संस्कृति मंत्रालय
संस्कृति मंत्रालय ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का डिजिटलीकरण करने एवं उसे साझा करने के लिए 'गूगल आर्ट्स एंड कल्चर' के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया
प्रविष्टि तिथि:
05 NOV 2026 7:33PM by PIB Delhi
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने आज 'गूगल आर्ट्स एंड कल्चर' के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जिसका उद्देश्य अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को आम लोगों तक पहुंचाना है। एक वर्चुअल समारोह में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल और 'गूगल आर्ट्स एंड कल्चर' के उपाध्यक्ष एवं संस्थापक श्री अमित सूद मौजूद थे।

यह साझेदारी भारत की सभ्यतागत व्यापकता को दर्शाएगी, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और उनके पास सुरक्षित रखी हुई संग्रहणीय वस्तुएं, राष्ट्रीय संग्रहालयों की संपत्तियां, ज्ञान भारतम के तहत दस्तावेजीकृत पांडुलिपियां और पूरे देश में मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं द्वारा सहेज कर रखी गई शिल्प, प्रदर्शन कला और जीवंत परंपराएं शामिल हैं।
इसके केंद्र में 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' है, जो नई दिल्ली के नॉर्थ एवं साउथ ब्लॉक में भारत के सदियों पुराने इतिहास को दर्शाने वाले एक संग्रहालय के रूप में विकसित हो रहा है। इसका डिजिटलीकरण इन इमारतों और इनमें रखी जाने वाली बहुमूल्य कलाकृतियों का एक स्थायी रिकॉर्ड तैयार करेगा और आम जनता को हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रयासों में से एक की झलक देखने को मिलेगा।
यह समझौता ज्ञापन मंत्रालय के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पहुंच को बेहतर बनाना और अपनी डिजिटल पहलों का विस्तार करना है, ताकि भारत की विरासत को भारतीय भाषाओं में और किसी भी उपकरण पर देखा-समझा जा सके। यह पूरे मंत्रालय के एक ऐसे दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें संरक्षण, जनसामान्य की पहुंच और भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं। इसमें हर स्तर के संस्थानों एवं विभिन्न क्षेत्रों के साझेदारों को शामिल किया गया है।

इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए, संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा, “भारत की सांस्कृतिक विरासत एक जीवंत विरासत है। यह प्रत्येक नागरिक की है और पूरी दुनिया से संवाद करती है। गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के साथ हमारी साझेदारी, तकनीक के माध्यम से इस विरासत का दस्तावेज़ीकरण करने, संरक्षित करने और साझा करने में मदद करती है। इसमें हमारी प्राचीन पांडुलिपियों एवं स्मारकों से लेकर हमारे राष्ट्रीय संग्रहालयों के संग्रह और आने वाला 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' शामिल हैं। इन खजानों को भारतीय भाषाओं में और पूरी दुनिया में लोगों के लिए उपलब्ध कराकर, हम उम्मीद करते हैं कि अधिक से अधिक लोग भारतीय सभ्यता की कहानी के करीब आएंगे और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखेंगे।”
गूगल आर्ट्स एंड कल्चर का मंत्रालय की संस्थाओं के साथ पुराना संबंध रहा है, जिनमें भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय संग्रहालय और राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी शामिल हैं, जिनके संग्रहों को इसने वर्षों में ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचने में मदद की है।

गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के उपाध्यक्ष और संस्थापक, श्री अमित सूद ने कहा, “पिछले 15 वर्षों से, गूगल आर्ट्स एंड कल्चर भारत की सदियों पुरानी कथाओं, कलात्मक निपुणता एवं विशाल विरासत से बहुत प्रेरित रहा है। संस्कृति मंत्रालय के साथ हमारी साझेदारी, अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से भारत की अमूल्य धरोहरों को संरक्षित करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चाहे 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' के दृष्टिकोण का समर्थन करना हो या ऐतिहासिक पांडुलिपियों को संरक्षित करना, हमें अपनी तकनीकों का उपयोग करके प्राचीन विरासत को आधुनिक पहुंच से जोड़ने पर गर्व है। इससे ये संग्रह हर जगह जिज्ञासु लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उन्हें सीखने, प्रेरित होने और आनंद लेने का अवसर मिलेगा।”

यह एमओयू भारत की सभ्यतागत विरासत को संरक्षित करने, दीर्घकालिक साझेदारियों के माध्यम से इसकी रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, और देश-विदेश में व्यापक नेटवर्क के माध्यम से इसकी संस्कृति को साझा करने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करता है।

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पीके/केसी/आरटी/एके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2333341)
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