नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026
दूसरे दिन की मुख्य बातें: राज्य नेतृत्व, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी और मिश्रित वित्तपोषण तंत्र
प्रविष्टि तिथि:
22 OCT 2026 7:26PM by PIB Delhi
एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन राज्य स्तर पर नीतिगत नेतृत्व, तकनीकी नवाचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और जलवायु वित्तपोषण समाधानों के क्षेत्रों में विभिन्न पक्षों के बीच सहयोग और संवाद को गति मिली।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट(आईआईएसडी) और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक विशेष मंत्रिस्तरीय सत्र में ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के ऊर्जा एवं कृषि मंत्रियों ने भाग लिया। इस सत्र में एग्रीवोल्टाइक के विस्तार में तेजी लाने के लिए राज्यों द्वारा अपनाई जा रही रणनीतियों को प्रस्तुत किया गया। इस सत्र में राज्यों को निवेश के अवसरों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान किया गया। इसमें भूमि उपयोग के अभिनव मॉडलों, राज्य स्तर पर टैरिफ प्रोत्साहनों तथा स्थानीय कृषि परिस्थितियों और फसल विविधता के अनुरूप पीएम-कुसुम योजना को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि एग्रीवोल्टाइक में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में राज्य एवं उप-राष्ट्रीय स्तर की सरकारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा ने एग्रीवोल्टाइक्स के लिए राज्य के विशाल कृषि आधार, विविध फसल प्रणालियों और विस्तारित हो रहे सौर ऊर्जा बुनियादी ढांचे को प्रमुख लाभ के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा उत्पादन से भूमि का बेहतर उपयोग होगा और किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत सृजित होगा। उत्तर प्रदेश में छत पर सौर पैनल लगाने और ग्रिड बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-III नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली के निर्बाध निकासी एवं पारेषण को और सुदृढ़ करेगा। उन्होंने राज्य में लगभग 80% कृषि भूमि वाले छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयुक्त वित्तपोषण मॉडल और प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता पर भी बल दिया। निवेशकों को इन अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित करते हुए उन्होंने कहा, "एग्रीवोल्टाइक्स की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। जो लोग एग्रीवोल्टाइक्स से जुड़ना चाहते हैं उन्हें उत्तर प्रदेश की ओर देखने की जरूरत है।" उन्होंने निवेशकों को ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली निकासी के लिए राज्य के समर्थन का भी आश्वासन दिया।
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने राज्य की उस योजना पर प्रकाश डाला, जिसके तहत बिजली बिल माफ किए गए सभी 16 लाख कृषि नलकूपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने का लक्ष्य है। इस योजना को समर्पित ग्रिड बुनियादी ढांचे का समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने किसानों के भूमि स्वामित्व अधिकारों की रक्षा पर बल दिया और फसल चयन तथा एग्रीवोल्टाइक तकनीकों पर संरचित प्रशिक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों का उपयोग करके किसानों की क्षमता निर्माण करने और एग्रीवोल्टाइक तकनीकों को कृषि विविधीकरण तथा मौजूदा किसान-सहायता पहलों के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव रखा। राज्य की अर्थव्यवस्था में किसानों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश की कृषि और उसके किसान एक तरह से हमारी आर्थिक व्यवस्था की जीवनरेखा हैं।” उन्होंने किसानों को यह भी आश्वासन दिया कि उनकी भूमि का स्वामित्व सुरक्षित रहेगा।
मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने किसानों के कल्याण के लिए राज्य द्वारा किए जा रहे प्रयासों के तहत एग्रीवोल्टाइक्स, सौर ऊर्जा के विस्तार और बैटरी भंडारण को बढ़ावा देने की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर सौर पैनलों के नीचे खेती शुरू हो चुकी है और राज्य बैटरी भंडारण परियोजनाओं में प्रगति कर रहा है, जिनके लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने ओंकारेश्वर परियोजना सहित मध्य प्रदेश के व्यापक नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना पर भी प्रकाश डाला। एग्रीवोल्टाइक्स में राज्य की प्रगति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “कृषि क्षेत्र में हमारे कुछ संयंत्र हैं जहां सौर पैनलों के नीचे खेती की जाती है। मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर ऐसी परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं और हम इस दिशा में निरंतर प्रगति कर रहे हैं, जिसमें बैटरी भंडारण भी शामिल है, जिसके लिए हमने निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है।”
बिहार के ऊर्जा मंत्री श्री शैलेश कुमार मंडल ने फीडर पृथक्करण और सौर ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से कृषि विद्युत अवसंरचना को मजबूत करने के राज्य के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बिहार ने लगभग 2,700 कृषि फीडरों पर काम में प्रगति की है और राज्य सरकार ने इनके सौर ऊर्जा उपयोग के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी बिहार में सौर ऊर्जा के प्रति लंबे समय से चली आ रही जागरूकता और नवीकरणीय ऊर्जा की पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “बिहार में सौर ऊर्जा और सूर्य का प्रकाश कोई नई अवधारणा नहीं हैं; यह परंपरा वहां सदियों से चली आ रही है।” उन्होंने अभिनव दृष्टिकोण के माध्यम से कृषि फीडरों के सौर ऊर्जा उपयोग को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने एग्रीवोल्टाइक्स तकनीकों को किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधता को बढ़ावा देने और ग्रामीण रोजगार सृजन के अवसर के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कृषि संस्थानों, वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा उद्यमों के सहयोग से अनुसंधान, किसान जागरूकता और प्रशिक्षण को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने एग्रीवोल्टाइक्स तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाने और लागू करने के अवसर के रूप में बिहार के देश के कार्यबल में योगदान को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, “बिहार से बड़ी संख्या में श्रमिक आते हैं और वे देश भर के कार्यबल में योगदान देते हैं। कई राज्य बिहार के इस कार्यबल पर निर्भर हैं।”
ओडिशा के उपमुख्यमंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव ने घोषणा की कि राज्य अपनी समर्पित एग्रीवोल्टाइक्स नीति 2026 को अंतिम रूप दे रहा है। इसके तहत वर्ष 2030 तक 1 गीगावाट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित नीति के तहत परियोजना स्थलों का कम से कम 90% कृषि योग्य रहना अनिवार्य होगा, किसानों की सहमति और फसल बीमा सुनिश्चित किया जाएगा, और किसानों को परियोजनाओं का स्वामित्व रखने या खेती जारी रखते हुए अपनी भूमि पट्टे पर देने की अनुमति दी जाएगी। निवेश आकर्षित करने के लिए, ओडिशा सरकार ग्रिडको के माध्यम से 25 वर्षीय बिजली खरीद समझौते (पीपीए), ग्रिड कनेक्टिविटी और निवेश प्रोत्साहन प्रदान करने की योजना बना रही है। निवेशकों के लिए इस नीति के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “यह नीति निवेशकों को निश्चितता प्रदान करती है: ग्रिडको के साथ 25 वर्षों का पीपीए, बिजली खरीद की गारंटी, ग्रिड कनेक्टिविटी तथा ओपन एक्सेस और प्रतिस्पर्धी उपयोग की स्वतंत्रता।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि ओडिशा सरकार अपनी समर्पित एग्रीवोल्टाइक्स नीति 2026 को अंतिम रूप दे रही है, जिससे राज्य सरकार एग्रीवोल्टाइक्स के लिए एक विशिष्ट नीतिगत ढांचा स्थापित करने की स्थिति में आ जाएगी।
एग्रीवोल्टाइक्स पिच-हब का आयोजन नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (एनएसईएफआई) द्वारा किया गया। इसमें शुरुआती चरण के नवोन्मेषकों और स्टार्ट-अप्स ने राष्ट्रीय संस्थानों (एनआईएसई, एनआईबीई), वेंचर कैपिटलिस्टों और उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष व्यवहार्य वित्तपोषण योग्य, कृषि एवं सौर ऊर्जा के दोहरे उपयोग वाले समाधान प्रस्तुत किए।
फ्राउनहोफर आईएसई और सनसीड एपीवी ने अगली पीढ़ी के समाधानों का प्रदर्शन किया, जिनमें उन्नत सौर ट्रैकिंग सिस्टम, गतिशील पैनल टिल्टिंग, अर्ध-पारदर्शी फोटोवोल्टाइक (पीवी) मॉड्यूल और उष्णकटिबंधीय और शुष्क परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से इंजीनियर किए गए सूक्ष्म-जलवायु मृदा सेंसर शामिल हैं।
इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित इस संवाद में एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी, फर्स्ट सोलर और प्रमुख यूरोपीय फर्मों सहित भारतीय और अंतरराष्ट्रीय डेवलपर्स एक साथ आए और आपूर्ति श्रृंखला के स्थानीयकरण, मानकों के विकास और बाजार की निश्चितता पर चर्चा की।
एक कार्यकारी गोलमेज सम्मेलन में विश्व बैंक, केएफडब्ल्यू, यूरोपीय निवेश बैंक और आईआरईडीए सहित बहुपक्षीय विकास बैंकों, वित्तीय संस्थानों और वाणिज्यिक ऋणदाताओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया।
प्रतिभागियों ने एग्रीवोल्टाइक्स के विकास में तेजी लाने के लिए आवश्यक वित्तीय तंत्रों की जांच की, जिसमें जोखिम कम करने के साधन, रियायती ऋण सुविधाएं और बड़े पैमाने पर निजी निवेश जुटाने में सक्षम मिश्रित वित्त संरचनाएं शामिल हैं।
वैश्विक मंच पर युवाओं के दृष्टिकोण को प्रमुखता देते हुए, प्रख्यात अभिनेत्री और यूएनडीपी इंडिया की यूथ चैंपियन संजना सांघी ने एक विशेष अनौपचारिक संवाद सत्र के लिए सम्मेलन में भाग लिया। सांघी ने युवाओं के नेतृत्व में सामुदायिक स्तर पर रणनीतियां विकसित करने की पैरवी की और खाद्य सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बीच के अंतर्संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एग्रीवोल्टाइक्स संयुक्त राष्ट्र के अनेक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में योगदान देती है। साथ ही, यह ग्रामीण युवाओं को सीधे तौर पर सशक्त बनाने और उनकी आजीविका सुरक्षित करने में भी मदद करती है।
दिन का समापन एक संवादात्मक डिजिटल पोस्टर गैलरी के साथ हुआ, जिसमें संचालित एग्रीवोल्टाइक्स परियोजनाओं और वैश्विक केस स्टडी से प्राप्त सीख को प्रदर्शित किया गया। इस गैलरी ने प्रतिभागियों को इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन और उनके विस्तार की रणनीतियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।
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पीके/केसी/आरटी/जीके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2326964)
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