संचार मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में दूरसंचार के भविष्य पर सीईओ गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि भारत संपूर्ण दूरसंचार मूल्य श्रृंखला की ओर अग्रसर है और नियमों, उपकरणों तथा नवाचार को आकार दे रहा है
दूरसंचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के नेता कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत नेटवर्क और डिजिटल नवाचार में नए आयाम तलाश रहे हैं
प्रविष्टि तिथि:
08 OCT 2026 8:28PM by PIB Delhi
केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के 10वें संस्करण के दौरान संप्रभुता का प्रभाव और दूरसंचार का भविष्य विषय पर एक उच्च स्तरीय सीईओ गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना, नेटवर्क उपकरण, प्रौद्योगिकी और परामर्श क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाले उभरते अवसरों और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए मुख्य संवाद सत्र में भाग लिया। यह सत्र आईएमसी 2026 का हिस्सा था, जिसका आयोजन "सीमाओं के बिना विस्तार" विषय के तहत किया गया था । इसमें नवाचार को विस्तार योग्य, लचीली और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक डिजिटल क्षमताओं में परिवर्तित करने पर जोर दिया गया था।

इस गोलमेज सम्मेलन में प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, नेटवर्क उपकरण निर्माताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों, डिजिटल अवसंरचना फर्मों और उद्योग सलाहकार संगठनों के वरिष्ठ उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया। इन चर्चाओं में उद्योग जगत की मजबूत भागीदारी झलकती थी और इनका मुख्य उद्देश्य दूरसंचार अवसंरचना को उन्नत करना, नवाचार को बढ़ावा देना, स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करना और भारत के डिजिटल विकास के अगले चरण को समर्थन देना था। दूरसंचार विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल ने भी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श में भाग लिया।
इस चर्चा का केंद्र बिंदु तेजी से विकसित हो रही दूरसंचार मूल्य श्रृंखला और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड और कंप्यूटिंग, उन्नत संपर्क, बेहतर नेटवर्क और अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकियों का संगम था । प्रतिभागियों ने घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने, लचीला डिजिटल बुनियादी ढांचा बनाने और सतत निवेश और तकनीकी प्रगति को समर्थन देने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया।

श्री सिंधिया ने कहा कि मुझे लगता है कि हम काफी नियमित रूप से मिलते रहे हैं इसलिए यह हममें से किसी के लिए भी वार्षिक बैठक नहीं है। लेकिन इसके बावजूद इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति (आईएमसी) में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई है कि हमने पिछले दशक में बहुत कुछ हासिल किया है। कवरेज, पैठ, सामर्थ्य, समावेशिता, नवाचार और वास्तव में हमारे देश में कई एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म के नवाचार के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करने के मामले में। हम दूरसंचार क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा बाजार हैं। हम मोबाइल फोन के उत्पादन में दूसरे सबसे बड़े देश हैं। अब हमारे प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि के कारण भारत में 8-9 सेमीकंडक्टर फैब्स स्थापित होने के साथ एंड-टू-एंड वैल्यू चेन का उत्पादन भारत में ही होगा। इसलिए आज का मूलभूत निर्णायक बिंदु इस बात पर आधारित होगा कि नियम कौन बनाता है, उपकरण कौन बनाता है, नवाचार की डिजाइन कौन करता है और प्रौद्योगिकी का निर्माण कौन करता है।
उद्योग जगत को संबोधित करते हुए श्री सिंधिया ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र के अगले चरण को आकार देने में सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी आधारित दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने दूरसंचार विभाग की भूमिका को एक ऐसे वातावरण को बढ़ावा देने में सहायक और सुविधादाता के रूप में रेखांकित किया जिसमें सभी हितधारक इस क्षेत्र के विकास में योगदान दे सकें।
श्री सिंधिया ने इस बात पर उल्लेख किया कि दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में नेटवर्क उपकरण और ऑप्टिकल फाइबर निर्माता, दूरसंचार सेवा प्रदाता, इंटरनेट सेवा प्रदाता, एप्लिकेशन, प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन परस्पर जुड़े क्षेत्रों की सामूहिक शक्ति भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूती को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने व्यापक आर्थिक और सामाजिक मूल्य सृजित करने वाली प्रौद्योगिकियों और डिजिटल अवसंरचना की ओर संपर्क से आगे बढ़ने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भारत के विस्तारित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और आर्थिक विकास के लिए एक सहायक आधार के रूप में दूरसंचार की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

इस गोलमेज सम्मेलन ने उद्योग जगत के नेताओं को दूरसंचार क्षेत्र के विकास, प्रौद्योगिकी अपनाने, निवेश के अवसरों और दूरसंचार विकास के अगले चरण को समर्थन देने के लिए आवश्यक नीतिगत और नियामक प्राथमिकताओं पर अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान किया। इस संवाद से उद्योग के साथ खुला और रचनात्मक संवाद बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता झलकती है कि नीतिगत ढाँचे तकनीकी और बाजार के विकास के प्रति संवेदनशील बने रहें।
सीईओ राउंड टेबल में हुई चर्चाओं ने नवाचार, लचीलापन, विश्वसनीय बुनियादी ढांचे, स्वदेशी क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित भविष्य के लिए तैयार दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने के लिए सरकार और उद्योग को एक साथ लाकर "सीमाओं के बिना विस्तार" की दृष्टि को मजबूत किया ।
दूरसंचार विभाग ने एक मजबूत और समावेशी डिजिटल संचार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास और दूरसंचार नवाचार और प्रौद्योगिकी के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए उद्योग के हितधारकों, नवोन्मेषकों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और अन्य भागीदारों के साथ निरंतर जुड़ाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
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पीके/केसी/आरटी/एनकेएस/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2321263)
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