आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा-2018 - आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय

12 शहरों (एचआरआईडीएवाई) के लिए कुल 422.61 करोड़ रुपये की लागत के सभी 70 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, 310.43 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई

2018 में कुल 140.14 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाएं पूरी हुई

Posted On: 26 DEC 2018 11:30AM by PIB Delhi

शहरी पुनर्जागरणः भारतीय शहरों का कायाकल्प और परिवर्तन- 6,85,758 करोड़ रुपये की लागत से लक्ष्य प्राप्ति के प्रयास जारी

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने विश्व की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में एक-शहरी पुनर्जागरण के लिए भारतीय शहरों का कायाकल्प और परिवर्तन- की शुरूआत की है। इसके लिए कई पहलों की शुरूआत की गई है और 6,85,758 करोड़ रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। इन परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों को नागरिक अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। परिवर्तन का यह कार्य, शहरी क्षेत्रों में शहरी कायाकल्प परियोजनाओं के माध्यम से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 12 नगरों के लिए हृदय (एचआरआईडीएवाई)  योजनाओं के कार्यान्वयन को मंजूरी दी गई है।

राष्ट्रीय विरासत शहर विकास और संवर्धन योजना (हृदय)

21 जनवरी, 2015 को शुभारंभ की गई राष्ट्रीय विरासत शहर विकास और संवर्धन योजना (हृदय) को 12 नगरों में लागू किया गया है। ये 12 नगर हैं- अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बादामी, द्वारिका, गया, कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेलनकन्नी और वारंगल।

2018 में 140.14 करोड़ रुपये की लागत से अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बादामी, द्वारिका, पुरी और वाराणसी नगरों में 20 परियोजनाएं पूरी की गई। 2018 में पूरी की गई कुछ प्रमुख परियोजनाएं निम्न हैं-

·         हृदय नगरों में तीर्थ यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वाराणसी, अजमेर, अमृतसर और अमरावती शहरों के विभिन्न विरासत स्थलों से संबंधित 59 सड़कों का उन्नयन किया गया। अमृतसर (गोलबाग), अजमेर (सुभाष उद्यान) और पूरी (बांकी मुहाना) शहरों के सार्वजनिक पार्कों व उद्यानों के कायाकल्प का कार्य पूरा किया गया।

·         शहरों में स्थानीय विरासत को पुनर्जीवित करने और पर्यटकों के लिए अतिरिक्त आकर्षण केन्द्रों के निर्माण के लिए पुष्कर, अजमेर और वाराणसी शहरों में विरासत पथ से संबंधित तीन विकास परियोजनाओं को पूरा किया गया। विरासत पथ के माध्यम से प्रमुख स्मारकों को जोड़ा गया। वर्तमान विरासत भवनों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से अमृतसर में रामबाग गेट और वाराणसी में टाउन हॉल से जुड़ी दो परियोजनाओं को पूरा किया गया। एक म्यूजियम के रूप में रामबाग गेट और एक सांस्कृतिक केन्द्र के तौर पर टाउन हॉल का उपयोग हो रहा है।

·         विरासत शहरों में कई जलाशयों में पानी नहीं है और इनका इस्तेमाल कचरा संग्रह स्थल के रूप में किया जा रहा है। हृदय (एचआरआईडीएवाई) परियोजना के अंतर्गत कुछ विरासत जलाशयों को पुनर्जीवित करने का कार्य प्रारंभ किया गया है। अना सागर झील से जुड़ी परियोजना को पूरा कर लिया गया है। प्रत्येक विरासत शहर में जागरूकता बढ़ाने और विकास के लिए सरकार के प्रयासों की जानकारी देने के लिए आईईसी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

ग्राफ में हृदय परियोजनाओं की स्थिति

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      इन परियोजनाओं से अवसंरचना का निर्माण होगा और शहर के लोगों तथा पर्यटकों के लिए शहर के विरासत चरित्र से संबंधित अनुभव बेहतर होगा। परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा। इसलिए जनभागीदारी से इन परिसंपत्तियों को लम्बी अवधि तक संचालित किया जा सकेगा। यह लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक भी सिद्ध होगा। इसके अलावा अवसंरचना विकास के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों के बेहतर परिचालन व मरम्मत, परिसंपत्तियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक लाभ प्राप्ति के लिए आवश्यक है।

      कुछ सफल परियोजनाएं

·         रामबाग स्कूल का पुनर्निर्माणः रामबाग गेट, म्यूनिसिपल प्रिंटिंग प्रेस और म्यूनिसिपल स्कूलः पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह के समय से ही अमृतसर शहर का रामबाग गेट एकमात्र ऐतिहासिक गेट है जो अभी तक विद्यमान है।

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किले के अंदर एक भवन में ब्रिटिश जमाने का एक 100 साल पुराना प्रिंटिंग प्रेस और एक स्कूल है। परियोजना के अंतर्गत पूरे भवन की संरचना के संरक्षण का कार्य पूरा किया गया। संरक्षण कार्य का उद्देश्य था- भवन के उपयोगकर्ताओं पर भवन की सांस्कृतिक विशेषताओं का प्रभाव पड़े। इस प्रकार भवन के महत्व को स्थानीय समुदाय से जोड़ा गया।

प्रारंभ में दो कमरों में पांच कक्षाएं चल रही थी। परियोजना के तहत भवन में उपलब्ध जगह को पांच कक्षाओं के लिए सुव्यवस्थित किया गया तथा बरामदे को बच्चों की अन्य गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराया गया। शौचालयों तथा रसोईघर का उन्नयन किया गया। शिक्षकों के लिए भी एक कमरा उपलब्ध कराया गया। खुले क्षेत्र में बच्चों के खेलने के लिए जगह बनाई गई।

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रामबाग गेट को लोगों के म्यूजियम (पीपल्स म्यूजियम) के रूप में विकसित किया गया। स्थानीय समुदाय इसे लोक विरसा कह कर बुलाते है। स्थानीय समुदाय के लिए यह सांस्कृतिक स्थल है और यह अमृतसर शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।

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प्रिंटिंग प्रेस के उपयोग को बनाए रखने के लिए म्यूनिसिपल प्रिंटिंग प्रेस की भवन संरचना तथा मशीनों को बेहतर बनाया गया। उल्लेखनीय है कि अमृतसर शहर के धनी राम चात्रिक ने प्रिंटिंग प्रेस के टाईप सेट को गुरुमुखी भाषा में भी तैयार किया। वे एक पंजाबी कवि और मुद्रण विशेषज्ञ थे। म्यूनिसिपल प्रिंटिंग प्रेस का पुनर्निर्माण उनके योगदान के प्रति श्रद्धांजलि है।

·         विरासत केन्द्र के रूप में टाउन हॉल का संरक्षण और विकासः वाराणसी के मैदागिन स्थित टाउन हॉल को विजयनगर के महाराजा ने 1870 में बनवाया था। टाउन हॉल का निर्माण ड्यूक ऑफ ईडिनबर्ग के वाराणसी आगमन के उपलक्ष्य में किया गया था। परियोजना के अंतर्गत विरासत भवन का पुनर्निर्माण किया गया और इसे शहरवासियों तथा पर्यटकों द्वारा एक सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में उपयोग के लिए विकसित किया गया। टाउन हॉल भवन में रोशनी की व्यवस्था की गई, दरवाजों और खिड़कियों का मरम्मत किया गया, दीवारों की मरम्मत की गई और उनपर रंग-रोगन चढ़ाया गया, मंच निर्माण के लिए ग्रेनाइट पत्थर का इस्तेमाल किया गया, ध्वनि यंत्रों को लगाया गया और वातानुकूलन की व्यवस्था की गई। यह परियोजना अगस्त, 2018 में पूरी हुई। तब से इस भवन में कई सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया है जैसे हृदय आर्ट कैम्प, योग कार्यक्रम आदि।

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इस परियोजना के पूरे होने से टाउन हॉल के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित किया गया है और वाराणसी के लोगों को सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक अतिरिक्त स्थल प्राप्त हुआ है।

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·         अजमेर में सुभाष उद्यान का विकासः सुभाष उद्यान का निर्माण उस स्थान पर हुआ था जहां जहांगीर ने महल बनवाएं थे। समय के साथ ये महल विलुप्त हो गए। लोगों के घूमने-फिरने व आनंद उठाने के लिए इस पार्क में सुविधाएं विकसित की गई। जैसे- जॉगिंग ट्रैक, साईकिल ट्रैक, नौका विहार, कैफे आदि। यह परियोजना सितंबर, 2018 में पूरी हुई। स्थानीय समुदाय इस उद्यान को सामाजिक गतिविधियों के लिए भी उपयोग करते हैं।

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·         बांकी मुहाना स्थित अपशिष्ट जल परिशोधन संयंत्र द्वारा परिशोधित जल के उपयोग से प्राकृतिक उद्यान का विकासः भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना करने लाखों तीर्थ यात्री ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर पहुंचते है। नवंबर महीने में वार्षिक समुद्र तट (बीच) उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव में भारतीय और विदेशी पर्यटक भाग लेते है।

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परंतु समुद्र तट का विकास मात्र कुछ ही स्थलों तक सीमित है। इस कारण इन स्थलों पर भारी भीड़ इकट्ठा होती है। वैकल्पिक पर्यटन स्थल का विकास इस परियोजना का लक्ष्य था।

इस परियोजना के अंतर्गत निम्न कार्य हुए- दीवारों का निर्माण, प्राकृतिक दृश्यों की व्यवस्था, उद्यान के लिए मार्ग निर्माण, एम्फीथिएटर का निर्माण, लाईट व झील का निर्माण, समुद्री जल प्रतिरोधक पौधारोपण, पेयजल की व्यवस्था व शौचालय का निर्माण आदि। यह परियोजना सितंबर, 2018 में पूरी हुई। इस परियोजना से कुछ स्थलों पर पर्यटकों की भीड़ को कम करने में मदद मिली, समुद्र तट पर हरित प्रदेश विकसित किया गया और इस प्रकार क्षेत्र का सम्पूर्ण विकास हुआ।

 

·         10 हृदय (एचआरआईडीएवाई) सड़कों का विषयवस्तु (थीम) के आधार पर विकासः

 

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