विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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नैनोमेडिसिन निवारण चिकित्सा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाएगी: डॉ. जितेन्‍द्र सिंह


भारत के स्वदेशी अनुसंधान में वैश्विक संभावना: नैनोमेडिसिन पर विश्व कांग्रेस में केन्‍द्रीय मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह: डीबीटी 174 करोड़ रुपये की लागत से नैनोमेडिसिन की 210 अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को सहयोग प्रदान कर रहा है

मौखिक इंसुलिन नैनोकण और स्तन कैंसर के लिए नैनोबॉट्स भारत की बढ़ती नैनोमेडिसिन क्षमताओं को दर्शाते हैं: डॉ. जितेन्‍द्र सिंह

भारत अनुसंधान, नवाचार, स्टार्ट-अप और नियमों की सहायता से एक मजबूत नैनोमेडिसिन इकोसिस्‍टम का निर्माण कर रहा है: डॉ. जितेन्‍द्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 27 SEP 2026 3:00PM by PIB Delhi

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने आज कहा कि नैनोमेडिसिन निवारण चिकित्सा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि भारत के स्वदेशी अनुसंधान में वैश्विक संभावना है।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नैनोमेडिसिन पर आयोजित विश्व कांग्रेस 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने नैनोमेडिसिन को चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में सबसे परिवर्तनकारी विकास में से एक बताया। उन्होंने कहा कि नैनोमीटर स्तर पर कार्य करने वाली नैनोमेडिसिन में स्वास्थ्य सेवा को अधिक निवारक और व्यक्तिगत बनाने की अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा का भविष्य तेजी से ऐसे व्यक्तिगत उपचार की ओर बढ़ेगा, जो मरीज की आनुवंशिक संरचना, जीवनशैली, खान-पान की आदतों और पर्यावरणीय कारकों पर आधारित होगा। नैनो प्रौद्योगिकी कोशिकीय स्तर पर सटीक उपचार के लिए नई संभावनाएं प्रदान कर रही है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संकाय के इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज (आईएनएमएस) द्वारा आयोजित नैनोमेडिसिन पर विश्व कांग्रेस 2026 में 2,000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें प्रख्यात वैज्ञानिक और युवा शोधकर्ता शामिल हैं, जो नैनोमेडिसिन के क्षेत्र में उभरती प्रगति और इसके अनुप्रयोगों पर चर्चा कर रहे हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता एवं अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. रोजर डी. कॉर्नबर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, जबकि कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रो. टी.एम.एस. चांग मानद अध्यक्ष हैं। उद्घाटन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, प्रो. जी.पी. तलवार, नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. रमेश चंद्र और प्रो. इंद्रजीत रॉय सहित कई प्रतिष्ठित प्रतिभागी उपस्थित थे।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने बताया कि नैनोमेडिसिन में चिकित्सा के क्षेत्र में नैनो प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग किया जाता है, जिसमें एक मीटर के एक अरबवें हिस्से के पैमाने की संरचनाओं के साथ काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चिकित्सा निवारक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में आगे बढ़ रही है, एक ही बीमारी से पीड़ित मरीजों को उनकी आनुवंशिक संरचना, जीवनशैली, खान-पान की आदतों और पर्यावरणीय कारकों के आधार पर अलग-अलग उपचार पद्धतियों की आवश्यकता हो सकती है। नैनो प्रौद्योगिकी, कोशिकीय स्तर पर हस्तक्षेप को संभव बनाकर, ऐसे उपचार को अधिक निवारक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मंत्री ने कहा कि नैनोमेडिसिन का महत्व स्वास्थ्य सेवा से आगे भी होगा। इसके अनुप्रयोगों से स्वास्थ्य संबंधी प्रक्रियाओं की लागत-प्रभावशीलता प्रभावित होने और व्यापक अर्थव्यवस्था में योगदान देने की उम्मीद है। उन्होंने नैनोमेडिसिन में बढ़ती वैश्विक रुचि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस क्षेत्र में उभर रहे अवसरों के व्यापक दायरे का संकेत है।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नैनो प्रौद्योगिकी जैसी प्रौद्योगिकियां नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं, लेकिन इन्हें चिकित्सकों की नैदानिक समझ का पूरक होना चाहिए, न कि उसे कमजोर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनौती उन्नत प्रौद्योगिकी को चिकित्सा के मानवीय और नैदानिक आयामों के साथ समन्वित करने की है।

तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के मद्देनजर चिकित्सा शिक्षा में नए सिरे से बदलाव का आह्वान करते हुए डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने याद दिलाया कि परंपरागत रूप से चिकित्सा शिक्षा में सावधानीपूर्वक निरीक्षण और शारीरिक परीक्षण के माध्यम से मरीजों का निदान करने पर विशेष जोर दिया जाता था। उन्होंने कहा कि तकनीकी उपकरणों के अधिक उन्नत होने के बावजूद ये बुनियादी नैदानिक कौशल प्रासंगिक बने रहने चाहिए।

नैनोमेडिसिन अनुसंधान के लिए सरकार के सहयोग का विवरण देते हुए डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) नैनोमेडिसिन के क्षेत्र में 210 अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को 174 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। इन परियोजनाओं में लक्षित दवा वितरण, कैंसर नैनोमेडिसिन, संक्रामक रोगों के लिए नैनोमेडिसिन, न्यूक्लिक एसिड और वैक्सीन वितरण, नैनो-निदान एवं इमेजिंग, पुनर्योजी चिकित्सा और घाव भरना, साथ ही नैनोटॉक्सिकोलॉजी और नियामक विज्ञान शामिल हैं।

आशाजनक अनुसंधान क्षेत्रों में मंत्री ने मौखिक इंसुलिन नैनोकणों और स्तन कैंसर के लिए नैनोबॉट्स के अलावा सटीक नैनो-इंजेक्शन और लक्षित स्तन कैंसर नैनोमेडिसिन का उल्लेख किया। उन्होंने याद किया कि मौखिक इंसुलिन के लिए पहले किए गए प्रयासों में अवशोषण और पाचन एंजाइमों से संबंधित चुनौतियां सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि नैनो प्रौद्योगिकी में प्रगति इन चुनौतियों से निपटने के लिए नई संभावनाएं प्रदान कर सकती है।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि भारत का नैनोमेडिसिन इकोसिस्‍टम प्रयोगशाला अनुसंधान से आगे बढ़ रहा है। सरकार का सहयोग स्टार्ट-अप, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी विकास और नियामक सुविधा तक विस्तारित हो रहा है। बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) के माध्यम से उभरते जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों को बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट (बीआईजी), प्रमोटिंग एकेडमिक रिसर्च कन्वर्जन टू एंटरप्राइज (पीएसीई), स्मॉल बिजनेस इनोवेशन रिसर्च इनिशिएटिव (एसबीआईआरआई) और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पार्टनरशिप प्रोग्राम (बीआईपीपी) सहित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सहायता मिल सकती है। इससे अनुसंधान को उद्यमों और उत्पादों में बदलने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि भारत ने नैनोफार्मास्युटिकल्स के लिए डीबीटी, आईसीएमआर और सीडीएससीओ द्वारा संयुक्त रूप से विकसित दिशानिर्देशों के माध्यम से एक नियामक ढांचा स्थापित किया है। यह ढांचा नैनोफार्मास्युटिकल उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के मूल्यांकन के लिए आधार प्रदान करता है।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि भारत चिकित्सा के अपेक्षाकृत इस नए क्षेत्र में पहले से ही आगे बढ़ रहा है और देश के पास भविष्य की स्वास्थ्य सेवा संबंधी समाधान विकसित करने में योगदान देने की वैज्ञानिक एवं संस्थागत क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश का विस्तारित अनुसंधान आधार, सरकारी सहयोग और उद्योग की बढ़ती भागीदारी भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की बजाय अपने स्वयं के समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. रोजर डी. कॉर्नबर्ग ने नैनोमेडिसिन को चिकित्सा का एक अपेक्षाकृत नया और तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र बताया, जिसमें भविष्य की स्वास्थ्य सेवा के लिए महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि नैनोमेडिसिन निवारण चिकित्सा का अवसर प्रदान करती है, जिसके माध्यम से सही मात्रा में उपचार को सही स्थान पर सही समय पर पहुंचाया जा सकता है। इससे उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने और विषाक्तता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अनुप्रयोगों में दवा वितरण, निदान, इमेजिंग और पुनर्योजी चिकित्सा शामिल हैं।

नैनोमेडिसिन पर विश्व कांग्रेस 2026 का आयोजन इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज (आईएसएनएस) और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर नैनो मेडिसिन (आईएसएनएम) के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह कांग्रेस वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और उद्योग जगत के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग विकसित करने और नैनोमेडिसिन के क्षेत्र में उभरते विकास से जुड़ने का एक मंच प्रदान करती है।

 

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पीके/केसी/आरटी/केपी


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