विधि एवं न्याय मंत्रालय
सरकार ने हॉटस्पॉट जिलों में लंबित आपराधिक मकदमों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों को एकजुट किया
प्रविष्टि तिथि:
14 OCT 2026 8:43PM by PIB Delhi
जिला एवं अधीनस्थ न्यायपालिका में लंबित मामलों की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय ने उन हॉटस्पॉट जिलों की पहचान कर केंद्रित रूप से कार्रवाई करने का निर्णय लिया है जहाँ ऐसे मामलों की संख्या बहुत अधिक है। तदनुसार, केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल के मार्गदर्शन में, विभाग ने ज्यादा लंबित मुकदमों वाले शीर्ष 100 न्यायिक जिलों को लक्षित करते हुए एक देशव्यापी, अनुसंधान-आधारित मिशन शुरू किया है। देश भर की अदालतों में 5.8 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से अधिकांश जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में हैं। इसके अलावा, पहचाने गए ये 100 जिले जिला न्यायालयों में कुल लंबित मामलों के आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।
इसी पहल के तहत सोलह राज्यों के उन्नीस राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई थी। इसकी अध्यक्षता कानून एवं न्याय केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने की।
न्याय विभाग के सचिव, महानिदेशक (अवार्ड्स), पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआर एंड डी) के महानिदेशक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के महानिदेशक और अन्य अधिकारी भौतिक रूप से बैठक में उपस्थित रहे।
चर्चा के दौरान अप्रासंगिक मामलों की पहचान, मामलों की रूपरेखा तैयार करने, वैकल्पिक विवाद निवारण, तारीखें टालने के प्रबंधन, प्ली बार्गेनिंग, मध्यस्थता द्वारा निपटारे और समरी ट्रायल को अपनाने जैसे विभिन्न विकल्पों पर विचार-विमर्श किया गया। एनएलयू को यह सुझाव भी दिया गया कि वे चयनित जिलों में लंबित मामलों के ज़मीनी स्तर के विश्लेषण के लिए अपने प्रो-बोनो क्लबों, शोधकर्ताओं और छात्रों का प्रभावी ढंग से उपयोग करें और इस समस्या से निपटने के लिए संभावित रणनीतियों का सुझाव दें। आगे की राह के रूप में एनएलयू से अनुरोध किया गया कि वे इन 100 जिलों के लिए जिला-विशिष्ट कारणों का पता लगाकर एक केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करें और देरी के मुख्य कारणों की पहचान करें। उनसे मुकदमों की पेंडेंसी को कम करने के लिए व्यावहारिक तंत्र का सुझाव देने का भी अनुरोध किया गया। एनएलयू के सभी कुलपतियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी और राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी तत्परता का आश्वासन दिया।
श्री अर्जुन राम मेघवाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को दोहराते हुए अपनी बात समाप्त की, जिसके लिए एक सुलभ, कुशल, किफ़ायती, निष्पक्ष, त्वरित और उत्तरदायी न्याय प्रणाली का होना अत्यंत आवश्यक है।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2323633)
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