कोयला मंत्रालय
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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया; थैलेसीमिया बाल सेवा योजना और नन्हा सा दिल के अंतर्गत उपलब्धियों का उत्सव मनाया


सीआईएल की प्रमुख सीएसआर योजनाओं के अंतर्गत 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट और 1,500 सुधारात्मक हृदय सर्जरी पूरी

प्रविष्टि तिथि: 08 SEP 2026 7:48PM by PIB Delhi

कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के साथ मिलकर आज नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी प्रमुख कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों—थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई) और नन्हा सा दिल—के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उत्सव मनाया तथा भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे तथा भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त के साथ वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, कार्यान्वयन भागीदार और लाभार्थी परिवार उपस्थित थे।

थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई)

थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया—दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों—से पीड़ित बच्चों की उपचार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शुरू की गई टीबीएसवाई देशभर में 4 अस्पतालों के प्रारंभिक नेटवर्क से बढ़कर 21 सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंच गई है। सीआईएल भारत का एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) है जिसने थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों के लिए इस स्तर की स्वास्थ्य सेवा पहल शुरू की है।

इस योजना के अंतर्गत चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की सहायता राशि सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को प्रदान की जाती है। अब तक 1,050 से अधिक बीएमटी पूरे किए जा चुके हैं और उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों में से भारी बहुमत अब सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी रहा है। इस योजना का कार्यान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसीमिक्स इंडिया के समन्वय से किया जा रहा है।

नन्हा सा दिल

जन्मजात हृदय दोष (सीएचडी) की समस्या से निपटने के लिए नन्हा सा दिल पहल शुरू की गई है। भारत में प्रतिवर्ष अनुमानित 2.4 लाख नवजात बच्चे जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होते हैं, जिनमें से केवल लगभग 5 प्रतिशत को समय पर उपचार मिल पाता है।

सीआईएल द्वारा मार्च 2024 में झारखंड के चार जिलों से श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में शुरू की गई इस पहल का विस्तार बाद में सीआईएल की सहायक कंपनियों—एसईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और डब्ल्यूसीएल—के माध्यम से किया गया। आधुनिक नैदानिक उपकरणों का उपयोग कर 2 लाख से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है और 1,500 से अधिक सुधारात्मक सर्जरी की गई हैं। मरीजों के परिवारों के लिए यह उपचार पूरी तरह निःशुल्क है, जिसमें यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है।

भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा

परिणामोन्मुख सीएसआर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कोयला मंत्रालय ने कोयला क्षेत्र के लिए सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया। कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत वैधानिक सीएसआर व्यवस्था लागू होने के बाद यह पहली क्षेत्र-विशिष्ट सीएसआर रूपरेखा है। इस रूपरेखा को भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा तैयार किया गया है और यह कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लाभ के लिए प्रभावशाली एवं परिणामोन्मुख सीएसआर हेतु एक मार्गदर्शक ढांचे के रूप में कार्य करेगी।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कोल इंडिया की निरंतर सीएसआर प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने थैलेसीमिया बाल सेवा योजना, नन्हा सा दिल और एसईसीएल की सुश्रुत सहित प्रमुख पहलों की सराहना की।

उन्होंने थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के हित के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों और अभिभावक संघों सहित समाज के सभी वर्गों की सहभागिता वाले दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने लाभार्थी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं में सहयोग का भी आश्वासन दिया।

 

 

कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को बेहतर उपचार, आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने थैलेसीमिया के उपचार और प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए अपनी सीएसआर पहलों के माध्यम से कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के प्रयासों की सराहना की।

 

 

कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त ने अपने संबोधन में जरूरतमंद बच्चों और परिवारों तक जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में कोल इंडिया की सीएसआर पहलों के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने डॉक्टरों, सूचीबद्ध अस्पतालों और भागीदार संगठनों के निःस्वार्थ योगदान की सराहना की तथा गुणवत्ता-सुनिश्चित देखभाल, वास्तविक समय में मामलों की निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और विस्तार क्षमता को इन पहलों की प्रमुख विशेषताओं के रूप में रेखांकित किया।

 

 

स्वागत संबोधन देते हुए कोयला मंत्रालय की अपर सचिव सुश्री रुपिंदर बरार ने कहा कि सीएसआर की वास्तविक भावना लोगों के जीवन को छूने, समुदायों को सशक्त बनाने और उन लोगों के लिए अवसर सृजित करने में निहित है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर हस्तक्षेप स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित हों, सुविचारित योजना से समर्थित हों और उनके परिणामों का ठोस उपलब्धियों के आधार पर आकलन किया जाए।

उन्होंने कहा कि नई रूपरेखा कोयला क्षेत्र में सीएसआर को अधिक संरचित, पारदर्शी और प्रभावोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक पहल का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर पहुंचे और मजबूत, स्वस्थ एवं अधिक सशक्त समुदायों के निर्माण में योगदान दे।

इस अवसर पर मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के ट्रांसप्लांट यूनिट प्रमुख डॉ. शांतनु सेन ने कहा कि भारत में हर वर्ष 10,000 से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि इन बच्चों का पूरा जीवन रक्त आधान कराने में बीत जाता है। इसके बावजूद, इनमें से कई बच्चे लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में इसका एकमात्र उपलब्ध उपचार बोन मैरो ट्रांसप्लांट है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीएमटी का अत्यधिक महंगा होना है। उन्होंने चिकित्सा समुदाय की ओर से इस अत्यंत महंगे उपचार को थैलेसीमिया बाल सेवा योजना नामक इस अभिनव, जीवनरक्षक और विशिष्ट कार्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए कोल इंडिया का आभार व्यक्त किया।

 

 

लाभार्थी बच्चों और उनके परिवारों ने भी कोल इंडिया लिमिटेड, कोयला मंत्रालय, डॉक्टरों, अस्पतालों और भागीदार संगठनों द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बच्चों ने बताया कि समय पर उपचार ने उन्हें नई आशा, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की ओर देखने का अवसर दिया है।

उनके शब्दों और मुस्कान में सीएसआर का वास्तविक प्रभाव झलक रहा था—जो केवल आंकड़ों या परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में आए बदलाव, फिर से साकार हुए सपनों और अधिक उज्ज्वल बने भविष्य में दिखाई देता है।

 

 

कार्यक्रम में टीबीएसवाई पर एक पुस्तक का विमोचन, स्वास्थ्य क्षेत्र में सीआईएल की सीएसआर पहलों पर लघु फिल्मों का प्रदर्शन, डॉक्टरों एवं विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान तथा लाभार्थी परिवारों के साथ संवाद भी आयोजित किया गया।

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पीके/केसी/एके/डीए


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