वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
किम्बरली प्रोसेस प्लेनरी से पहले भारत ने वैश्विक हीरा उद्योग के एजेंडे को आगे बढ़ाया
एडीपीए में भारत का 'पर्यवेक्षक' दर्जा हीरा उत्पादक देशों के साथ संबंध को मजबूत करता है
प्रविष्टि तिथि:
05 NOV 2026 6:32PM by PIB Delhi
भारत ने वर्ष 2026 के लिए किम्बरली प्रोसेस (केपी) के अध्यक्ष के रूप में 3 नवंबर 2026 को अंगोला के लुआंडा में परामर्श बैठक आयोजित की। इसमें केपी वर्किंग ग्रुप्स और कमेटियों (केपी वर्किंग बॉडीज) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, केपी के उपाध्यक्ष (घाना गणराज्य), और केपी के पूर्व अध्यक्ष संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए। केपी के अध्यक्ष और वाणिज्य विभाग के अपर सचिव श्री यशवीर सिंह की अध्यक्षता में इस बैठक में वैश्विक हीरा उद्योग से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इनमें कच्चे हीरों की जिम्मेदार सोर्सिंग, संस्थागत प्रशासन, नियमों का पालन और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना जैसे विषय शामिल थे। इस बैठक में वर्ल्ड डायमंड काउंसिल, केपी सिविल सोसाइटी कोएलिशन, डायमंड डेवलपमेंट इनिशिएटिव (डीडीआई) और अफ्रीकन डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एडीपीए) जैसे पर्यवेक्षक और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। यह पहल 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक नई दिल्ली में होने वाली केपी प्लेनरी' (पूर्ण सत्र) से पहले भारत के प्रयासों का हिस्सा है। यह परामर्श बैठक 3-4 नवंबर 2026 को लुआंडा में आयोजित एडीपीए की 20वीं वर्षगांठ (एडीपीए@20) के कार्यक्रमों के दौरान हुई।
एडीपीए में भारत के पास 'पर्यवेक्षक' का दर्जा है, जो इसे अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों के साथ जुड़ने के लिए संस्थागत मंच प्रदान करता है। इससे कच्चे हीरों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित करने, तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान, मूल्य संवर्धन, बाजार तक पहुंच बनाने, और नैतिक व टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के अवसर मिलते हैं।
केपी वर्किंग बॉडीज के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों ने अपनी कार्य योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी दी और उन विषयों की जानकारी दी जिन्हें 'प्लेनरी' (पूर्ण सत्र) में विचार के लिए रखा जाना है। इनमें प्रशासनिक निर्णयों के मसौदे, कच्चे हीरों की जिम्मेदार सोर्सिंग से जुड़ी पहल, सांख्यिकीय रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म में सुधार, तथा संस्थागत प्रशासन और प्रतिभागियों द्वारा नियमों के पालन को मजबूत करने के उपाय शामिल हैं। इस परामर्श से उन विषयों की पहचान करने का अवसर भी मिला, जिनमें आगे और समन्वय की आवश्यकता है, तथा उन क्षेत्रों का पता चला जहाँ शुरुआती तालमेल 'प्लेनरी' (पूर्ण अधिवेशन) के काम में मददगार हो सकता है।
भारत की केपी (किम्बरली प्रोसेस) अध्यक्षता की थीम - 'विश्वास, अनुपालन और विश्वसनीयता' को दोहराते हुए, इस परामर्श बैठक ने वैश्विक हीरा उद्योग की स्थिति और बदलती प्राथमिकताओं पर खुलकर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया। चर्चाओं में हीरा उत्पादक देशों और समुदायों की स्थिरता, केपी सचिवालय के लिए स्थायी फंडिंग और निरंतरता, प्रमाणन और सांख्यिकीय प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, तथा 'किम्बरली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम' (केपीसीएस) के अनुपालन को मजबूत करने जैसे विषय शामिल थे। प्रतिभागियों ने 'कॉन्फ्लिक्ट डायमंड' (संघर्ष-क्षेत्र से जुड़े हीरे) की परिभाषा में सुधार, जिम्मेदार सोर्सिंग, छोटे स्तर और जलोढ़ हीरा उत्पादन, उपभोक्ताओं का भरोसा, और प्रभावी रिपोर्टिंग तथा पीयर-रिव्यू (सहकर्मी-समीक्षा) तंत्र के महत्व पर भी विचार साझा किए।
वाणिज्य विभाग के अपर सचिव और केपी अध्यक्ष, श्री यशवीर सिंह ने कहा, "भारत की अध्यक्षता 'विश्वास, अनुपालन और विश्वसनीयता' पर बल देती है। लुआंडा में इस परामर्श बैठक ने केपी वर्किंग बॉडीज के नेतृत्व, केपी उपाध्यक्ष और पर्यवेक्षकों के साथ सीधे बातचीत करने का अवसर दिया। यह चर्चा उन मुद्दों पर केंद्रित थी जो इस प्रक्रिया और हीरा उद्योग के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। हमारा प्रयास है कि नई दिल्ली में होने वाली पूर्ण सत्र बैठक से पहले इन मुद्दों पर साझा समझ विकसित की जाए, और रचनात्मक बातचीत तथा आम सहमति से लिए गए निर्णयों के माध्यम से व्यावहारिक परिणाम हासिल किए जाएं।"
अंगोला की राजधानी लुआंडा में 4 नवंबर 2006 को स्थापित 'अफ्रीकन डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' (एडीपीए) का उद्देश्य अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों के बीच सहयोग को बढ़ाना है। एडीपीए में 15 सक्रिय सदस्य देश और 8 पर्यवेक्षक शामिल हैं, जिनमें दो गैर-अफ्रीकी पर्यवेक्षक - रूसी संघ और भारत - भी हैं। इसके सदस्य देश मिलकर वैश्विक हीरा उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उत्पादित करते हैं। वर्तमान में एडीपीए की अध्यक्षता 'रिपब्लिक ऑफ सिएरा लियोन' के पास है, जिसका प्रतिनिधित्व वहां के खान और खनिज संसाधन मंत्री, माननीय जूलियस डैनियल मट्टाई कर रहे हैं। 4 नवंबर 2026 को, लुआंडा में आयोजित एडीपीए मंत्रिपरिषद की 13वीं असाधारण बैठक के दौरान, बोत्सवाना को एडीपीए के पर्यवेक्षक सदस्य के रूप में शामिल किया गया।
श्री यशवीर सिंह ने 4 नवंबर 2026 को, एडीपीए@20 के मंत्रिपरिषद और मुख्य समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने “भविष्य के लिए साझेदारी: अफ्रीका के हीरा उद्योग के भविष्य पर वैश्विक दृष्टिकोण” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने केपी चेयर (भारत) 2026 के रूप में वक्तव्य दिया। उन्होंने वैश्विक हीरा मूल्य शृंखला में अफ्रीकी उत्पादक देशों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उत्पादकों, विनिर्माण केंद्रों और उपभोक्ता बाजारों के बीच साझेदारी प्राकृतिक हीरा क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता में मदद कर सकती है। भारत के '3C' विजन – कॉन्फिडेंस (विश्वास), कंप्लायंस (अनुपालन) और क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) – का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक हीरों में उपभोक्ताओं का भरोसा, केपी की न्यूनतम आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन, और विश्वसनीय व समावेशी किम्बरली प्रक्रिया बहुत जरूरी हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हीरा संसाधन, उत्पादक देशों के विकास में अपना योगदान देते रहें।
इस कार्यक्रम में अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के लोगों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य एडीपीए की दो दशकों की यात्रा का उत्सव मनाना था। सत्रों के दौरान एडीपीए सस्टेनेबल डायमंड स्टैंडर्ड और एडीपीए बिजनेस काउंसिल पर चर्चा हुई। इसके साथ ही, स्थिरता और ऑडिट प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा, प्राकृतिक हीरों की अखंडता की रक्षा, उद्योग की वकालत, बाजार में अलग पहचान बनाने और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने जैसे विषयों पर भी बातचीत हुई।
एडीपीए मंत्रिपरिषद की 13वीं असाधारण बैठक 20वीं वर्षगांठ समारोह के साथ आयोजित की गई थी। इसमें भारत के 'जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल' (जीजेईपीसी) और एडीपीए के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी गई। इस एमओयू का उद्देश्य भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग तथा अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इसमें हीरा छंटाई, मूल्यांकन और विनिर्माण के क्षेत्रों में क्षमता विकास और कौशल विकास, तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान, तथा पूरी हीरा मूल्य शृंखला में व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देना शामिल है।
लुवांडा में होने वाली चर्चाएं नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 'केपी प्लेनरी' (KP Plenary) की तैयारियों को आगे बढ़ाएंगी। यह कार्यक्रम 30 नवंबर से 4 दिसंबर 2026 तक 'भारत मंडपम' में होगा। केपी प्लेनरी से पहले 29 नवंबर 2026 को 'नई दिल्ली डायमंड डायलॉग' (केपी फोरम) आयोजित किया जाएगा, और इससे जुड़े अन्य कार्यक्रम 5 दिसंबर 2026 तक चलेंगे। भारत तीसरी बार केपी प्लेनरी की मेजबानी करेगा; इससे पहले भारत 2008 और 2019 में भी इसकी अध्यक्षता कर चुका है।
किम्बरली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम (केपीसीएस) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 55/56 (2000) के अंतर्गत स्थापित किया गया था। यह अंतरराष्ट्रीय पहल है। इसका उद्देश्य 'कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स' (संघर्ष वाले क्षेत्रों से आए हीरे) को वैध कच्चे हीरे के व्यापार में शामिल होने से रोकना है। केपी त्रि-पक्षीय ढांचे के माध्यम से काम करता है, जिसमें सरकारें, हीरा उद्योग और नागरिक समाज शामिल हैं। वर्तमान में इसमें 60 प्रतिभागी हैं जो 86 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देश एकल इकाई के रूप में भाग लेते हैं। किम्बरली प्रोसेस की अध्यक्षता इसके सदस्य देशों के बीच हर साल बदलती रहती है, और भारत ने 1 जनवरी 2026 को इसकी अध्यक्षता संभाली है।
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पीके/केसी/आरटी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2333269)
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