श्रम और रोजगार मंत्रालय
भोपाल, मध्य प्रदेश में श्रम संहिताओं, श्रम कल्याण और सामाजिक सुरक्षा पर जिला-स्तरीय क्षमता-निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम "श्रम संवाद" आयोजित किया गया
प्रविष्टि तिथि:
29 OCT 2026 12:37PM by PIB Delhi
भोपाल, मध्य प्रदेश में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (एमओएलई) और मध्य प्रदेश सरकार के श्रम विभाग द्वारा संयुक्त रूप से 'श्रम संवाद' नामक एक जिला-स्तरीय क्षमता-निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम 28 अक्टूबर, 2026 को आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम श्रम संहिताओं श्रम कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित था।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य नियोक्ताओं तथा एचआर, कानूनी और वित्त पेशेवरों के बीच चार श्रम संहिताओं और उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। इसके अलावा श्रम सुधारों को लागू करने के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करने, श्रम कल्याण और सामाजिक सुरक्षा पहलों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने तथा केंद्र-राज्य समन्वय और हितधारकों की भागीदारी को सुगम बनाने पर भी केंद्रित था।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त रूप से मध्य प्रदेश सरकार के श्रम सचिव श्री रघुराज राजेंद्रन और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (एमओएलई) के उप सचिव श्री गोविंद राम ने की। कार्यक्रम में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार के श्रम विभाग, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) और श्रम कल्याण महानिदेशालय (डीजीएलडब्ल्यू) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ नियोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि और एचआर, कानूनी तथा वित्त पेशेवर भी शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों को श्रम संहिताओं, नियोक्ताओं के लिए कानूनी अनुपालन आवश्यकताओं और भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
मध्य प्रदेश सरकार के श्रम सचिव श्री रघुराज राजेंद्रन ने अपने उद्घाटन भाषण में हितधारकों की जागरूकता, अनुपालन की तैयारी और नए श्रम कानून ढांचे के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने श्रम संहिता को लागू करने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा की गई पहलों के बारे में विस्तार से बताया।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (एमओएलइ) के उप सचिव, श्री गोविंद राम ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने श्रम संहिताओं की मुख्य विशेषताओं और उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने पहले तकनीकी सत्र का संचालन भी किया, जिसमें उन्होंने चारों श्रम संहिताओं, उनके उद्देश्यों और नए कानूनी ढांचे के माध्यम से लाए गए प्रमुख सुधारों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इस सत्र से प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिली कि श्रम कानून में किए गए ये सुधार, नियोक्ताओं और श्रमिकों दोनों के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं और इनका व्यापक दृष्टिकोण क्या है।
दूसरा तकनीकी सत्र, चारों श्रम संहिताओं और लागू केंद्रीय नियमों के तहत नियोक्ताओं के लिए जरूरी अनुपालन आवश्यकताओं पर केंद्रित था। तीसरा और चौथा सत्र क्रमशः 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' (पीएमवीबीआरवाई) और 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन' (पीएम-एसवाईएम) योजना पर केंद्रित था।
श्रम संहिता और लागू नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद के लिए, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने प्रतिभागियों के साथ 'नियोक्ताओं के लिए अनुपालन हैंडबुक' और 'अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का संग्रह' भी साझा किया। कार्यक्रम का समापन एक परस्पर संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को श्रम संहिता, अनुपालन आवश्यकताओं और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों के बारे में अपने सवाल पूछने और स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर मिला।
28 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 तक आयोजित 'श्रम संवाद' जागरूकता अभियान (जो श्रम संहिताओं पर केंद्रित था) के पहले चरण के दौरान, मंत्रालय ने सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 16 जिलों को कवर किया। मध्य प्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों की यह श्रृंखला, जिला स्तर पर नियोक्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और अनुपालन पेशेवरों को जोड़ने की दिशा में एक और कदम है।
यह पहल श्रम सुधारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, अनुपालन की तैयारियों को बेहतर बनाने, और रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने में केंद्र-राज्य समन्वय और हितधारकों की निरंतर भागीदारी के महत्व को दर्शाती है।
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पीके/केसी/आरटी/एचएन/एमयू
(रिलीज़ आईडी: 2330374)
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