विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
डॉ जितेंद्र सिंह और यूनाइटिड किंगडम (यूके) के मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने परिषद की आठवीं बैठक में भारत-यूके विज्ञान और नवाचार सहयोग को आगे बढ़ाया
डॉ जितेंद्र सिंह और जोनाथन रेनॉल्ड्स ने नई दिल्ली में बीआरआईसी-सीडीएफडी-ओएनटी इंडिया जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सिलेंस का उद्घाटन किया
भारत-यूके साझीदारी उद्योग के नेतृत्व में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी के उपयोग और व्यवसायीकरण पर केंद्रित
एआई, क्वांटम प्रौद्योगिकियां, उन्नत मैटेरियल, जैवप्रौद्योगिकी, दूरसंचार, शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्रौद्योगिकियां सहयोग के दायरे में
जलवायु विज्ञान, भूवैज्ञानिक खतरों, स्वास्थ्यसेवा और मूल विज्ञान में ज्यादा गहरे सहयोग की संभावना
प्रविष्टि तिथि:
12 OCT 2026 4:48PM by PIB Delhi
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में व्यवसाय, नवाचार, विज्ञान और व्यापार के लिए यूके के मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स के साथ भारत-ब्रिटेन विज्ञान और नवाचार परिषद (एसआईसी) की आठवीं बैठक में भाग लिया।
बैठक में विज्ञान और नवाचार में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही अनुसंधान साझीदारियों को मजबूत करने, उभरती प्रौद्योगिकी में सहयोग तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो अजय सूद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो उमेश वाघमारे, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ श्रीनिवास कुमार तुम्मला, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ शिवकुमार कल्याणरमण और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव डॉ राजेश पाठक के साथ ही संबंधित विभागों और संस्थानों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
यूके के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 'व्यापार, नवाचार और व्यापार' के सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट, जोनाथन रेनॉल्ड्स एमपी ने किया। इस प्रतिनिधिमंडल में भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त सुश्री लिंडी कैमरन, भारत में उप उच्चायुक्त मि. बेन मेलर, व्यापार, नवाचार और व्यापार विभाग की अंतरिम स्थायी सचिव एमएस. अमांडा ब्रूक्स, महामहिम के व्यापार आयुक्त मि. हरजिंदर कांग, और व्यापार, नवाचार और व्यापार विभाग के अंतर्राष्ट्रीय निदेशक मि. राइस बोवेन के साथ ही यूके के विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम के अन्य प्रतिनिधि शामिल थे।
डॉ जितेंद्र सिंह और जोनाथन रेनॉल्ड्स ने इस अवसर पर संयुक्त रूप से बीआरआईसी-सीडीएफडी-ओएनटी इंडिया जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सिलेंस का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव तथा जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद के महानिदेशक डॉ राजेश एस गोखले बीआरआईसी-सीडीएफडी के निदेशक प्रो उल्लास कोल्थुर-सीतारामय तथा ऑक्सफोर्ड नैनोपोर टेक्नोलॉजीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी श्री निक केहर भी उपस्थित थे।
परिषद का व्यापक सहयोग एजेंडा भारत-यूके अनुसंधान एवं नवाचार समझौता ज्ञापन, प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल और 'भारत-यूके विजन 2035' पर आधारित है। ये फ्रेमवर्क वैज्ञानिक प्रगति और अनुसंधान को व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों एवं अनुप्रयोगों में बदलने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और नवाचारों के बीच सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण जुड़ाव के महत्वपूर्ण क्षेत्र बने हुए हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का 'इनोवेट यूके' के साथ सहयोग संयुक्त औद्योगिक अनुसंधान और विकास परियोजनाओं का समर्थन करता है, जिनका उद्देश्य नई बौद्धिक संपदा, प्रौद्योगिकियों, प्रक्रियाओं और प्रोटोटाइप को विकसित करना है। इस कार्यक्रम के तहत उन्नत विनिर्माण, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और नेट-ज़ीरो प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सहायता के लिए आठ परियोजनाओं पर सहमति बनी है, जो वर्तमान में कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
यह सहयोग कृत्रिम मेधा (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टरों, महत्वपूर्ण खनिजों, उन्नत सामग्रियों, जैव प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और नेट-ज़ीरो प्रौद्योगिकियों सहित उभरती और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों तक विस्तृत है। ये क्षेत्र पूरक अनुसंधान क्षमताओं का लाभ उठाने, नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा औद्योगिक और सामाजिक अनुप्रयोगों वाली प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं।
भारत और यूके के संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान में रोगाणुरोधी प्रतिरोध, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु और मौसम विज्ञान, भूवैज्ञानिक-खतरों, उन्नत विनिर्माण तथा मूल विज्ञान भी शामिल हैं। मौसम और जलवायु विज्ञान में सहयोग के अंतर्गत दक्षिण एशियाई मानसून से जुड़े प्राकृतिक खतरों, उन्नत मॉडलिंग क्षमताओं और जोखिम-आधारित पूर्वानुमान पर अनुसंधान शामिल है।
इस बैठक में निरंतर संस्थागत जुड़ाव और अनुसंधान, उद्योग तथा नवाचार इकोसिस्टम के बीच घनिष्ठ संबंधों के महत्व की पुष्टि की गई। भारत-यूके का निरंतर सहयोग वैज्ञानिक खोजों को आगे बढ़ाने, अनुसंधान को मजबूत करने और वैज्ञानिक क्षमताओं को साझा चुनौतियों के व्यावहारिक समाधानों में बदलने में मदद कर सकता है।




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पीके/केसी/आरटी/एसके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2322475)
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