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आज आर्थिक सहायता, कल आत्मनिर्भरता


आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर मणिकला दुर्गा की यात्रा

प्रविष्टि तिथि: 07 OCT 2026 6:00PM by PIB Delhi

आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के लिए समय पर सहायता मिलने से आय बढ़ाने, परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुदृढ़ करने और अधिक गरिमा व आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के अवसर मिल सकते हैं। वंचित समुदायों के लोगों को टिकाऊ आजीविका शुरू करने और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में वित्तीय सहायता अहम भूमिका निभा सकती है।

39 वर्ष की सुश्री मणिकला दुर्गा अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से आती हैं और पिछले 15 वर्षों से गुंटूर नगर निगम में कचरा बीनने का काम कर रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से होने के कारण, वह स्कूल नहीं जा पाईं और अशिक्षित ही रहीं। सहायता मिलने से पहले, उनकी आजीविका मुख्य रूप से कचरा बीनने के काम पर निर्भर थी। इस काम से वह महीने में लगभग 8,000 रुपये कमाती थीं। सीमित आमदनी के कारण घर का खर्च चलाना और अपने बच्चों को बेहतर अवसर प्रदान कर पाना उनके लिए कठिन था।

सुश्री दुर्गा और उनके तीन अन्य साथियों को ‘नवजीवन संगठन’ के जरिए राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम की ‘स्वच्छता उद्यमी योजना (एसयूवाई)’ के तहत वित्तीय सहायता मिली। यह सहायता खुली नालियों की सफाई के लिए डी-सिल्टिंग मशीन (बैकहो बकेट वाला एक्सकेवेटर) खरीदने हेतु अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी के तौर पर दी गई थी। इस सामूहिक परियोजना की कुल लागत 35,03,500 रुपये थी, जिसमें 21,27,624 रुपये का ऋण और 13,75,876 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी। यह सहायता 19 जून 2023 को प्रदान की गई थी।

वित्तीय सहायता का सदुपयोग करके, सुश्री दुर्गा हर महीने लगभग 8,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने में सफल रही हैं, जिससे उनकी कुल मासिक आय लगभग 16,000 रुपये हो गई है। आय में हुई इस बढ़ोतरी से घर की जरूरतों को पूरा करने और अपने परिवार को अपेक्षाकृत अधिक स्थिर एवं सुरक्षित तरीके से सहारा देने की उनकी क्षमता सुदृढ़ हुई है।

एसयूवाई योजना के तहत मिली सहायता से सुश्री दुर्गा की आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हुई है और उन्हें अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ आजीविका कमाने का अवसर मिला है। कमाई की क्षमता बढ़ने से जहां उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास बढ़ा है, वहीं वे अपने परिवार के कल्याण  और अपने बच्चों की शिक्षा व भविष्य के लिए अधिक बेहतर तरीके से योगदान कर पा रही हैं।

सुश्री दुर्गा ने अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा, “इस वित्तीय सहायता से मुझे अपनी आमदनी बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिली है। इससे मुझे अधिक आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता मिली है। साथ ही, अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में काम करने का मौका भी मिला है।”

सुश्री मणिकला दुर्गा की यह यात्रा इस बात को दर्शाती है कि कैसे समय पर मिली वित्तीय सहायता और आजीविका के लिए सहयोग, वंचित समुदायों के लोगों की कमाई की क्षमता को बेहतर बनाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद कर सकता है। उनका अनुभव यह बताता है कि किस तरह लक्षित आर्थिक सहायता से टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित  होते हैं, परिवारों को मजबूती मिलती है और एक अधिक गरिमापूर्ण व आत्मनिर्भर समाज को बढ़ावा मिलता है।

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पीके/केसी/आरटी/आर


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