पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सीएक्यूएम ने अमृतसर और तरनतारन में धान के पराली प्रबंधन उपायों की समीक्षा की


क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि धान की पराली के उपयोग के लिए सुविधाओं की समय पर उपलब्धता और इनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें

प्रविष्टि तिथि: 24 OCT 2026 6:53PM by PIB Delhi

एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष श्री राजेश वर्मा के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय टीम ने एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के लिए आज पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों के उपायुक्तों और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में धान की पराली के व्यापक प्रबंधन के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। साथ ही, पराली जलाने की घटनाओं को और अधिक नियंत्रित करने और पूरी तरह खत्म करने पर भी जोर दिया गया।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/oct/image001_20261024185443_dda78d.jpg 

टीम ने दोनों जिलों में धान की पराली के यथास्थान (खेत में ही) और स्थान के बाहर (खेत के बाहर) प्रबंधन, तथा इसके लिए उपलब्ध सुविधाओं और अवसंरचना की समीक्षा की। आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए दोनों जिलों द्वारा की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। टीम ने आग लगने की घटनाओं में हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताई और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भविष्य में इन घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें।

आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि ताप विद्युत् संयंत्र, ईंट-भट्ठों और ऐसे उद्योगों में, जहां ईंधन के रूप में धान की पराली का इस्तेमाल संभव है, वहां इसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने आगे निर्देश दिया कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे संबंधित क्षेत्रों/उद्योगों में धान की पराली का वास्तविक उपयोग सुनिश्चित करें, और नियमित रूप से इसकी निगरानी करके अनुपालन रिपोर्ट दें।

आयोग ने ज़मीनी स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप करने के महत्व पर ज़ोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गांवों और किसानों के पास नियमित रूप से जाएं। उन्हें न केवल पराली प्रबंधन सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में बताएं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि ज़रूरी मशीनरी और सुविधाएं किसानों तक समय पर पहुंच रही हैं। ज़िला प्रशासन से कहा गया है कि वे किसानों, किराये पर उपकरण लेने के केंद्र (सीएचसी), मशीनरी उपलब्ध कराने वालों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच तालमेल को मज़बूत करें, ताकि किसान बिना किसी देरी के अवशेष प्रबंधन के समाधानों का लाभ उठा सकें।

चूंकि तरनतारन ज़िले में धान की पराली जलाने की घटनाएं सबसे ज़्यादा सामने आ रही हैं, इसलिए उपायुक्त को निर्देश दिया गया कि वे इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और ऐसी घटनाओं को रोकने व उनके प्रबंधन के लिए ज़मीनी स्तर पर अपने प्रयासों को तेज़ करें। आयोग ने यह भी चेतावनी दी कि प्रभावी कदम उठाने में किसी भी तरह की लापरवाही या विफलता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और ज़िम्मेदारी तय की जाएगी।

इस दौरे के दौरान, उच्च-स्तरीय टीम ने अमृतसर में उन सुविधाओं का भी निरीक्षण किया, जहां धान की पराली का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा रहा है। टीम ने अमृतसर के एक औद्योगिक परिसर में लगे औद्योगिक भट्ठी (इंडस्ट्रियल बॉयलर) का दौरा किया, जहां धान की पराली से बने छर्रों (पैलेट्स) का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर किया जा रहा है। इस दौरे से धान के अवशेषों के व्यावहारिक उपयोग और ऐसे उपयोगी मॉडलों को बड़े पैमाने पर लागू करने की संभावनाओं को समझने का मौका मिला।

आयोग ने दोहराया कि धान की पराली के प्रबंधन को किसानों की सुविधा के नज़रिए से, अवशेष प्रबंधन और संसाधनों के उपयोग की एक व्यापक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि ज़िला प्रशासन और सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ठोस प्रयास करने चाहिए, ताकि उपलब्ध यथास्थान (खेत में ही) और स्थान के बाहर (खेत के बाहर) समाधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके, पराली को उपयोगी कार्यों में लगाया जा सके और धान की पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

***

पीके/केसी/आरटी/जेके/एसएस  


(रिलीज़ आईडी: 2328061) आगंतुक पटल : 52
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Tamil