नीति आयोग
azadi ka amrit mahotsav

नीति आयोग के ‘फ्रंटियर टेक हब’ ने राज्यों को सतत विकास की योजना बनाने में मदद करने हेतु ‘डेटा सेंटर मूल्यांकन फ्रेमवर्क’ प्रस्तुत किया


इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य राज्यों को डेटा-सेंटर में निवेश आकर्षित करने के चरण से आगे बढ़कर निवेश के लिए तैयार बुनियादी ढांचा विकसित करने, महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा करने और दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य को अधिकतम करने में मदद करना है

प्रविष्टि तिथि: 15 OCT 2026 3:55PM by PIB Delhi

नीति आयोग के ‘फ्रंटियर टेक हब’ ने 14 अक्टूबर 2026 को ‘डेटा सेंटर मूल्यांकन फ्रेमवर्क’ जारी किया है। इसका उद्देश्य राज्यों को डेटा सेंटरों के टिकाऊ विकास की योजना बनाने में मदद करना है। इस फ्रेमवर्क को नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर; नीति आयोग के सीईओ श्री अनुराग जैन; नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष; विद्युत मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) तथा वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ उद्योग जगत और मीडिया के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जारी किया गया।

उद्योग जगत, एमईआईटीवाई, विद्युत मंत्रालय और डीपीआईआईटी के इनपुट से तैयार किया गया, यह फ्रेमवर्क राज्य सरकारों को डेटा-सेंटर में निवेश की योजना बनाने, उसका मूल्यांकन करने और उसे सुविधाजनक बनाने हेतु एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह उन्हें बुनियादी ढांचे की तैयारियों का आकलन करने, महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा करने और दीर्घकालिक आर्थिक व रणनीतिक मूल्य को अधिकतम करने में मदद करता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग, हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग और डेटा-प्रधान डिजिटल अनुप्रयोगों की बढ़ती मांग के कारण, भारत की डेटा-सेंटर संबंधी क्षमता 2020 में लगभग 375 मेगा वाट से बढ़कर वर्तमान में लगभग 1.5 गीगा वाट हो गई है।

अब जबकि भारत अपने एआई और डिजिटल बदलाव की गति को बढ़ा रहा है, डेटा सेंटर देश की तकनीकी एवं आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को आधार प्रदान करने वाले एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में उभर रहे हैं। जहां यह एक बड़ा अवसर है, वहीं बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित करने से बिजली, पानी, जमीन, कनेक्टिविटी और स्थानीय बुनियादी ढांचे पर भी भारी दबाव पड़ रहा है। इसलिए अब केवल निवेश आकर्षित करने पर ही नहीं, बल्कि इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि ये परियोजनाएं ऐसी जगहों पर विकसित हों जहां जरूरी बुनियादी ढांचा और संसाधन लंबे समय तक इनका समर्थन कर सकें।

भारत सरकार ने डेटा-सेंटर में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें भारत में स्थित डेटा-सेंटर के बुनियादी ढांचे का उपयोग करने वाले पात्र विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को 2047 तक कर से छूट देना भी शामिल है। जैसे-जैसे निवेश का दायरा बढ़ेगा, इस क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित करने हेतु राज्य-स्तर पर प्रभावी योजना बनाना और निवेश के लिए पूरी तरह तैयार रहना बेहद महत्वपूर्ण होगा।

इस अवसर पर बोलते हुए, नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने भारत की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने हेतु डेटा-सेंटर में निवेश का लाभ उठाने के अवसर पर प्रकाश डाला। उन्होंने घरेलू अनुसंधान एवं विकास, उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच सहयोग, और डेटा-सेंटर तकनीक की मूल्य श्रृंखला में भारतीय भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत उन्नत कूलिंग, ऊर्जा दक्षता और संसाधन की दृष्टि से कुशल कंप्यूटिंग के क्षेत्र में ऐसे नवीन समाधान विकसित कर सकता है, जिससे बुनियादी ढांचे में किए गए निवेश को दीर्घकालिक आर्थिक एवं तकनीकी मूल्य में बदला जा सके।

नीति आयोग के सीईओ श्री अनुराग जैन ने इस बात पर जोर दिया कि राज्यों को केवल निवेश आकर्षित करने से आगे बढ़कर निवेश के लिए तैयार होने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि डेटा-सेंटर परियोजनाओं को समर्थन देने का वादा करने से पहले, राज्यों को बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, संसाधनों की जरूरत और आर्थिक लाभों का आकलन कर लेना चाहिए। यह फ्रेमवर्क राज्यों को उपयुक्त निर्णय लेने, संभावित बाधाओं का पहले से अनुमान लगाने और बिना किसी अतिरिक्त विनियमन का बोझ डाले, परियोजनाओं को तेज गति और सुचारू रूप से पूरा करने में मदद करने हेतु एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करता है।

नीति आयोग की विशिष्ट फेलो सुश्री देबजानी घोष ने कहा, “अब जबकि एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वरूप को तेजी से बदल रहा है, डेटा सेंटर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बुनियादी ढांचा बनते जा रहे हैं। भारत के लिए, अवसर केवल निवेश आकर्षित करने का ही नहीं है, बल्कि एक ऐसी टिकाऊ क्षमता विकसित करने का है जो हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करे और दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य प्रदान करे। यह फ्रेमवर्क राज्यों को बेहतर निर्णय - जैसे कि सही स्थानों की पहचान करना, मांग आने से पहले ही बुनियादी ढांचे की योजना बनाना, और हर निवेश से जनता को पर्याप्त लाभ मिलना सुनिश्चित करने - में मदद करेगा।”

निवेश के लिए तैयार और डेटा सेंटर के टिकाऊ विकास का एक फ्रेमवर्क

यह फ्रेमवर्क पांच स्तंभों पर आधारित है: बिजली एवं ऊर्जा; पानी एवं कूलिंग; स्थान का चयन एवं पर्यावरणीय स्थिरता; आर्थिक एवं रणनीतिक मूल्य; और नीति, शासन एवं कार्यान्वयन।

संसाधनों की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु, कुछ प्रमुख सुझावों में शामिल हैं: ग्रिड की तैयारी और ग्रिड से ली जाने वाली बिजली (नेट ग्रिड ड्रॉ) का आकलन करना, नवीकरणीय ऊर्जा एवं  भंडारण-आधारित बिजली को बढ़ावा देना, तथा बेसिन-स्तर पर पानी की कमी और सार्वजनिक जलापूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करना। इस फ्रेमवर्क में वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग), मौके पर ही जल शोधन एवं भंडारण, और ई-कचरे, बैटरी एवं अन्य खतरनाक कचरे के लिए उनके पूरे जीवन-चक्र से जुड़ी योजनाएं बनाने पर भी जोर दिया गया है।

आर्थिक मूल्य को अधिकतम करने हेतु, यह फ्रेमवर्क उपयुक्त डेटा-सेंटर जोन की पहचान करने, कोलोकेशन तथा एक्टिव कंप्यूट सेवाओं के बीच अंतर करने, राज्य के प्रोत्साहनों को वास्तविक परिणामों से जोड़ने, और आईटी तथा गैर-आईटी बुनियादी ढांचे में 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने की सिफारिश करता है। इन उपायों को समयबद्ध मंजूरियों, स्पष्ट जवाबदेही और परियोजना संबंधी प्रतिबद्धताओं की निगरानी के जरिए समर्थन प्रदान किया गया है।

यह फ्रेमवर्क राज्य सरकारों के लिए निर्णय प्रक्रिया में एक सहायक उपकरण के रूप में काम करेगा। इसके जरिए वे बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक मूल्य और कार्यान्वयन की तैयारी के आधार पर निवेश के प्रस्तावों का मूल्यांकन कर सकेंगी। संभावित बाधाओं की समय रहते पहचान करके और परियोजना की आवश्यकताओं के बारे में अधिक स्पष्टता प्रदान करके, इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य निवेश संबंधी निर्णयों को बेहतर बनाना, कार्यान्वयन से जुड़े जोखिमों को कम करना और भारत के डेटा-सेंटर इकोसिस्टम के सतत विकास को बढ़ावा देना है।

इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य राज्यों को बेहतर योजना बनाने, तेजी से आगे बढ़ने और डेटा-सेंटर में निवेश की अगली लहर को टिकाऊ क्षमता तथा दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य में बदलने में मदद करना भी है। 

फ्रेमवर्क यहां देखें: https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2026-10/Data-Centre-Evaluation-Framework-to-Help-States-Plan-for-Sustainable-Growth.pdf

****

पीके/केसी/आरटी/आर /डीके


(रिलीज़ आईडी: 2324021) आगंतुक पटल : 113
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu