आयुष
अरावली में आयुर्वेद और पर्यावरण संरक्षण का संगम: अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत की साझा पहल
भाटी माइंस में 10,000 अश्वगंधा पौधों का रोपण और वैज्ञानिक निगरानी की पहल
प्रविष्टि तिथि:
25 SEP 2026 5:12PM by PIB Delhi
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली और 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत ने दक्षिण दिल्ली के भाटी माइंस स्थित टेरियर्स हर्बल गार्डन में अश्वगंधा पौधारोपण एवं अनुसंधान पहल की शुरुआत की है।
24 सितंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति, निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और कर्नल मोहन सिंह, कमांडिंग ऑफिसर, 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत ने किया।
संयुक्त पहल के तहत 10,000 अश्वगंधा (Withania somnifera (L.) Dunal) पौधों के रोपण और उनकी वैज्ञानिक निगरानी की योजना बनाई गई है। इसमें AIIA के आयुर्वेद, औषधीय पादप और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े अनुभव को 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत के पौधारोपण, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण सुधार के जमीनी अनुभव से जोड़ा गया है।

पौधारोपण के साथ-साथ अश्वगंधा पौधों की नियमित वैज्ञानिक निगरानी, अवलोकन और दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इससे अरावली क्षेत्र की स्थानीय जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों में अश्वगंधा की वृद्धि तथा अनुकूलन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह पहल आयुर्वेद के पारंपरिक औषधीय ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच समन्वय का अवसर भी प्रदान करेगी।
इस अवसर पर AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा, “यह पहल औषधीय पौधों से संबंधित समृद्ध आयुर्वेदिक ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान और पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन से जोड़ती है। अश्वगंधा आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है और इसके व्यवस्थित संवर्धन, संरक्षण एवं वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से ज्ञान सृजन के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकता है। इस प्रकार के सहयोग आयुर्वेद और प्रकृति तथा सतत विकास के बीच संबंध को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।”

कार्यक्रम में डॉ. मीना देवगड़े, विभागाध्यक्ष, द्रव्यगुण विभाग, AIIA, डॉ. शिवानी घिल्डियाल, एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. विधान महाजन, असिस्टेंट प्रोफेसर तथा विभाग के पीएचडी शोधार्थियों के साथ 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत के अधिकारी और सैन्यकर्मी उपस्थित रहे।
दोनों संस्थानों के बीच पौधारोपण पहल की योजना और क्रियान्वयन के समन्वय में 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत के मेजर जय सिंह शेखावत और AIIA के मेजर (डॉ.) आशीष कुमार की भूमिका रही।
भाटी माइंस में इस पहल की शुरुआत का पर्यावरणीय महत्व भी है। यह क्षेत्र दिल्ली के दक्षिणी रिज और अरावली परिदृश्य का हिस्सा है। 132 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) ईको राजपूत द्वारा खनन से प्रभावित और क्षरित क्षेत्रों में पौधारोपण तथा हरित पुनर्स्थापन का कार्य किया जा रहा है।
टेरियर्स हर्बल गार्डन में पहले से ही औषधीय एवं आयुर्वेदिक महत्व वाली लगभग 200 प्रजातियों का रोपण और संरक्षण किया गया है। इनमें हरसिंगार, आंवला और घृतकुमारी (एलोवेरा) जैसे प्रमुख औषधीय पौधे शामिल हैं। हर्बल गार्डन के समुचित रखरखाव, वैज्ञानिक प्रबंधन और मार्गदर्शन के लिए AIIA को तकनीकी सहयोग प्रदान करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अश्वगंधा को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय द्वारा इसके स्वास्थ्य संबंधी महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए “अश्वगंधा—एक स्वास्थ्य संवर्धक” अभियान भी चलाया गया है।
इस पहल का उद्देश्य औषधीय पौधों से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान को भाटी माइंस के पर्यावरण सुधार से जोड़ना है। इससे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के प्रयासों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
“आयुर्वेद की जड़ें—जैव विविधता का संरक्षण—पर्यावरण का पुनर्जीवन” के संदेश के साथ यह पहल भारत के पारंपरिक औषधीय ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और अरावली के हरित पुनर्स्थापन के प्रयासों से जोड़ती है।


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SR/SV/SG
(रिलीज़ आईडी: 2314925)
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