जल शक्ति मंत्रालय
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भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के तीसरे दिन जलवायु के प्रति लचीलापन, जल वित्त पोषण  और नवाचार पर ध्यान


चर्चाओं में जलवायु जोखिम के आकलन, शीघ्र चेतावानी प्रणाली, ग्लेशियल झील की निगरानी, ​​पानी के इस्तेमाल की दक्षता और इनोवेटिव फाइनेंसिंग जैसे विषयों पर चर्चा

दो त्रिपक्षीय समझौतों के ज़रिए भारत-नीदरलैंड्स सहयोग और प्रगाढ़ हुआ

प्रविष्टि तिथि: 24 SEP 2026 10:16PM by PIB Delhi

9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के तीसरे दिन तकनीकी कार्यक्रम और आगे बढ़ा। इसमें जलवायु जोखिम, शीघ्र चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग), ग्लेशियल झील की निगरानी, ​​पानी की कीमत और मज़बूत जल अवसंरचना के लिए वित्त पोषण जैसे भविष्योन्मुखी प्रश्नों पर चर्चा हुई। वॉटर लीडर्स फोरम, कंट्री फोरम, प्रैक्टिशनर्स फोरम, थीमैटिक फोरम और स्टार्ट-अप फोरम में एक साथ कई सत्र आयोजित किए गए। थीमैटिक फोरम में सात सब-थीम में से तीसरी संपन्न हुई और चौथे व पांचवें सब-थीम पर चर्चा की गई।

इस दिन इस आयोजन की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी बढ़ी। स्टार्ट-अप फोरम ने स्टार्ट-अप्स, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और शैक्षिक क्षेत्र के विद्वानों (एकेडेमिया) को पानी से जुड़ी समस्याओं के समाधान पेश करने के लिए मंच प्रदान किया। इसके साथ ही, द्विपक्षीय बैठक में भारत-नीदरलैंड्स सहयोग को आगे बढ़ाया गया और दो त्रिपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत-नीदरलैंड्स द्विपक्षीय बैठक

9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह-2026 के दौरान, नई दिल्ली के भारत मंडपम में जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और नीदरलैंड्स के अवसंरचना और जल प्रबंधन उप-मंत्री महामहिम श्री जाप स्लूटमेकर के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी, जल संसाधन और जल आपूर्ति (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री श्री ईश्वरसिंह पटेल और भारत में नीदरलैंड्स साम्राज्य की राजदूत महामहिम मारिसा जेरार्ड भी शामिल हुईं।

कार्यक्रम के दौरान, तकनीकी सहायता के लिए सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी), गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग और नीदरलैंड्स के डेल्टारेस के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए सीडब्ल्यूसी, गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग और नीदरलैंड्स के टीयू डेल्फ़्ट के बीच एक और त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते परियोजना की प्लानिंग, डिज़ाइन और कार्यान्वयन के लिए डच विशेषज्ञता और एडवांस्ड इंजीनियरिंग प्रैक्टिस को साझा करके तकनीकी सहयोग को आसान बनाएंगे।

 

कंट्री फ़ोरम (सी एफ)

 

विश्व बैंक के साथ मिलकर आयोजित ' जल क्षेत्र में निजी निवेश जुटाने' पर सीएफ-4 की अध्यक्षता डीईए, भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री बलदेव पुरुषार्थ ने की और सह-अध्यक्षता आईएफसी इंडिया की प्रिंसिपल कंट्री ऑफ़िसर श्रीमती रोशिका सिंह ने की। इस सत्र की शुरुआत विश्व बैंक के ग्लोबल वॉटर डायरेक्टर श्री सरोज कुमार झा के मुख्य भाषण से हुई और इसका संचालन विश्व बैंक के वॉटर प्रैक्टिस मैनेजर श्री विलियम रेक्स ने किया। इसमें जैन इरिगेशन, आईएफसी इंडिया, कोका-कोला, वीए टेक वाबाग, टाटा कैपिटल, महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फ़ॉर ट्रांसफ़ॉर्मेशन (एमआईटीआरए) और उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफ़ॉर्मेशन कमीशन ने शहरी जल, अपशिष्ट जल और सिंचाई में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी सुधारों और वित्त पोषण व्यवस्था पर चर्चा की।

 

 

वॉटर लीडर्स फ़ोरम (डब्ल्यूएलएफ)

 

जल संसाधन क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए पानी के उपयाेग की क्षमता को बेहतर बनाने' पर डब्ल्यूएलएफ-3 का आयोजन सीआईआई वॉटर इंस्टीट्यूट के सहयोग से किया गया। इसकी अध्यक्षता गुजरात सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (वॉटर रिसोर्स) श्री पी. सी. व्यास ने की और सह-अध्यक्षता सीआईआई वॉटर इंस्टीट्यूट की कार्यकारी निदेशक श्रीमती शिल्पा निश्चल ने की। इसमें ग्रंडफ़ोस, मुरुगप्पा वॉटर टेक्नोलॉजी, आयन एक्सचेंज, क्रित्सनम टेक्नोलॉजीज़ और नीति आयोग ने स्मार्ट मीटरिंग, मॉनिटरिंग और पानी के इस्तेमाल की क्षमता के लिए तकनीक पर चर्चा की।

 

 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच), रुड़की के सहयोग से आयोजित 'पानी की सुरक्षा के लिए क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट' पर डब्ल्यूएलएफ-4 की अध्यक्षता IISc बैंगलोर के प्रोफ़ेसर नागेश कुमार ने की और सह-अध्यक्षता एनआईएच रुड़की के निदेशक डॉ. वाई. आर. एस. राव ने की। इसमें ICHARM (जापान), आईआईटी बॉम्बे, आईआईएससी (IISc) बैंगलोर, सीडब्ल्यूसी और आईआईटी दिल्ली ने वॉटर गवर्नेंस और प्लानिंग फ़्रेमवर्क में क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट को शामिल करने पर चर्चा की।

 

 

सीईईडब्ल्यू के साथ सहयोग से आयोजित 'वॉटर गवर्नेंस और पॉलिसी में क्लाइमेट एक्शन को शामिल करने' पर डब्ल्यूएलएफ-5 की अध्यक्षता भारत सरकार के राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक श्री जोगिंद्र सिंह आईएएस ने की। उत्तर प्रदेश सरकार और इज़राइल दूतावास की वॉटर अताशे सुश्री नोआ एमसालेम की सह-अध्यक्षता में; आईआईटी गुवाहाटी, डब्ल्यूईएलएल लैब्स बेंगलुरु, एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक, गूगल, ऊर्जा परिषद काउंसिल, एनवायरनमेंट एंड वॉटर और डीसीएम श्रीराम के साथ मिलकर; जलवायु जोखिम के प्रबंधन से हटकर गवर्नेंस में सुधार के ज़रिए लचीलापन बनाने पर चर्चा हुई।

 

 

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित 'जल संसाधनों में जलवायु-अनुकूल अनुकूलन उपायों' पर डब्ल्यूएलएफ-6 की अध्यक्षता राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन श्री राकेश कश्यप ने की। इसकी सह-अध्यक्षता मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग के बोधि (BODHI) के पूर्व मुख्य अभियंता श्री मनोज कुमार आचार्य ने की। इसमें आईआईटी आईआईटी दिल्ली, एचसीएल फाउंडेशन, आईएमडी, जीआईजेड और एनडीएमए के सहयोग से बदलते मौसम में बांधों के लिए हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग, ग्लेशियल झील फटने से आने वाली बाढ़, और मिट्टी व पत्थर-भराव वाले बांधों के संरचनात्मक सुधार पर चर्चा की गई। इसके साथ ही जलवायु-अनुकूल बांध बुनियादी ढांचे के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण के अनुभव का भी लाभ उठाया गया।

 

प्रैक्टिशनर्स फोरम (पीएफ)

 

नेशनल वाटर मिशन के सहयोग से आयोजित 'बेस्ट प्रैक्टिसेज' (सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों) पर पीएफ-5 सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ सरकार के जल संसाधन सचिव श्री राजेश टोप्पो ने की। इसकी सह-अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के पूर्व चेयरमैन श्री अतुल जैन ने की। इसमें त्रिपुरा, तेलंगाना और सूरत के जिला कलेक्टरों और नगर आयुक्तों; तथा हिमालयी पर्यावरणीय अध्ययन और संरक्षण संगठन, ग्रामीण विकास मंत्रालय और 'द रेनवाटर प्रोजेक्ट' के प्रतिनिधियों ने जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों के साथ वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को जोड़ने पर चर्चा की; जल जीवन मिशन के अनुसार अब लगभग 81.5% ग्रामीण घरों में नल से पानी का कनेक्शन है।

 

'जल विवाद और समाधान' पर पीएफ-6 सत्र की अध्यक्षता सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी डॉ. श्रीनिवास चोक्काकुला ने की। इसकी सह-अध्यक्षता गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड के चेयरमैन श्री पी. दोरजे ग्याम्बा ने की। इसमें सीडब्ल्यूसी, सुप्रीम कोर्ट के वकीलों, नेशनल वाटर एकेडमी (पुणे) और नदी-बेसिन प्रबंधन बोर्ड के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद ढांचे के तहत प्रस्तावित विवाद समाधान समिति की समीक्षा की गई।

 

'जल-संस्कृति और हरित (HARIT) पाथवेज़:  लचीले भविष्य के लिए भारत की जल विरासत' पर पीएफ-7 सत्र की अध्यक्षता पद्म विभूषण और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने की। इसमें भारत की पारंपरिक जल संस्कृति, इसकी पवित्र नदियों, मंदिर के तालाबों और बावड़ियों को आधुनिक, जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन से जोड़ने और उस विरासत को समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों में शामिल करने पर चर्चा की गई।

 

थीमैटिक फ़ोरम (टीएफ)

 

दिन भर छह थीमैटिक फ़ोरम सत्र आयोजित किए गए। इनमें शॉर्टलिस्ट किए गए पेपर पेश किए गए, फ़ोरम के सात सब-थीम में से तीसरे सब-थीम को सम्पन्न किया गया और चौथे व पांचवें सब-थीम पर चर्चा की गई।

 

सब-थीम 3 और सब-थीम 4, 'जलवायु-संबंधी जोखिम में पानी': टीएफ-9 'डेटा-आधारित गवर्नेंस' की अध्यक्षता गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के चेयरमैन और सीडब्ल्यूसी के सदस्य (बाढ़) श्री शेर सिंह ने की। इसकी सह-अध्यक्षता केंद्रीय भूजल बोर्ड के सदस्य (एसएएम) श्री एस. जी. भरतारिया ने नेशनल वॉटर इंफॉर्मेटिक्स सेंटर, BISAG-N और आंध्र प्रदेश सरकार के साथ मिलकर की; टीएफ-10 'जलवायु जोखिम कम करने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम' की अध्यक्षता राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डॉ. कृष्णा वत्स ने की और सह-अध्यक्षता भारत मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक-G डॉ. डी.आर. पटनायक ने की; टीएफ-11 'ग्लेशियर झील के फटने (जीएलओएफ) की निगरानी' की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता श्री डी. पी. मथुरिया ने की और सह-अध्यक्षता एनआईएच रुड़की के वैज्ञानिक 'G' और सेंटर फॉर क्रायोस्फीयर एंड क्लाइमेट चेंज स्टडीज़ (C4S) के प्रमुख डॉ. सुरजीत सिंह ने की; और टीएफ-12 'जलवायु परिवर्तन: अनियमित बारिश' की अध्यक्षता भारत मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक-G डॉ. डी.एस. पाई ने की और सह-अध्यक्षता भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे के वैज्ञानिक E डॉ. अंकुर श्रीवास्तव ने भारत मौसम विज्ञान विभाग, CWPRS पुणे, एनआईएच रुड़की और सीडब्ल्यूसी के साथ मिलकर की। पेपर वॉटर इंफॉर्मेटिक्स और एआई -आधारित डेटा गवर्नेंस, सूखे और बाढ़ की भविष्यवाणी, एआई-संचालित बांध-सुरक्षा अर्ली वार्निंग, हिमालय में ग्लेशियर झील के फटने से बाढ़ के खतरे और निगरानी, ​​और बदलती जलवायु में लंबे समय तक बारिश और तापमान के ट्रेंड पर आधारित थे। इन पेपरों में स्वदेशी 'हिम झील नेत्र' (HIM JHEEL NETRA) ग्लेशियर-झील निगरानी प्रणाली, राष्ट्रीय स्तर की बाढ़ भविष्यवाणी प्रणाली, ब्रह्मपुत्र पर कटाव की मॉडलिंग और बांध सुरक्षा के लिए भू-भौतिकीय जांच शामिल थे। 

 

सब-थीम 5, 'इनोवेटिव फाइनेंसिंग मॉडल' के तहत दो सत्र हुए: टीएफ-13 'वॉटर फाइनेंस और इनोवेटिव फाइनेंसिंग मॉडल के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी' सत्र की अध्यक्षता एशियन डेवलपमेंट बैंक के साउथ एशिया, सेक्टर डिपार्टमेंट 2 (एग्रीकल्चर, फूड, नेचर और रूरल डेवलपमेंट सेक्टर ग्रुप) के डायरेक्टर मिस्टर ताकेशी उएदा ने की। उनके साथ सह-अध्यक्षता वर्ल्ड बैंक के सीनियर वॉटर स्पेशलिस्ट श्री राजेश आडवाणी ने की; टीएफ-14 'वॉटर यूज़र चार्ज के लिए पॉलिसी' सत्र की अध्यक्षता हरियाणा वॉटर रिसोर्स अथॉरिटी के सदस्य श्री संजय मारवाह ने की। उनके साथ सह-अध्यक्षता फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सोसाइटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री सुब्रत सिंह ने की। इन सत्रों में WASH इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्रीन फाइनेंस, केन-बेतवा लिंक के साथ सोलर पावर की संभावना और वॉटर यूज़र चार्ज के रीस्ट्रक्चरिंग (जिसमें सीजीडब्ल्यूए गाइडलाइंस और एआई-बेस्ड कैनाल-रिलीज़ ऑप्टिमाइज़ेशन का तुलनात्मक विश्लेषण शामिल था) पर चर्चा की गई। इस दौरान सिंचाई के लंबे समय तक टिकाऊपन के लिए जल उपयोग शुल्क को ज़रूरी ज़रिया बताया गया।

 

 

स्टार्ट-अप फ़ोरम (एसयूएफ )

 

स्टार्ट-अप फ़ोरम की अध्यक्षता विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने की। सत्र की सह-अध्यक्षता एसोचैम के महासचिव कर्नल सौरभ सान्याल ने की। इस फ़ोरम में स्टार्ट-अप, एमएसएमई और एकेडेमिया (शिक्षा जगत) की ओर से जल संसाधन प्रबंधन, अपशिष्ट जल उपचार, सिंचाई दक्षता और स्मार्ट जल प्रणालियों से जुड़े समस्या-आधारित समाधान दिखाए गए। इनमें स्टार्ट-अप, उद्योग और शिक्षा जगत की साझेदारी से विकसित प्रोटोटाइप भी शामिल थे। फ़ोरम ने स्टार्ट-अप को विशेषज्ञों और निवेशकों के पैनल के सामने व्यावहारिक और लागू करने योग्य समाधान पेश करने का अवसर भी दिया।

 

मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों के साथ जुड़ाव को भी मज़बूत किया है ताकि उन्हें जल क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके।

 

पिछले वर्ष शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से एआईसीटीई के साथ कई बैठकें आयोजित की गई। उसके बाद अब एआईसीटीई के सहयोग से 'जल सेवा अध्ययन' पहल लागू की जा रही है। विद्यार्थियों और शिक्षकों की 49 टीमों ने फरवरी से अप्रैल 2026 तक देश भर के 132 गांवों का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया और अपने अवलोकनों के आधार पर विस्तृत फ़ील्ड रिपोर्ट सौंपी। लगभग 50 प्रतिभागी विद्यार्थियों ने भारत मंडपम में अफ़्रीकी राजदूतों के साथ गोलमेज सम्मेलन में भी भाग लिया। गोलमेज सम्मेलन के बाद, "पेयजल की बात: जल शक्ति मंत्री के साथ" शीर्षक से विशेष बातचीत सत्र आयोजित किया गया। इससे विद्यार्थियों को जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व के साथ सीधे बातचीत करने और जल क्षेत्र में चुनौतियों, नवाचारों और अवसरों पर चर्चा करने का अनूठा अवसर मिला।

 

 

इस बातचीत में देश के जल क्षेत्र को मज़बूत करने में युवाओं की भागीदारी, नवाचार और सामुदायिक जुड़ाव के महत्व पर ज़ोर दिया गया। विद्यार्थियों को अपनी सीख को कक्षा से आगे ले जाने, वास्तविक दुनिया की चुनौतियों पर अपने तकनीकी ज्ञान को लागू करने और 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। चर्चा में ग्रामीण जीवन पर जल जीवन मिशन के परिवर्तनकारी प्रभाव, सुरक्षित पेयजल के महत्व, सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पानी की गुणवत्ता की निगरानी, डिजिटल तकनीक और एआई की बढ़ती भूमिका, और जल क्षेत्र की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए नवीन, व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर लागू करने योग्य समाधानों की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने विद्यार्थियों को संबोधन में इस बात पर बल दिया कि 'जल जीवन मिशन' केवल बुनियादी ढांचे का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, सम्मान, महिला सशक्तिकरण और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों से जल क्षेत्र के लिए नए और किफायती तकनीकी समाधान विकसित करने का आग्रह किया और पानी से जुड़ी चुनौतियों को हल करने में बातचीत और आम सहमति के महत्व पर ज़ोर दिया।

 

जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने विद्यार्थियों को दुनिया भर में अपनाए जा रहे बेहतरीन तरीकों का अध्ययन करने, एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने, और ग्रामीण समुदायों व ज़मीनी स्तर के इनोवेटर्स से सामने आ रहे समाधानों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 

 

पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीना ने इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की ज़मीनी हकीकत से परिचित कराने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि एआईसीटीई के सहयोग से जल प्रशासन से जुड़े शैक्षिक पाठ्यक्रम शुरू करने और देश भर के इंजीनियरिंग संस्थानों में 'जल सेवा अध्ययन' का दायरा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

 

जल संसाधन मंत्रालय की सचिव श्रीमती अर्चना वर्मा ने जल प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बदलाव लाने वाली क्षमता की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय विकास के लिए जन सेवा, नवाचार और टिकाऊ जल प्रबंधन में तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

 

राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपार सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन ने इस इंटरैक्टिव सेशन में पैनलिस्ट और विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने 'जल सेवा अध्ययन' और एआईसीटीई द्वारा शुरू किए जाने वाले जल प्रबंधन कोर्स के बारे में जानकारी दी।

 

तकनीकी सत्र

 

पहला तकनीकी सत्र, "जल आपूर्ति प्रणालियाँ: ओएंडएम, बुनियादी ढाँचा और स्रोत की स्थिरता," ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता को मज़बूत करने पर केंद्रित था। इसमें चार पेपर पेश किए गए, जिनमें जल आपूर्ति के बुनियादी ढाँचे का जीआईएस-आधारित मूल्यांकन, जल मूल्य निर्धारण रणनीतियाँ, टिकाऊ जल संसाधन प्रबंधन के लिए जल फुटप्रिंट का आकलन और पाइप से पेयजल आपूर्ति प्रणालियों में सामुदायिक स्वामित्व को मज़बूत करने के तरीके शामिल थे। चर्चाओं में भरोसेमंद जल सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी संचालन और रखरखाव, बुनियादी ढाँचे और संपत्ति प्रबंधन, वित्तीय स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर बल दिया गया।

दूसरा तकनीकी सत्र, "जल की गुणवत्ता, सुरक्षा और उभरते प्रदूषक," नई चुनौतियों के संदर्भ में जल सुरक्षा और गुणवत्ता प्रबंधन पर केंद्रित था। इस दौरान पाँच पेपरों में जल सुरक्षा के लिए समुदाय-आधारित जलवायु-अनुकूल उपायों, जल सुरक्षा योजना के लिए फील्ड टेस्ट किट के मूल्यांकन, उभरते प्रदूषकों और पर्यावरण कानूनों, भारत में जल गुणवत्ता की चुनौतियों और जल रिफिल स्टेशनों को ट्रैक करने के लिए डिजिटल टूल के इस्तेमाल की समीक्षा की गई। प्रस्तुतियों में जल गुणवत्ता की बेहतर निगरानी, ​​जल सुरक्षा योजना, सामुदायिक भागीदारी और तकनीक-आधारित तरीकों की ज़रूरत पर बल दिया गया।

एक और सत्र, "वित्तपोषण, आर्थिक मॉडल और तकनीकी-आर्थिक समाधान," में जल और स्वच्छता सेवाओं की वित्तीय और तकनीकी स्थिरता को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई। चार पेपरों में ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए नए मॉडल, अपशिष्ट जल उपचार और लागत वसूली, ग्रामीण पेयजल सेवाओं को बनाए रखने के लिए स्थानीय आर्थिक मॉडल और कम लागत वाले वायुमंडलीय जल संचयन समाधानों को शामिल किया गया।  इस सत्र में टिकाऊ जल सेवाओं को समर्थन देने में सही टेक्नोलॉजी, स्थानीय आर्थिक मॉडल, क्षमता विकास और नए तरीकों की भूमिका पर बल दिया गया।

चौथा तकनीकी सत्र, “ जलवायु लचीलापन, प्रकृति-आधारित समाधानों और स्वच्छता/अन्य,” क्लाइमेट से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए WASH सिस्टम के लचीलेपन को मजबूत करने के तरीकों पर केंद्रित था। चार पेपर में सीवेज स्लज मैनेजमेंट में डिजिटल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग एप्लीकेशन, स्टार्ट-अप्स और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए स्वच्छता  नवाचार, पानी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के तरीके, और WASH इंफ्रास्ट्रक्चर के एआई-इनेबल्ड मैकेनाइज्ड और रोबोटिक ऑपरेशन और मेंटेनेंस को शामिल किया गया। चर्चाओं में पानी और स्वच्छता में उभरती चुनौतियों से निपटने में प्रौद्योगिकी, नवाचार, साझेदारी और सिस्टम को मजबूत करने की भूमिका पर बल दिया गया।

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पीके/केसी/आरटी/पीके


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