नायब सूबेदार (मानद) छेरिंग मुटुप (सेवानिवृत्त), मध्य प्रदेश के जिला छतरपुर के श्री गोविंद सिंह, मध्य प्रदेश के जिला गुना के श्री भूरे लाल जीपों पर डिप्टी परेड कमांडर का अनुसरण करेंगे। परम वीर चक्र को दुश्मन के के विरूद्ध बहादुरी और आत्म-बलिदान के सबसे विशिष्ट कार्य के लिए प्रदान किया जाता है। अशोक चक्र को दुश्मन के समक्ष वीरता और आत्म-बलिदान के अदम्य साहस के लिए प्रदान किया जाता है।

 

इम्पीरियल आर्मी के खिलाफ वीरता से लोहा लेने वाली इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के दिग्गज भी इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेंगे। इनमें श्री परमानंद, श्री लालती राम, श्री हीरा सिंह और श्री भागमल शामिल होंगे।

 

मेजर अपूर्वा दाबड़े की अगुवाई में 61 कैवेलरी ग्वालियर लांसर्स का पहला दस्ता होगा। 61 कैवेलरी दुनिया में एकमात्र रूप से सक्रिय सेवारत अश्व कैवलरी रेजिमेंट है। इस रेजिमेंट का गठन 01 अगस्त 1953 को किया गया था, जिसमें छह स्टेट फोर्सिस की कैवलरी इकाईयाँ शामिल हैं।

 

भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक, टी-90 भीष्म, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (आईसीवी) बॉलवे मशीन पिकेट (बीएमपी-II/आईआईके), सर्फेस माइन क्लियरिंग सिस्टम (एसएमसीएस), के-9 वज्र-टी, एम 777 2 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर (यूएलएच), ट्रांसपोर्टेबल सैटेलाइट टर्मिनल (टीएसटी), आकाश वैपन सिस्टम परेड में मुख्य आकर्षण होंगे।

 

राष्ट्र के लिए सैनिकों की निस्वार्थ सेवा और सम्मान को दर्शाते सेना के मार्चिग दस्तों में मद्रास रेजिमेंट, राजपूताना राइफल्स, सिख रेजिमेंट, गोरखा ब्रिगेड, आर्मी सर्विस कॉर्प्स, 102 इन्फेंट्री बटालियन (टेरिटोरियल आर्मी) पंजाब सहित दिग्गज पूर्व सैनिकों की झांकी शामिल होगी। यह वेटरन्स: एक्सेलेरेटर्स इन नेशनज़ ग्रोथ थीम को प्रदर्शित करेंगे। परेड में पहली बार सिख लाइट इन्फैंट्री, महार रेजिमेंटल सेंटर और लद्दाख स्काउट्स का संयुक्त बैंड 'शंखनाद' की धुन बजाएगा।

 

लेफ्टिनेंट कमांडर अंबिका सुधाकरन के नेतृत्व में 144 युवा नौसैनिकों का नौसेना दस्ता शामिल होगा। इसके पश्चात नौसेना की झांकी इंडियन नेवी- कॉम्बैट रेडी फोर्स फॉर नेशनल सिक्योरिटीशीर्षक के साथ अपना प्रर्दशन करेगी, जो 21वीं सदी की बहुआयामी भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता का गर्व से वर्णन करती है।

 

वायु सेना के मार्चिंग दस्ते में 144 वायु सैनिक योद्धा शामिल हैं। यह वायु सैनिक 'बगल शस्त्र' के साथ कदमताल करेंगे, जबकि अधिकारियों की पिस्टल उनके होल्स्टर्स में होंगी। इसके बाद वायु सेना की झांकी, भारतीय वायु सेना स्वदेशीकरण को प्रोत्साहित करती है शीर्षक  के साथ राजपथ पर अपना शौर्य दिखाएगी। इस झांकी में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किए गए विमान, रडार और मिसाइल प्रणाली के मॉडल शामिल हैं। प्रदर्शित किए जाने वाले मॉडलों में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसी), लो-लेवल लाइट वेट रडार (एलएलएलडब्ल्यूआर), सुखोई-30 एमकेआई और आकाश मिसाइल सिस्टम होंगे।

 

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) मध्यम दूरी की जमीन से वायु में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम) का प्रदर्शन करेगा। यह प्रणाली एक वायु और मिसाइल रक्षा (एएमडी) प्रणाली है जो दुश्मन के विमानों और निर्देशित हथियारों से होने वाले हमलों के खिलाफ अपने क्षेत्रों और सुरक्षा बलों की सुरक्षा के लिए है। इसके अलावा डीआरडीओ अर्जुन आर्मर्ड रिकवरी एंड रिपेयर व्हीकल (अर्जुन एआरआरवी) का भी प्रदर्शन करेगा।

 

फ्लाईपास्ट का नेतृत्व एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर वेपन सिस्टम इंटीग्रेटेड (डब्ल्यूएसआई) रुद्रऔर दो एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, डायमंड फॉरमेशन में सेना के ध्रुव के द्वारा किया जाएगा।

 

असम राइफल्स, अर्धसैन्य बलों और अन्य सहायक नागरिक बलों के मार्चिंग दस्ते का नेतृत्व करेंगा। इसके बाद भारतीय तट रक्षक, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, रेलवे सुरक्षा बल, दिल्ली पुलिस, सीमा सुरक्षा बल का ऊँट दस्ता, एनसीसी के छात्र और छात्राओं का दस्ता और नेशनल सर्विस स्कीम का दस्ता भी कदमताल में शामिल होंगा।

 

कुल 22 झांकियों में से 16 झांकियाँ विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से  और छह झांकियाँ विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और अन्य संस्थानों से होंगी  जिनके माध्यम से महात्मा गांधी के जीवन, दृष्टिकोण और आदर्शों को प्रदर्शित किया जाएगा। सिक्किम की झांकी में राज्य में होने वाली 100 प्रतिशत जैविक खेती और महात्मा गांधी की परिकल्पना और आदर्श के अनुरूप देश के सबसे स्वच्छ राज्य के स्वरूप को चित्रित किया गया है। महाराष्ट्र की झांकी भारत छोड़ो आंदोलन का चित्रण करती है, जो आमजन का एक आंदोलन था और इसमें लाखों आम भारतीयों ने भाग लिया था। अंडमान और निकोबार की झांकी अंडमान में सेलुलर जेल के कैदियों के मध्य गांधी जी की भूमिका का प्रदर्शन करेगी। असम की झांकी में असम में गांधी जी के आंदोलन और कुटीर उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के उनके सपनों को दर्शाया जाएगा।

 

त्रिपुरा की झांकी गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित समतावादी, समावेशी और विविध सामाजिक और जातीय संस्कृति का प्रदर्शन करेगी। गोवा की झांकी अनेकता में एकता का प्रदर्शन करेगी। अरुणाचल प्रदेश एक स्वच्छ मोनपा गांव की झांकी और उसके शांतिपूर्ण, सांस्कृतिक जीवन के माध्यम से शांति का चित्रण करेगा जिसकी परिकल्पना महात्मा गांधी ने की थी। पंजाब की झांकी का विषय जलियांवाला बाग होगा, जो स्वतंत्रता संग्राम में शामिल शहीदों की यादों को ताजा करेगा। तमिलनाडु अपनी झांकी के माध्यम से महात्मा गाँधी जी के द्वारा खेतों में काम करने वाले गरीब किसानों और लोगों को देखकर 22 सितंबर, 1921 को मदुरई में परिधान बदलने और उनके लिए कार्य करने के भाव को चित्रित करेगी।

 

गुजरात की झांकी महात्मा गांधी के ऐतिहासिक दांडी मार्च का चित्रण करेगी, जिसमें उन्होंने गुजरात के तटीय गाँव दांडी में मुट्ठी भर नमक छान कर ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। जम्मू और कश्मीर की झांकी का विषय रे ऑफ होप-अवर कम्पोजिट कल्चरहोगा। कर्नाटक अपनी झांकी में 26-27 दिसंबर, 1924 को बेलागवी कांग्रेस अधिवेशन में गांधीजी के प्रयासों का प्रदर्शन करेगा। उत्तराखंड की झांकी आध्यात्मिक अनाशक्ति आश्रम का चित्रण करेगी। दिल्ली की झांकी महात्मा गांधी और राष्ट्रीय राजधानी के साथ उनके जुड़ाव का प्रदर्शन करेगी। उत्तर प्रदेश महात्मा गांधी की 150वीं जयंती समारोह का प्रदर्शन करेगा। पश्चिम बंगाल की झांकी  महात्मा गांधी के जीवन के दो प्रमुख पहलुओं भारत की स्वतंत्रता के महत्वपूर्ण कार्य में उनके कोलकाता प्रवास और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के साथ उनके संबंध को दर्शाएगी।

 

विद्युत मंत्रालय सौभाग्य: न्यू इंडिया रौशन इंडिया को दिखाएगा। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की चार वर्ष पुरानी शानदार यात्रा के अनुभवों का प्रदर्शन करेगा, जो विश्व का सबसे व्यापक व्यवहार परिवर्तन अभियान है। भारतीय रेलवे मोहन से महात्माशीर्षक वाली झांकी में रेलवे के साथ उनके संबंधों को प्रदर्शित करेगा। कृषि मंत्रालय महात्मा गांधी के आर्थिक दर्शन के माध्यम से बेहतर कृषि और छोटे पैमाने पर ग्रामीण कुटीर उद्योगों के माध्यम से गरीबी को समाप्त करने का संदेश देगा। सीपीडब्ल्यूडी की (बागवानी) झांकी महात्मा गाँधी के 150वें जयंती वर्ष पर उनको पुष्पांजलि अर्पित करेगी। यह विभिन्न पुष्पों के माध्यम से फूलों की एक विस्तृत विविधता को दर्शाती है और इसके पृष्ठ भाग में गांधीजी के विश्व शांति और एकता के संदेश को दर्शाया गया है।

 

अपनी असाधारण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरुस्कार 2019 से पुरस्कृत छह लड़कियोँ और 20 लड़कों सहित कुल छब्बीस बच्चे भी इस अवसर पर परेड में शामिल होंगे। अभिनव, शैक्षिक, खेल, कला, संस्कृति, सेवा, संगीत और वीरता के साथ-साथ किसी भी अन्य क्षेत्र में अपनी असाधारण योग्यता को प्रर्दशित करने के लिए बच्चों को यह पुरस्कार दिया जाता है।

 

महात्मा गांधी के सिद्धांतों में विश्वास और इन्हें अपनाने के आश्वासन के "जय घोष" के साथ दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेवी चिल्ड्रन स्कूल के बच्चों का एक दल भी परेड में शामिल होगा। कोलकाता कल्चरल सेंटर के बिहार पूर्वी ज़ोन  के सरकारी स्कूलों के बच्चे "बापू का सपना" के भाव को दोहराते हुए इस गीत पर नृत्य करेंगे। दिल्ली के किशन गंज का राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय (आरपीवीवी) और पश्चिम विहार के केंद्रीय विद्यालय के छात्र अपने शानदार नृत्य प्रदर्शन के माध्यम से बापू की विचारधारा के प्रति श्रद्धांजलि और श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।

 

मोटरसाईकिल पर लगी 12.5 फीट की सीढ़ी के शीर्ष पर मौजूद कैप्टन मनप्रीत सिंह के उत्साहपूर्ण नेतृत्व में सिग्नल मोटर साइकिल टीम के सदस्य  परेड में साहसिक करतबों के साथ राष्ट्रपति को सलामी देंगे। इतिहास में यह पहली बार है जब वह 8 फीट की सीढ़ी से सलामी देने के अपने पहले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 12.5 फीट की सीढ़ी से राष्ट्रपति को सलामी देंगे।

 

परेड का भव्य समापन भारतीय वायुसेना के एक शानदार फ्लाईपास्ट होगा। इस फ्लाईपास्ट में रुद्र के साथ तीन एएलएच एमके IV डब्ल्यूएसआई हेलीकॉप्टर शामिल होंगे।  इसके बाद हरक्यूलिसके बेड़े में तीन सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान शामिल होंगे। 'हरक्यूलिस'  के बाद 'नेत्र'  दी आई इन द स्काई का बेड़ा होगा। इसके अलावा इस फ्लाईपास्ट में एएन 32 विमान, दो एसयू-30 एमकेआई और एक सी-17 ग्लोबमास्टर भी शामिल होगा।

 

अगली पंक्ति में पांच जगुआर डीप पैठ स्ट्राइक विमान होंगे। जगुआर के बाद पांच मिग-29 अपग्रेड एयर सुपीरियरिटी फाइटर्स अपना जौहर दिखाएगें। 900 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उड़ान भरने वाले भारतीय वायु सेना के तीन अत्याधुनिक एसयू-30 एमकेआई त्रिशूल बनाकर परेड में अपनी सलामी देंगे।

 

गणतंत्र दिवस समारोह का समापन राष्ट्रगान और रंग बिरंगे गुब्बारों को आकाश में छोड़ने के साथ होगा।

 

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हिन्दी इकाई, पसूका, नई दिल्ली-84

 


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