पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
आईआईटीएम पुणे ने “एपीएआरसी अर्ली करियर वर्कशॉप” और ईएसटीआईसी के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम का आयोजन किया
प्रविष्टि तिथि:
11 OCT 2026 5:58PM by PIB Delhi
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे ने आज मेघदूत हॉल में "द ईसीआर नेक्सस: कनेक्टिंग वॉयसेस, टूल्स, एंड साइंस टू सोसाइटी" शीर्षक से अर्ली करियर रिसर्चर (ईसीआर) कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) के पूर्वावलोकन कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माननीय सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार ने सम्मेलन का मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सम्मेलन की मूल दृष्टि और रणनीतिक उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। अपने आरंभिक भाषण में उन्होंने भारत के भविष्योन्मुखी विकास को गति देने और अनुसंधान एवं नवाचार के लिए एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति के महत्वपूर्ण समन्वय पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्रालय ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक क्षेत्रों को आगे बढ़ाने और शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं के लिए सहयोगात्मक मंच तैयार करने की अपनी निरंतर प्रतिबद्धता पर बल दिया। ईएसटीआईसी के प्राथमिक लक्ष्यों को उजागर करते हुए, डॉ. श्रीनिवास कुमार के संबोधन ने हितधारकों को उभरती तकनीकी सफलताओं का लाभ उठाकर सतत राष्ट्रीय प्रगति की दिशा में काम करने का आह्वान किया। इस प्रारंभिक संबोधन ने सम्मेलन के लिए ज़बरदस्त उत्साह पैदा किया है और परिवर्तनकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी पहलों पर गहन चर्चा का वादा किया है।
कार्यक्रम की मुख्य बातें:
-
उद्घाटन समारोह: आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र ए. राव ने स्वागत भाषण दिया। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक आयोजन समिति (एसओसी) के प्रतिनिधियों—डॉ. इनेस ट्रिट्शर (एपार्क कार्यालय की निदेशक, जूलिच, जर्मनी), डॉ. जोनाथन एस. राइट (सिंघुआ विश्वविद्यालय, बीजिंग) और डॉ. हिंदुमति पलानिसामी (डब्ल्यूसीआरपी, डब्ल्यूएमओ, जिनेवा, स्विट्जरलैंड)—ने भी स्वागत संबोधन दिया। डॉ. सुवर्णा फडणवीस (एसओसी एवं परियोजना निदेशक, सीसीसीआर, आईआईटीएम) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यशाला का विवरण सत्र संयोजक डॉ. अदिति मोदी ने दिया।
-
मुख्य व्याख्यान एवं विशेषज्ञ पैनल: मैरीलैंड विश्वविद्यालय की डॉ. मारिया मोलिना ने पृथ्वी विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर मुख्य भाषण दिया। एक संवादात्मक पैनल चर्चा में अकादमिक जगत के भीतर और बाहर करियर के विभिन्न अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें एनवीडिया, विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम (डब्ल्यूसीआरपी/डब्ल्यूएमओ), लॉरेंस लिवरमोर राष्ट्रीय प्रयोगशाला, टोक्यो विश्वविद्यालय और जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संगठनों के वैश्विक विशेषज्ञों ने भाग लिया।
-
तकनीकी सत्र और प्रशिक्षण: प्रतिभागियों ने प्रमुख विषयगत प्राथमिकताओं पर केंद्रित व्यावहारिक समूह चर्चा और विचार-मंथन सत्रों में भाग लिया। इसके अलावा, नेचर पोर्टफोलियो और स्प्रिंगर नेचर के प्रतिनिधियों के साथ ‘संपादकों से मिलिए’ नामक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। डॉ. बिर्गिट हास्लर के समन्वय में पृथ्वी प्रणाली मॉडल मूल्यांकन उपकरण (ईएसएमवैलटूल) पर एक विस्तृत तकनीकी प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया।
-
वैश्विक सहभागिता: यंग अर्थ सिस्टम साइंटिस्ट्स (वाईईएसएस) समुदाय ने शुरुआती करियर के शोधकर्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग के अवसरों पर प्रस्तुति दी। इस कार्यशाला का उद्देश्य वायुमंडलीय एवं पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में शोधकर्ताओं की नई पीढ़ी के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, कौशल विकास को प्रोत्साहित करना और विभिन्न विषयों के बीच संवाद को मजबूत करना था।
ईएसटीआईसी के बारे में
उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी) भारत का प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच है। यह विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग को बढ़ावा देने, अत्याधुनिक अनुसंधान को प्रदर्शित करने और राष्ट्रीय चुनौतियों के लिए नवोन्मेषी समाधानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी मंत्रालयों, नीति निर्माताओं, शीर्ष वैज्ञानिकों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगपतियों और डीप-टेक स्टार्टअप्स को एक साथ लाता है, जिससे भारत को 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जा सके।
ईएसटीआईसी 2026 का उद्देश्य "रचनात्मक सोच, विज्ञान को उत्प्रेरित करना, प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाना" है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह पहल वैज्ञानिक प्रतिभाओं को एक साथ लाती है, युवा नवप्रवर्तकों को प्रेरित करती है और वैज्ञानिक उत्कृष्टता एवं तकनीकी उन्नति की दिशा में भारत की प्रगति को सुदृढ़ करती है। संस्थानों और क्षेत्रों के बीच पारंपरिक बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित इस बहु-दिवसीय सम्मेलन में उच्च स्तरीय पूर्ण सत्र, विषयगत तकनीकी सत्र और प्रदर्शनियाँ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य तकनीकी आत्मनिर्भरता और सतत राष्ट्रीय प्रगति की दिशा में भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है।
एपीएआरसी अर्ली करियर रिसर्चर (ईसीआर) कार्यशाला 2026 के बारे में
एपीआरसी जनरल असेंबली 2026 से पहले, 11 अक्टूबर 2026 को आईआईटीएम, पुणे में "द ईसीआर नेक्सस: कनेक्टिंग वॉयसेस, टूल्स, एंड साइंस टू सोसाइटी" शीर्षक से एपीआरसी अर्ली करियर रिसर्चर (ईसीआर) कार्यशाला 2026 का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विशेष रूप से छात्रों और अर्ली करियर रिसर्चर्स के लिए तैयार की गई थी, जिसका उद्देश्य करियर विकास, उभरते वैज्ञानिक उपकरणों, अनुसंधान चुनौतियों, वैज्ञानिक संचार और अंतरराष्ट्रीय वायुमंडलीय और जलवायु अनुसंधान समुदाय के साथ अधिक जुड़ाव के अवसरों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करना था।
इस कार्यशाला में लगभग 120 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें नवोदित करियर शोधकर्ता, वरिष्ठ वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, संपादक और विभिन्न वैज्ञानिक और संस्थागत पृष्ठभूमि के पेशेवर एक साथ आए।
इस कार्यक्रम को शोधकर्ताओं के करियर के शुरुआती चरणों में आने वाली वैज्ञानिक और व्यावसायिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किया गया था। करियर के विभिन्न अवसरों पर आयोजित पैनल चर्चा में अकादमिक जगत के भीतर और उससे बाहर करियर की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, बदलते वित्तपोषण परिदृश्य, शोधकर्ताओं की आवाजाही, अनुसंधान अवसंरचना एवं कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच, अंतरराष्ट्रीय अवसरों और वैज्ञानिक नेतृत्व तक पहुंचने के मार्गों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य नवोदित शोधकर्ताओं और स्थापित वैज्ञानिकों के बीच खुले संवाद को प्रोत्साहित करना था, साथ ही साथ उन्हें अपने समकक्षों के साथ अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करना था। पैनल चर्चा और विचार-मंथन सत्रों में वैज्ञानिक करियर के बदलते परिदृश्य पर विविध दृष्टिकोण सामने आए, जिनमें वित्तपोषण और गतिशीलता, डेटा और कंप्यूटिंग अवसंरचना तक असमान पहुंच, एआई/एमएल, नेतृत्व के अवसर और वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज और नीति से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की आवश्यकता शामिल है। इस कार्यक्रम को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, डब्ल्यूसीआरपी, डब्ल्यूएमओ, एपीएआरसी, फ़ोरेशेंग्सज़ेंट्रम जुलिच, जर्मनी, आईएएमएएस, आईसीएमए, नासा और निजी भागीदारों द्वारा प्रायोजित किया गया था।




***
पीके/केसी/आरटी/जीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2322018)
आगंतुक पटल : 67