कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के लिए वेब पोर्टल लॉन्च किया; स्वच्छता को संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र का आंदोलन बताया

2014 में शुरू हुआ स्वच्छता अभियान केवल एक सफाई पहल से बदलकर संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-राष्ट्र का आंदोलन बन गया है, और इसने अब तक कबाड़ निपटान के जरिए 5,000 करोड़ रुपये कमाए हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

विशेष अभियान 6 वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, ई-कचरा निस्तारण और लंबित मामलों को कम करने पर केंद्रित होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

पांच वर्षों में स्वच्छता अभियान ने 1,000 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान को मुक्त कराया, करीब 2 करोड़ फाइलों का निस्तारण किया और कबाड़ निस्तारण से 5,000 करोड़ रुपये अर्जित किए: डॉ. जितेंद्र सिंह

स्वच्छता अभियान जन आंदोलन बन चुका है, जो व्यवहार में बदलाव और बेहतर शासन को बढ़ावा दे रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 16 SEP 2026 6:30PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज विशेष अभियान 6 के वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में शुरू हुआ स्वच्छता अभियान एक साधारण स्वच्छता पहल से आगे बढ़कर संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र का आंदोलन बन चुका है। अब तक कबाड़ निस्तारण के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये अर्जित किए जा चुके हैं। इस अभियान ने व्यवहार में बदलाव लाने, सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ाने और कचरे से आर्थिक मूल्य सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/1(29)_20260916183137_21d486.jpg

शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अभियान सरकार के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह दिखाता है कि जब किसी राष्ट्रीय आह्वान के माध्यम से नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े बुनियादी मुद्दों को संबोधित किया जाता है, तो वह व्यापक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/2(28)_20260916183149_6317b1.jpg

कार्यक्रम में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव श्रीमती निवेदिता शुक्ला वर्मा, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री टी.के. अनिल कुमार, खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र, डाक विभाग के सचिव श्री सुब्रत दास सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं नोडल अधिकारी तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/3(29)_20260916183201_dddef5.jpg

 

अभियान ने यह भी साबित किया है कि व्यवस्थित स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से पर्याप्त आर्थिक मूल्य पैदा किया जा सकता है। पिछले पांच वर्षों में कबाड़ निस्तारण से 5,000 करोड़ रुपये अर्जित किए गए हैं। इस दौरान 1,000 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान को मुक्त कराया गया, 24 लाख से अधिक स्वच्छता अभियान स्थलों पर काम किया गया और बेहतर अभिलेख प्रबंधन के लिए करीब 2 करोड़ फाइलों का निस्तारण किया गया। ये उपलब्धियां बताती हैं कि अभियान अब केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग, लंबित मामलों में कमी, सार्वजनिक स्थानों के बेहतर इस्तेमाल और कचरे को संपदा में बदलने तक विस्तारित हो चुका है।

स्वच्छता पहल की शुरुआत को याद करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2014 में सरकार के कार्यभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की शुरुआती प्राथमिकताओं में स्वच्छता प्रमुख थी। 15 अगस्त, 2014 को स्वतंत्रता दिवस के अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता पर दिए गए जोर ने आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े इस बुनियादी मुद्दे को शासन के एजेंडे के केंद्र में ला दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल ने पारंपरिक यथास्थिति वाले दृष्टिकोण से हटकर जन-केंद्रित शासन पर अधिक जोर देने की दिशा भी तय की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वच्छता अभियान को मिले जनसमर्थन ने यह दिखाया कि स्पष्ट राष्ट्रीय आह्वान व्यापक जनभागीदारी और व्यवहार में बदलाव ला सकता है। शौचालयों के निर्माण, विशेष रूप से महिलाओं के लिए शौचालयों पर जोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने ग्रामीण और उपनगरीय क्षेत्रों में महिलाओं को होने वाली कठिनाइयों तथा पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं नहीं होने के कारण स्कूली छात्राओं को होने वाली परेशानियों की चर्चा की।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/4(28)_20260916183214_4c159d.jpg

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वच्छता अभियान पर मिली प्रतिक्रिया ने यह दिखाया कि कैसे एक स्पष्ट राष्ट्रीय आह्वान व्यापक जन भागीदारी और व्यावहारिक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि नौवीं कक्षा की एक छात्रा ने तब तक स्कूल जाना बंद कर दिया था, जब तक उसके घर और स्कूल में शौचालय का निर्माण नहीं हो गया। बाद में किए गए एक सर्वेक्षण में करीब 200 ऐसे परिवार सामने आए, जो इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे थे। इससे एक ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे का पता चला, जिस पर पहले पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था।

मंत्री ने कहा कि निरंतर चलाए गए स्वच्छता अभियान का एक बड़ा परिणाम लोगों के व्यवहार में आया बदलाव है। लोग अब सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने और स्वच्छता को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। साथ ही, अभियान ने कचरे को देखने के नजरिए में भी बदलाव किया है और कचरे से संपदाके सिद्धांत के माध्यम से इसके आर्थिक मूल्य को सामने रखा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष अभियान संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्रके प्रयास के शुरुआती उदाहरणों में से एक बन गया है। शुरुआत में यह फाइलों और कार्यालयों की सफाई से शुरू हुआ था और बाद में खाली स्थानों को मुक्त कराने, सार्वजनिक क्षेत्रों के बेहतर उपयोग और कबाड़ के व्यवस्थित निस्तारण तक विस्तारित हुआ। शुरुआती अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कबाड़ निस्तारण से शुरुआत में करीब 20 करोड़ रुपये अर्जित हुए थे। इससे सरकारी स्तर पर अनुपयोगी सामग्री के आर्थिक मूल्य और व्यवस्थित निस्तारण से संसाधन जुटाने की क्षमता सामने आई।

 

डॉ. सिंह ने कहा कि अभियान ने कार्यस्थल पर अनुशासन बढ़ाने और फाइलों के समय पर निस्तारण में भी योगदान दिया है। डैशबोर्ड और ऑनलाइन प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से मंत्रालय और विभाग समय-समय पर अपनी प्रगति का आकलन कर सकते हैं और क्रियान्वयन में सुधार कर सकते हैं। उन्होंने सरकारी संस्थानों में उपेक्षित और दुर्गम स्थानों के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियान ने ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें साफ करने और उत्पादक उपयोग में लाने का अवसर भी दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से 31 अक्टूबर, सरदार पटेल जयंती तक चलने वाली विशेष अभियान अवधि को केवल एक महीने की स्वच्छता गतिविधियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय यह पूरे वर्ष स्वच्छता, दक्षता और जवाबदेही बनाए रखने के संकल्प और प्रतिबद्धता को दोहराने का वार्षिक अवसर है। उन्होंने कहा कि पिछले अभियानों से प्राप्त अनुभव ने विशेष अभियान 6 के लिए मजबूत आधार तैयार किया है और इससे अभियान को अधिक केंद्रित एवं प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव श्रीमती निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि विशेष अभियान 6 केवल फाइलों और कार्यालयों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की कार्यसंस्कृति को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास है। इसका उद्देश्य दक्षता, स्वच्छता और जवाबदेही को सरकारी कामकाज की रोजमर्रा की विशेषता बनाना है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान देशभर के कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों को शामिल करने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल चुका है। इसमें दूरदराज के क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त संस्थान, विदेशों में स्थित मिशन और डाकघर, स्कूल तथा रेलवे स्टेशन जैसे नागरिकों से सीधे जुड़े संस्थान भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष अभियान 6 वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के अनुभव को आगे बढ़ाएगा। इसमें ई-कचरे के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और पर्यावरण के अनुकूल निस्तारण पर विशेष जोर दिया जाएगा तथा ई-कचरा प्रबंधन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्नत डिजिटल मंच तैयारी, क्रियान्वयन और मूल्यांकन के चरणों के दौरान वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा देगा। इसमें ई-कचरे की निगरानी के लिए एक समर्पित मॉड्यूल भी शामिल होगा।

उन्होंने मंत्रालयों और विभागों से नए उत्साह के साथ अभियान में भाग लेने और पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष अभियान को केवल वार्षिक स्वच्छता अभ्यास के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर शासन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने नागरिकों में जागरूकता बढ़ाई है, सरकारी कामकाज में अनुशासन लाया है, कचरे के मूल्य को सामने लाया है और सरकारी संस्थानों तथा पूरे समाज के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने में योगदान दिया है। विशेष अभियान 6 के आगे बढ़ने के साथ पिछले अभियानों से प्राप्त अनुभव अधिक जनभागीदारी, दक्षता और निरंतर प्रतिबद्धता के साथ इसे आगे ले जाने का अवसर प्रदान करता है।

*******

पीके / केसी / केजे / डीए


(रिलीज़ आईडी: 2311056) आगंतुक पटल : 81
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Marathi