राज्यसभा सचिवालय
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शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की "नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने" पर 382वीं रिपोर्ट संबंधी प्रेस विज्ञप्ति।

प्रविष्टि तिथि: 09 OCT 2026 5:33PM by PIB Delhi

श्री मुकुल वासनिक, संसद सदस्य, राज्य सभा की अध्यक्षता में विभाग-संबंधित शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 9 अक्तूबर, 2026 को उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय से संबंधित "राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार और सुदृढीकरण" विषय पर 382वाँ प्रतिवेदन माननीय सभापति, राज्य सभा को प्रस्तुत किया।

2. समिति ने 382वें प्रतिवेदन की तैयारी के दौरान उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय के सचिव; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अध्यक्ष; राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के महानिदेशक; डॉ. के. राधाकृष्णन, पूर्व सचिव, अंतरिक्ष विभाग एवं उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष तथा विभाग के अन्य प्रतिनिधियों के विचार सुने और विषय की विस्तृत जाँच की।

3. समिति ने 25 अगस्त, 2026 को आयोजित अपनी बैठक में इस प्रतिवेदन पर विचार किया और इसे स्वीकार किया। प्रतिवेदन में समिति द्वारा की गई समुक्तियाँ/सिफारिशें इसके साथ संलग्न हैं।

4. यह प्रतिवेदन निम्नलिखित लिंक पर भी उपलब्ध है:-     https://sansad.in/rs/committees/16?departmentally-related-standing-committees

382वाँ प्रतिवेदन

समिति की समुक्तियाँ और सिफारिशें

10.1 समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को अत्यंत महत्त्वपूर्ण दायित्व सौपा गया है। यह भारत के सभी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाओं - अन्य के साथ-साथ जेईई-मुख्य, नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और सीयूईटी - का आयोजन करती है और इसलिए उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है। कुल मिलाकर, एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ छात्र बैठते हैं। इसके अलावे नीट जैसी अखिल भारतीय परीक्षा के सफल संचालन के लिए संघ, राज्य और स्थानीय सरकार के स्तर पर विभिन्न विभागों में पूरे सरकार की सहभागिता की आवश्यकता होती है। इस प्रकार एनटीए के पास अत्यंत महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ है और उसे अनेक हितधारकों के साथ समन्वय का कार्य भी संभालना पड़ता है।

    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) लगातार विकसित हो रहा है और इसके संगठनात्मक ढांचे को इस प्रकार अंतिम रूप दिया जा सकता है कि एनटीए के संसाधन और जवाबदेही संरचनाएं उन उत्तरदायित्वों के अनुरूप हों जो इसे सौंपे गए हैं। ऐसा करते हुए, विभाग एक उपयुक्त संसदीय ढांचा लागू कर सकता है जो संसद के प्रति एनटीए की जवाबदेही सुनिश्चित करे।

10.2 समिति नोट करती है कि प्रश्न बैंकों में निवेश लंबी अवधि में पेपर लीक के विरुद्ध सबसे व्यावहारिक सुरक्षा उपाय है। प्रश्नों के एक ही सेट का बार-बार उपयोग या परीक्षकों द्वारा हर साल नए प्रश्न पत्र तैयार करवाने की प्रथा परीक्षा प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा के लिए एक जोखिम हो सकती है। इसलिए, समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को एक बड़े, विविध और निरंतर अद्यतन होने वाले प्रश्न बैंक के निर्माण में निवेश करना चाहिए, जिससे प्रश्न-सेटरों की अग्रिम जानकारी के बिना प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए प्रश्न लिए जा सकें। समिति नोट करती है कि सीबीटी प्रारूप में, प्रश्न पत्रों को अब मुद्रित करने और परीक्षा केंद्रों तक ले जाने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए, प्रश्न पत्रों को काफी समय पहले से तैयार करने की कोई बाध्यता नहीं है। तदनुसार, अंतिम प्रश्न पत्र परीक्षा के समय के बहुत करीब तैयार किए जाने चाहिए, जिसमें डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके प्रश्न बैंक से प्रश्न लिए जाएं और विशेषज्ञों द्वारा केवल उनका परीक्षण किया जाए। अंत में, समिति परीक्षा के समापन तक अंतिम प्रश्न-परीक्षकों को सख्त एकांतवास और पृथक्करण में रखने पर जोर देती है।

    समिति आगे सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अपने प्रश्न बैंकों को विकसित करने और अनुवाद के लिए हमारे सबसे प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों - जिनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रबंध संस्थान आदि शामिल हैं - के प्रामाणिक विशेषज्ञों पर भरोसा करना चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को इन विशेषज्ञों को भर्ती करने से पहले उनकी सत्यनिष्ठा स्थापित करने और किसी भी हित के टकराव (जैसे, निजी कोचिंग केंद्रों के मालिक या संकाय, परीक्षा देने वाले परिवार के सदस्य आदि) को खारिज करने के लिए उनके पिछले रिकॉर्ड की जाँच करने की एक प्रणाली भी विकसित करनी चाहिए।

10.3 केवल प्रक्रियाएँ ही नहीं, बल्कि संस्थागत कार्य-संस्कृति भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण होती है। इसलिए समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को ऐसी संस्थागत कार्य-संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जिसमें महानिदेशक से लेकर परीक्षा केंद्र के कक्ष निरीक्षक तक प्रत्येक अधिकारी स्वयं को केवल प्रशासनिक व्यवस्था का एक कर्मचारी न मानकर, बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता एवं सत्यनिष्ठा का संरक्षक समझे।

    समिति नोट करती है कि हालिया चुनौतियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में जनता के विश्वास को प्रभावित किया है, और इस विश्वास को फिर से बनाने के लिए हितधारकों के साथ निरंतर, पारदर्शी और द्वि-मार्गी संचार की आवश्यकता होगी। समिति नोट करती है कि उम्मीदवारों के साथ एनटीए की वर्तमान सहभागिता काफी हद तक पोर्टलों और अधिसूचनाओं के माध्यम से एकतरफा संचार तक ही सीमित है। यह नोट करती है कि छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए एनटीए के चैनलों को लेकर अधिक सार्वजनिक जागरूकता की आवश्यकता है। समिति सिफारिश करती है कि ऐसे चैनलों को एनटीए के सामान्य कामकाज में शामिल किया जाए और छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए, ताकि यह एजेंसी हितधारकों की चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बन सके।

10.4 समिति 2024 से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा किए गए उपायों को नोट करती है। एसएलसीसी, डीएलसीसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल जैमर तथा एआई आधारित सीसीटीवी विश्लेषण सहित संस्थागत ढांचे का स्वागत है। तथापि, इन सभी उपायों के बावजूद नीट (स्नातक) 2026 परीक्षा का निरस्त किया जाना और अधिक प्रक्रियागत और संस्थागत सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है।

10.5 समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में 39 स्वीकृत पदों में से केवल 23 अधिकारी वर्तमान में पदस्थ हैं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में प्रतिनियुक्ति पर हैं - 41 प्रतिशत पद रिक्त है। समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मजबूत करने के लिए जनशक्ति की भर्ती डॉक्टर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की प्रमुख सिफारिशों में शामिल थी। समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में जनशक्ति की कमी को नोट करती है और एजेंसी से सभी स्वीकृत पदों पर भर्ती में तेजी लाने का आग्रह करती है।

    समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में विद्यमान सभी 39 स्थायी पद वर्तमान में प्रतिनियुक्ति मोड के माध्यम से भरे गए हैं। प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी आमतौर पर अपने मूल काडर में लौटने से पहले दो से तीन साल के सीमित कार्यकाल के लिए सेवा देते हैं। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए काफी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है जो आमतौर पर कई वर्षों के अनुभव से विकसित होती है। तदनुसार, इस उद्देश्य के लिए पेशेवर कर्मचारियों के एक समर्पित काडर की आवश्यकता है। समिति सिफारिश करती है कि इसलिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को स्थायी आधार पर अपने अधिकारियों की भर्ती करनी चाहिए, जिसमें साइकोमेट्रिक्स, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल अवसंरचना, डाटा एनालिटिक्स और परीक्षा रसद के विशेषज्ञों पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के अंतर्गत 16 पदों को वरिष्ठ नेतृत्व की एक पूरक परत के रूप में माना जाना चाहिए, न कि डोमेन विशेषज्ञता के विकल्प के रूप में।

10.6 समिति समुक्ति करती है कि एनटीए द्वारा आयोजित की जाने वाली सीबीटी परीक्षाओं के लिए सुरक्षित सरकारी सीबीटी केंद्रों की एक ठोस कार्यान्वयन योजना, जिसमें बजटीय प्रावधान और मौजूदा सरकारी स्वामित्व वाली सुविधाओं का वर्तमान मानचित्रण शामिल है, को शीघ्रता से अंतिम रूप दिए जाने की आवश्यकता है। समिति का यह विचार है कि पर्याप्त सरकारी स्वामित्व वाला बुनियादी ढाँचा उपलब्ध होना चाहिए ताकि निजी केंद्रों पर निर्भरता से बचा जा सके।

10.7     समिति कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मोड में चरणबद्ध परिवर्तन के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई सिफारिशों को नोट करती है, और व्यापक रूप से इस दृष्टिकोण से सहमत है। समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित की जाने वाली अधिकांश प्रवेश परीक्षाएं पहले से ही कम्प्यूटर आधारित परीक्षण पर संचालित की जा रही हैं, जिनमें जेईई-मेन्स, यूजीसी-नेट और सीयूईटी शामिल हैं। समिति नोट करती है कि डिजिटल साक्षरता एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक और व्यावसायिक कौशल है जो छात्र आबादी के बीच तेजी से प्रचलित हो रहा है। समिति नोट करती है कि पेन-और-पेपर परीक्षण पर अपनी निर्भरता में नीट-यूजी एक अपवाद है। इसलिए समिति सिफ़ारिश करती है कि युद्ध स्तर पर नीट को भी कम्प्यूटर आधारित परीक्षण दृष्टिकोण में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

    हालांकि, समिति दूरस्थ क्षेत्रों और वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए कम्प्यूटर आधारित परीक्षण की पहुंच को लेकर चिंतित है। इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि कम्प्यूटर आधारित परीक्षण में बदलाव के साथ डिजिटल पहुंच को अधिकतम करने के लिए एक ठोस राष्ट्रीय परीक्षण रणनीति होनी चाहिए। इस रणनीति की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हो सकती हैं -

i.    नीट (स्नातक) परीक्षा को कम्प्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में परिवर्तित करने से पूर्व पूरे देश में, विशेषकर टियर-2, टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के स्वामित्व वाले कम्प्यूटर आधारित परीक्षा अवसंरचना के विकास हेतु पर्याप्त निवेश किया जाना चाहिए। परीक्षाओं के सुचारु संचालन के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित 1,000 सुरक्षित सरकारी कम्प्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों की स्थापना एक स्पष्ट एवं चरणबद्ध समय-सीमा के साथ सुनिश्चित की जानी चाहिए। समिति सुझाव देती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी स्वयं देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में मध्यम आकार की सूचना प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं (100-200 नोड्स) की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करे। जब तक स्कूल/कॉलेज प्रशासन सूचना प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला के लिए स्थान प्रदान करता है, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी इस शर्त पर आवश्यक हार्डवेयर उपकरणों में निवेश कर सकती है कि आवश्यक किसी भी परीक्षा के संचालन के लिए ये सुविधाएं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को सौंपी जाएंगी।

ii.   समिति इस बात पर बल देती है कि छात्रों पर परिवहन और आवास के तनाव तथा वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सभी परीक्षाओं के लिए प्रत्येक जिले में कम से कम 1 परीक्षण केंद्र होना चाहिए।

iii.   समिति नोट करती है कि उप-अनुबंधित आधार पर परीक्षा केंद्रों के रूप में जुड़े निजी संस्थान प्रायः परीक्षा सुरक्षा में एक कमजोर कड़ी साबित हुए हैं। इसलिए, सभी केंद्र संघ और/या राज्य सरकारों के स्वामित्व और संचालन में होने चाहिए।

iv.   छात्रों को प्रारूप और डिजिटल इंटरफ़ेस से खुद को परिचित कराने में सक्षम बनाने के लिए कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मॉक परीक्षा देने के अवसर भी दिए जाने चाहिए।

v.   शिक्षा मंत्रालय छात्रों के बीच डिजिटल परीक्षण से परिचित कराने के लिए स्कूल स्तर पर भी सीबीटी आधारित परीक्षाओं को शामिल करने पर विचार कर सकता है।

vi.  कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मोड लागू करने से पहले, जहां कम्प्यूटर और/अथवा कनेक्टिविटी की अनुपलब्धता के कारण बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है, उन स्थानों पर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को एक हाइब्रिड मॉडल पर विचार करना चाहिए, जिसके अंतर्गत एनक्रिप्टेड प्रश्न सीधे परीक्षा केंद्र पर पहुंचाए जा सकते हैं और फिर वहीं प्रिंट किए जा सकते हैं, जिसके बारे में समिति को सूचित किया गया है कि पूर्ण कम्प्यूटर आधारित परीक्षण की तैयारी हासिल होने तक यह संभव है।

vii.  कम्प्यूटर आधारित परीक्षण-आधारित नीट (यूजी) परीक्षा की बहु-सत्र प्रकृति के लिए एक मजबूत, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से लेखापरीक्षित समानीकरण कार्यप्रणाली की आवश्यकता होगी। कम्प्यूटर आधारित परीक्षण में किसी भी परिवर्तन से पहले इस समानीकरण कार्यप्रणाली को विकसित किया जाना चाहिए और जनता को समझाया जाना चाहिए।

viii.   नीट (यूजी) को कम्प्यूटर आधारित परीक्षण मोड में स्थानांतरित करने में हितधारकों अर्थात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, चिकित्सा शिक्षा नियामकों, छात्रों और उनके परिवारों के साथ परामर्श शामिल होना चाहिए।

 

10.8     समिति के समक्ष परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित दो व्यावहारिक चिंताएँ प्रस्तुत की गईं, जिनको समिति ने नोट किया है:

i.   परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने एवं अन्य सत्यापन संबंधी औपचारिकताएँ पूरी किए जाने से उन विद्यार्थियों का ध्यान भंग होता है, जो सीमित समय में प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास कर रहे होते हैं। इसलिए समिति का विचार है कि ऐसी सभी औपचारिकताओं के लिए परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व अथवा परीक्षा समाप्त होने के पश्चात 15 मिनट की पृथक समयावधि निर्धारित की जानी चाहिए तथा इन्हें परीक्षा की निर्धारित अवधि के दौरान नहीं किया जाना चाहिए।

ii.    परीक्षा केंद्र पर कुछ मिनट की देरी से पहुँचने वाले अभ्यर्थियों को प्रायः पूर्णतः प्रवेश से वंचित कर या जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पूरे वर्ष की मेहनत केवल मामूली विलंब के कारण व्यर्थ होती है। समिति समुक्ति करती है कि कुछ परिस्थितियों में अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र पर विलंब से पहुँचने के वास्तविक एवं उचित कारण हो सकते हैं। इसलिए समिति का विचार है कि कुछ तंत्र बनाए जाने चाहिए कि ऐसे अभ्यर्थियों को विलंब से पहुँचने का कारण अभिलेखित करते हुए एक    वचन-पत्र पर हस्ताक्षर कराने के उपरांत परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्हें केवल शेष उपलब्ध समय के लिए ही परीक्षा देने की अनुमति दी जाए तथा किसी भी परिस्थिति में अतिरिक्त समय प्रदान न किया जाए।

10.9     समिति नोट करती है कि परीक्षा के दिन आयोजित होने वाली सार्वजनिक रैलियाँ, जुलूस अथवा अन्य बड़े सार्वजनिक आयोजन अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र तक समय पर पहुँचने में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें निर्धारित रिपोर्टिंग समय तक पहुँचने में विलंब हो सकता है। समिति सिफारिश करती है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में आवश्यक संशोधन कर जिला प्रशासन को यह निर्देश देने का प्रावधान किया जाए कि परीक्षा के दिनों में किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस अथवा अन्य सार्वजनिक सभा के आयोजन की अनुमति न दी जाए। साथ ही, परीक्षा के दिनों में सुचारु यातायात व्यवस्था एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त एवं अग्रिम व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ, ताकि किसी भी अभ्यर्थी को टाली जा सकने वाली बाहरी परिस्थितियों के कारण किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

10.10    समिति नोट करती है कि वर्तमान में नीट (स्नातक) के माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष तथा नर्सिंग पाठ्यक्रमों में उपलब्ध कुल सीटों की तुलना में कहीं अधिक अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है। यद्यपि पर्याप्त संख्या में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का होना परामर्श के विभिन्न चरणों तथा निजी एवं मानद संस्थानों की सीटों के माध्यम से विद्यार्थियों को अवसर प्रदान करने की दृष्टि से उचित है, तथापि उपलब्ध सीटों और उत्तीर्ण घोषित अभ्यर्थियों की संख्या के बीच अत्यधिक अंतर लाखों विद्यार्थियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव उत्पन्न करता है। इसलिए समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को अर्हता प्रतिशतक (क्वालिफ़ाइंग परसेंटाइल) एवं कट-ऑफ निर्धारित करने की वर्तमान पद्धति की वर्षवार, आँकड़ा-आधारित समीक्षा करनी चाहिए, ताकि योग्यता से कोई समझौता किए बिना उत्तीर्ण घोषित अभ्यर्थियों की संख्या को उपलब्ध वास्तविक सीटों के अनुरूप यथोचित सीमा तक संतुलित रखा जा सके।

10.11 समिति नोट करती है कि सिविल सेवा परीक्षा, जो अभ्यर्थियों के चरणबद्ध चयन हेतु बहु-स्तरीय परीक्षा प्रणाली का अनुसरण करती है, के विपरीत नीट (स्नातक) परीक्षा अब भी एकल-स्तरीय परीक्षा के रूप में आयोजित की जाती है, जिसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग तथा आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का परीक्षण किया जाता है। समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अपनी बड़ी परीक्षाओं के लिए द्वि-स्तरीय परीक्षा प्रणाली की व्यवहार्यता का परीक्षण करना चाहिए। उदाहरणस्वरूप, सभी चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए एक सामान्य प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जा सकती है तथा इसके पश्चात विभिन्न विशिष्ट पाठ्यक्रमों के लिए पृथक मुख्य परीक्षा आयोजित की जा सकती है, ताकि नर्सिंग अथवा आयुष पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों का मूल्यांकन एवं रैंकिंग, एमबीबीएस में प्रवेश के इच्छुक अभ्यर्थियों से पृथक रूप से की जा सके और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा में कमी लाई जा सके।

10.12    समिति नोट करती है कि प्रश्न-पत्र निर्माण, परीक्षा संबंधी लॉजिस्टिक्स, मुद्रण, परीक्षा प्रशासन आदि जैसी परीक्षा-संबंधी सेवाएँ प्रदान करने वाली अनेक फर्में, जिन्हें एक या अधिक राज्य सरकारों अथवा अन्य संगठनों द्वारा काली सूची में डाला जा चुका है, वे अन्य राज्यों एवं संगठनों से अनुबंध प्राप्त करती रही हैं। वर्तमान में इस प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए कोई प्रभावी निवारक तंत्र उपलब्ध नहीं है।

    समिति सिफ़ारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी काली सूचीबद्ध परीक्षा सेवा प्रदाताओं का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करे तथा उसका नियमित रूप से अनुरक्षण करे। इस रजिस्टर में संबंधित फर्मों के नाम, उनसे संबद्ध व्यक्तियों एवं संस्थाओं का विवरण, अयोग्यता अथवा काली सूची में डाले जाने का स्वरूप तथा ऐसा आदेश जारी करने वाले प्राधिकरण का विवरण सम्मिलित किया जाना चाहिए। यह रजिस्टर सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। समिति यह भी सिफ़ारिश करती है कि इस रजिस्टर में सूचीबद्ध किसी भी संस्था अथवा फर्म के साथ राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, किसी राज्य सरकार अथवा किसी अन्य लोक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा अनुबंध किए जाने के मामले पर परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के अंतर्गत विचार किया जाना चाहिए। समिति नोट करती है कि उसने उच्चतर शिक्षा विभाग के स्वायत्त निकायों से संबन्धित अपने 371वें प्रतिवेदन में पहले भी यही सिफारिश की है।

10.13    समिति नोट करती है कि कोचिंग उद्योग ने प्रभावी रूप से एक समानांतर पाठ्यक्रम बना दिया है जो प्रायः आधिकारिक स्कूली पाठ्यक्रम से अधिक मायने रखता है। यह परीक्षा डिजाइन के विकल्पों का एक प्रत्यक्ष परिणाम है। जब परीक्षा पत्र राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) या राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम से परे परीक्षण करते हैं, या वास्तविक वैचारिक समझ के बजाय बार-बार अभ्यास के माध्यम से विकसित त्वरित स्मरण और पैटर्न-पहचान का परीक्षण करते हैं, तो वे अनिवार्य रूप से सीखने के बजाय कोचिंग को पुरस्कृत करते हैं। इस डिजाइन ने एक बड़े, व्यापक रूप से अनियंत्रित निजी कोचिंग उद्योग को बढ़ावा दिया है जिसने इन परीक्षाओं की तैयारी के प्राथमिक केंद्र के रूप में स्कूल-स्तरीय शिक्षण को विस्थापित कर दिया है। इसके अतिरिक्त, यह उन छात्रों को विशेषाधिकार देकर सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता में एक बाधा उत्पन्न करता है जो कोचिंग का खर्च उठा सकते हैं, जिससे उन्हें समान रूप से प्रतिभाशाली लेकिन असमर्थ छात्रों की तुलना में संरचनात्मक लाभ मिलता है।

    समिति का मत है कि शिक्षा मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि नीट (स्नातक), जेईई (मुख्य) तथा सीयूईटी के प्रश्न-पत्रों के लिए ऐसे विशिष्ट एवं मापनीय मानक निर्धारित किए जाएँ, जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि परीक्षाएँ आधिकारिक विद्यालयी पाठ्यक्रम पर आधारित संकल्पनात्मक समझ का परीक्षण करें, न कि केवल कोचिंग-विशिष्ट तकनीकों को बढ़ावा दें। समिति का यह भी विचार है कि कोचिंग उद्योग के लिए एक उपयुक्त विनियामक ढाँचा विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें विशेष रूप से शुल्क की पारदर्शिता, सुरक्षा मानकों तथा कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित प्रावधानों पर समुचित ध्यान दिया जाए।

10.14    समिति को बैठकों के दौरान यह अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास वर्तमान में विभिन्न परीक्षाओं के लिए विभिन्न राज्यों से पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या संबंधी आँकड़े तो उपलब्ध हैं, किन्तु इन अभ्यर्थियों की सफलता अथवा असफलता संबंधी कोई समेकित आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। भागीदारी संबंधी आँकड़े और सफलता संबंधी आँकड़े काफी अलग-अलग होते हैं। ऐसा संभव है कि किसी राज्य में पंजीकरण की संख्या अधिक हो, किन्तु उत्तीर्णता अथवा सफलता का प्रतिशत कम हो, जो शिक्षा की गुणवत्ता अथवा अवसरों की उपलब्धता से संबंधित किसी समस्या का संकेत हो सकता है।

    समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी प्रत्येक प्रमुख परीक्षा के संबंध में प्रतिवर्ष एक समानता लेखा-परीक्षण कराए। इस लेखा-परीक्षण में प्रत्येक परीक्षा के लिए राज्यवार, लिंग के आधार पर, विद्यालय बोर्ड के प्रकार (सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी), शिक्षण के माध्यम तथा सामाजिक श्रेणी (अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा सामान्य वर्ग) के आधार पर अभ्यर्थियों की भागीदारी दर, सफलता/उत्तीर्णता दर तथा कट-ऑफ प्राप्ति दर का विश्लेषण किया जाए। इस लेखा-परीक्षण के निष्कर्ष राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के वार्षिक प्रतिवेदन में प्रकाशित किए जाएँ तथा नीति निर्माण के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय को भी प्रस्तुत किए जाएँ। शिक्षा मंत्रालय इन आँकड़ों का उपयोग आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने हेतु कर सकता है।

10.15    समिति नोट करती है कि एकल अहम परीक्षा का अत्यधिक दबाव लाखों युवा अभ्यर्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को परीक्षा से पूर्व, परीक्षा के दौरान तथा परिणाम घोषित होने के पश्चात भी प्रभावित करता है। समिति का विचार है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ सहभागिता स्थापित कर अभ्यर्थियों के लिए निःशुल्क एवं सुलभ परामर्श हेल्पलाइन उपलब्ध करानी चाहिए। साथ ही, प्रत्येक परीक्षा से पर्याप्त समय पूर्व तनाव-प्रबंधन संबंधी सरल एवं उपयोगी जानकारी का व्यापक प्रसार किया जाना चाहिए तथा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परीक्षा केंद्रों पर, विशेषकर परिणाम घोषित होने के आसपास के संवेदनशील समय में, शांत, सहयोगात्मक एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखा जाए।

10.16    समिति को बैठकों के दौरान अवगत कराया गया कि वर्तमान में नीट (स्नातक) परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए प्रयासों की संख्या की कोई सीमा निर्धारित नहीं है और न ही इसके लिए कोई वास्तविक अधिकतम आयु-सीमा निर्धारित है। इसके परिणामस्वरूप नीट परीक्षाओं में 70 वर्ष से अधिक आयु के अभ्यर्थियों की भागीदारी जैसी विसंगतियाँ उत्पन्न हुई हैं। समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य सभी संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर, नीट-यूजी सहित सभी प्रमुख परीक्षाओं के लिए तर्कसंगत आयु सीमा और तर्कसंगत प्रयास सीमाओं की संभावनाओं की तलाश करे। समिति नोट करती है कि इस नियम का अपवाद केवल यूजीसी-नेट के लिए किया जा सकता है।

10.17 समिति नोट करती है कि परीक्षाओं की सफलता के लिए राज्य सरकारों का सहयोग और विशेषज्ञता अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसलिए, यह सिफारिश करती है कि एक नए रूप में गठित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के शासी निकाय में राज्य सरकारों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व शामिल होना चाहिए।

10.18 समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की पुनर्कल्पना केवल परीक्षाएं आयोजित करने वाले निकाय के रूप में नहीं, बल्कि परीक्षाओं से संबंधित सभी मामलों और नीतियों के लिए एक थिंक-टैंक के रूप में की जानी चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास नौकरशाहों और अधिकारियों के अतिरिक्त शिक्षा अनुसंधान में योग्यता रखने वाले शिक्षाविदों से सुसज्जित एक शोध विंग होना चाहिए। वर्तमान में शोध विंग की अनुपस्थिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को दीर्घकालिक अध्ययन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यों को करने से रोकती है, जो यह मापते हैं कि नीट, सीयूईटी, यूजीसी-नेट परीक्षाएं आदि वास्तव में अपने इच्छित उद्देश्य को पूरा करती हैं या नहीं। इसी तरह, गहरे शैक्षणिक अनुभव वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसे अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक संसाधन हो सकती है, जो बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन अंकन प्रणाली की शुरुआत जैसे हस्तक्षेपों को लागू कर रहे हैं। इस प्रकार समिति अपनी स्वयं की परीक्षाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद करने के साथ-साथ अंततः गैर-राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में अधिक शैक्षणिक और अनुसंधान विशेषज्ञता की सिफारिश करती है।

10.19 समिति नोट करती है कि एक बार जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का डिजिटल बुनियादी ढांचा परिपक्व हो जाता है, तो कम्प्यूटर एडेप्टिव टेस्टिंग (कैट) मॉडल के साथ कम्प्यूटर आधारित परीक्षण के आधार पर परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए, जिसे सर्वसम्मति से मूल्यांकन के लिए स्वर्ण मानक माना जाता है। इसके लिए ऐसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों के उपयोग की आवश्यकता होगी जो एक बड़े प्रश्न बैंक से प्रश्न निकाल सकें, उन्हें छात्र की योग्यता के अनुसार संशोधित कर सकें, प्रश्नों का सही मूल्यांकन कर सकें और प्रश्नों की कठिनाई जैसे वस्तुनिष्ठ विचारों के आधार पर अंकों का समानीकरण कर सकें। ऐसी प्रणाली कदाचार की गुंजाइश को न्यूनतम कर देगी। कोई भी मानक प्रश्न पत्र नहीं होगा जिसे लीक किया जा सके। इसके अतिरिक्त, एक ही केंद्र पर किन्हीं दो अभ्यर्थियों को प्रश्नों का एक समान सेट नहीं मिलेगा, जिससे नकल की गुंजाइश कम होगी। तदनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को इन उपकरणों को विकसित करने, निगरानी करने और लगातार मजबूत करने की दक्षता के साथ एक तकनीकी टीम स्थापित करनी चाहिए।

10.20 समिति को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा सूचित किया गया था कि कम्प्यूटर आधारित परीक्षण परीक्षा का जोखिम यह होगा कि कम्प्यूटर प्रणाली शरारती तत्वों द्वारा हैकिंग के प्रति संवेदनशील है और ऐसी हैक का पता लगाना भी मुश्किल है। समिति को सूचित किया गया था कि ऐसा ही एक प्रयास वर्ष 2021 की आईआईटी जेईई-मेन्स परीक्षा के दौरान हुआ था और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा इसकी जाँच की गई थी। समिति नोट करती है कि इसलिए कम्प्यूटर आधारित परीक्षण में बदलाव नई चुनौतियां पेश करता है जिनके लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को पहले से अनुमान लगाना चाहिए और तैयार रहना चाहिए। लाइव सीसीटीवी निगरानी के अतिरिक्त, समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के भीतर एक मजबूत, आंतरिक साइबर सुरक्षा टीम की स्थापना की सिफारिश करती है जो सुरक्षित परीक्षा सॉफ्टवेयर विकसित और लागू कर सकती है जो रिमोट एक्सेस, स्क्रीन-रिकॉर्डिंग और वर्चुअल मशीनों के उपयोग को रोकती है। इसके अतिरिक्त इसे कदाचार का संकेत देने वाले असामान्य प्रतिक्रिया पैटर्न का पता लगाने और उन्हें चिह्नित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित विश्लेषणात्मक उपकरणों को अपनाना चाहिए।

10.21 समिति नोट करती है कि महानिदेशक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में प्रमुख कार्यकारी अधिकारी होते हैं। हालांकि, 23.06.2024 और 01.04.2026 के बीच, यह पद उन अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त प्रभार के रूप में संभाला गया था, जिनके पास अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, आईटीपीओ और आयुक्त, नवोदय विद्यालय समिति के रूप में पर्याप्त प्राथमिक जिम्मेदारियां थीं। समिति राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में प्रमुख पदों पर अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार के रूप में नियुक्त करने की प्रथा को हतोत्साहित करती है।

10.22 यद्यपि 2024 के बाद से स्वीकृत पदों की संख्या में वृद्धि हुई है, समिति नोट करती है कि 39 अधिकारियों की पूर्ण क्षमता पर भी, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अन्य पक्ष के निजी ठेकेदारों पर निर्भर रहना पड़ेगा। समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अंततः अपने परिचालन का विस्तार करना चाहिए ताकि वह सभी परीक्षाओं की रसद का संचालन स्वयं करने में सक्षम हो सके। गैर-राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी कर्मचारियों का उपयोग केवल प्रश्न पत्र तैयार करने और अन्य शैक्षणिक कार्यों तक सीमित होना चाहिए, जिसके लिए बाहरी शैक्षणिक विशेषज्ञता पर निर्भरता अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

10.23 समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास पर्याप्त वार्षिक राजस्व अधिशेष है, और कुल मिलाकर वित्तीय वर्ष 2018-19 और वित्तीय वर्ष 2024-25 के बीच 590 करोड़ रुपये का कुल राजस्व अधिशेष अर्जित किया है। समिति को सूचित किया गया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास समय-समय पर उपलब्ध अधिशेष निधियों को परिचालन उद्देश्यों के लिए आवश्यक होने तक इष्टतम उपयोग हेतु सावधि जमा में निवेश किया जा रहा है। समिति नोट करती है कि इस कॉर्पस का उपयोग सरकार के स्वामित्व वाले कम्प्यूटर आधारित परीक्षण केंद्रों में निवेश और उन्नयन तथा छात्रों को कम्प्यूटर आधारित परीक्षण इंटरफ़ेस से परिचित कराने के लिए मॉक परीक्षाओं के संचालन के लिए किया जा सकता है।

10.24 समिति नोट करती है कि नीट-यूजी के परिणाम आमतौर पर सार्वजनिक रूप से सुलभ तरीके से प्रकाशित नहीं किए जाते हैं। हालांकि, 2024 में, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने माननीय उच्चतम न्यायालय के कहने पर विवरण प्रकाशित किया और इससे इस बात पर एक बड़ी सार्वजनिक चर्चा शुरू हुई कि विभिन्न शहरों और परीक्षण केंद्रों में छात्रों का प्रदर्शन कैसे भिन्न होता है। परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने छात्रों द्वारा अपने स्वयं के परीक्षण केंद्रों को चुनने की क्षमता पर सख्ती की। समिति ने नोट किया है कि यह एक प्रगतिशील कदम है जिसने दुरुपयोग की गुंजाइश को कम किया है। तदनुसार, समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परिणाम में पारदर्शिता के लिए संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अपनाए जाने वाले तरीके को अपनाया जाना चाहिए। समिति नोट करती है कि ऐसी पारदर्शिता राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को अभ्यर्थियों और परीक्षण केंद्रों के प्रदर्शन में किसी भी असामान्य पैटर्न की पहचान करने और नीट परीक्षा में जनता के विश्वास को बढ़ाने में सक्षम बना सकती है।

10.25 समिति यह परिकल्पना करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास आंतरिक क्षमताएं होनी चाहिए जो परीक्षा प्रणाली में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं का पता लगा सकें, पहचान कर सकें और उन्हें निर्धारित कर सकें। ऐसी आंतरिक क्षमताएं संकटों का त्वरित जवाब देने की राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की क्षमता को मजबूत कर सकती हैं। तदनुसार, समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के भीतर इनमें से कुछ क्षमताओं को विकसित करने पर विचार करे।

10.26 समिति नोट करती है कि वर्तमान में प्रश्नपत्र लीक होने, प्रश्नपत्र लीक होने के संबंध में दर्ज एफआईआर तथा इन मामलों की सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच और अभियोजन के संबंध में कोई आधिकारिक सार्वजनिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है। उच्चतर शिक्षा विभाग ने समिति को बताया कि यद्यपि परीक्षा में कदाचार/व्यवधान की घटनाएं हुई हैं, तथापि 2017 में एनटीए के गठन से लेकर 2025 तक एनटीए द्वारा आयोजित किसी भी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की कोई घटना नहीं हुई है। समिति ने नोट किया कि मंत्रालय का यह कथन समिति के विभिन्न सदस्यों के मत से भिन्न है। तदनुसार, समिति सिफ़ारिश करती है कि एनटीए, उच्चतर शिक्षा विभाग तथा अन्य सरकारी एजेंसियों और विभागों के साथ मिलकर एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं से संबंधित सभी समुचित विवरणों और उनसे संबंधित जांच के संबंध में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एक रिपोर्ट जारी करे।

10.27 समिति नोट करती है कि डॉक्टर के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की थी कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का अधिदेश प्रवेश परीक्षाओं के संचालन तक ही सीमित रहे, और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी विस्तारित संस्थागत क्षमता का प्रदर्शन करने के बाद ही अतिरिक्त जिम्मेदारियां ले। समिति नोट करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ऐसी भर्ती परीक्षाएं आयोजित करना जारी रखे हुए है जो उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश से जुड़ी नहीं हैं। समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी तुरंत अपनी प्राथमिकताओं को केवल उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश परीक्षाओं के संचालन पर केंद्रित करे। समिति नोट करती है कि ऐसा पुनर्ध्यान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के मिशन वक्तव्य के अनुरूप होगा - "शोध आधारित वैध, विश्वसनीय, दक्ष , पारदर्शी, निष्पक्ष और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आकलनों के संचालन के माध्यम से शिक्षा में समानता और गुणवत्ता को सुदृढ़ करना।"

10.28 समिति सिफारिश करती है कि एनटीए को अभ्यर्थियों के प्रति अपने दायित्वों की एक स्पष्ट रूपरेखा जारी करनी चाहिए। इसमें प्रशासनिक कारणों से परीक्षाएं रद्द होने से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए वित्तीय मुआवजे का प्रावधान और शिकायत निवारण के लिए समय-सीमा निर्धारित करना शामिल हो सकता है। इससे ऐसी घटनाओं के कारण अभ्यर्थियों पर पड़ने वाला वित्तीय और मानसिक बोझ कम होगा।

10.29 समिति परीक्षा के सभी पहलुओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने और शिकायत निवारण के लिए एक सुरक्षित माध्यम की भी सिफारिश करती है।

10.30 समिति शैक्षिक परीक्षाओं के लिए एक स्वतंत्र तंत्र के निर्माण की सिफारिश करती है, जो एनटीए से स्वतंत्र रूप से कार्य करे, जिसके पास परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल का ऑडिट करने, अभ्यर्थियों की शिकायतों की जाँच करने और अपनी रिपोर्ट सीधे मंत्रालय को सौंपने की शक्तियां हों।

10.31 समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी राज्य सरकारों और अन्य एजेंसियों सहित उन सभी संबंधित हितधारकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में निवेश करे जो वास्तव में जिला और परीक्षण केंद्र-स्तरीय परीक्षा के संचालन के लिए जिम्मेदार हैं, ताकि सुधारों का केवल अनुपालन करने के बजाय उन्हें आत्मसात किया जा सके।

10.32 समिति नोट करती है कि परीक्षा प्रक्रिया को सुदृढ करने के लिए डॉ. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों का कार्यान्वयन जारी है। समिति को सूचित किया गया कि अधिकांश सुधार कार्यान्वित किए जा चुके हैं, क्योंकि 101 सिफारिशों में से 60 सिफ़ारिशें वर्ष 2025 और 2026 से संबंधित थीं। समिति सिफारिश करती है कि लंबित सुधारों, जिसमें वर्ष 2025 और 2026 से संबंधित 60 सुधारों में से वे सुधार भी शामिल हैं, जो अभी तक कार्यान्वित नहीं किए गए हैं, का शीघ्र कार्यान्वयन किया जाए।

10.33 समिति सिफारिश करती है कि एनटीए दिव्याङ्ग छात्रों के लिए भी परीक्षा संचालन का एक प्रोटोकॉल विकसित करे, जिनकी विशिष्ट आवश्यकताएं और जरूरतें हैं। एनटीए को सुलभ परीक्षा केंद्रों, पर्याप्त लेखकों और क्षतिपूर्ति समय की संभावना, सुलभ डिजिटल प्लेटफॉर्म और एक समर्पित शिकायत-निवारण तंत्र सुनिश्चित करके दिव्याङ्ग छात्रों के लिए सहायता को मजबूत करना चाहिए। इस तरह का प्रावधान छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की पहुंच को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

10.34 समिति सिफारिश करती है कि सीबीटी-परीक्षाओं में परिवर्तन के बाद यदि किसी भी मुद्रण की आवश्यकता होती है, तो इसे केवल एनटीए के स्वामित्व और संचालित प्रिंटिंग प्रेसों में ही आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए निजी प्रिंटरों पर कोई निर्भरता नहीं होनी चाहिए।

10.35 समिति मानती है कि शिक्षा राष्ट्रीय प्रगति और सामाजिक विकास का एक मौलिक स्तंभ बनी हुई है, जिसमें व्यक्तियों को सशक्त बनाने और राष्ट्र के भविष्य को मजबूत करने की क्षमता है। समिति का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में निरंतर सुधार अब एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है, जिसका उद्देश्य अनुचित साधनों को समाप्त करना, अनुचित तनाव को कम करना और छात्रों की क्षमताओं के अधिक समग्र मूल्यांकन को प्रोत्साहित करना है। समिति इस मामले से अवगत रहने का संकल्प लेती है और सभी हितधारकों को एक बेहतर परीक्षा और शिक्षा प्रणाली के इस साझा राष्ट्रीय मिशन के लिए विचारों का योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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आरकेके


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