राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
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राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की गांधीनगर में दो दिवसीय गुजरात जन सुनवाई और शिविर बैठक संपन्न हुई


शिकायतकर्ताओं, पीड़ितों और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में बंधुआ मजदूरी सहित 129 मामलों की सुनवाई की गई

मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को 3.7 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई

वरिष्ठ अधिकारियों को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित मुद्दों पर जागरूक किया गया; आयोग ने उनके प्रयासों की सराहना की

आयोग ने आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए सिविल सोसाइटी, एनजीओ के प्रतिनिधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ भी बातचीत की

प्रविष्टि तिथि: 03 SEP 2026 8:35PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन के नेतृत्व में आज गुजरात के गांधीनगर में दो दिवसीय जन सुनवाई और शिविर बैठक संपन्न हुई। अध्यक्ष और सदस्यों, न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी तथा श्रीमती विजया भारती सयानी ने राज्य में बंधुआ मजदूरी सहित मानवाधिकारों के उल्लंघन के 129 कथित मामलों की सुनवाई की। इस दौरान शिकायतकर्ता, पीड़ित और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी भी उपस्थित थे।

आयोग ने पहले दिन 45 मामलों में संबंधित पक्षों की बात सुनने के बाद 27 मामले बंद कर दिए। कई मामलों में 3.5 करोड़ रुपये के मुआवज़े के भुगतान के प्रमाण प्रस्तुत किए गए।

मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के विभिन्न मामलों पर कार्रवाई की गई। एक मामले में 7.5 लाख रुपये के मुआवजे की सिफारिश की गई जिसमें एक महिला को कथित तौर पर बिना उचित नोटिस के गिरफ्तार किया गया था। हिरासत में हुई मौतों, प्रशासनिक लापरवाही के कारण होने वाली मौतों और पुलिस ज्यादतियों के अलावा, बच्चों से जुड़े दुःखद मामलों की भी सुनवाई की गई। एक अन्य मामले में, जहां एक बच्चे को एक कुत्ता उठा ले गया था और उसका कुछ पता नहीं चला, परिवार को मुआवजा देने की सिफारिश की गई है।

गुजरात भर की फैक्ट्रियों में श्रमिकों की मौत से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई हुई। भरूच की एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग और विस्फोट के बाद जान गंवाने वाले पांच श्रमिकों के परिवारों को मुआवज़ा मिला। दहेज के एक रासायनिक संयंत्र में जहरीली गैस के कारण हुई एक और दुःखद घटना में मारे गए चार श्रमिकों के परिवारों को कुल 2 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवज़ा दिया गया। इसी तरह, अहमदाबाद में एक बड़े विज्ञापन होर्डिंग के गिरने से मारे गए तीन श्रमिकों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई है, हालांकि मुआवज़े का विवरण अभी आना बाकी है। ये मामले आयोग के दृढ़ रुख को दर्शाते हैं कि औद्योगिक लापरवाही से होने वाली जान-माल की हानि के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए और पीड़ितों के परिवारों को उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए। आयोग ने स्कूल के बुनियादी ढांचे की विफलताओं और अनुसूचित जाति के समुदायों के लिए श्मशान घाटों की कमी के मुद्दों पर भी संज्ञान लिया तथा सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज सुनवाई के दूसरे दिन, एनएचआरसी के अध्यक्ष ने राज्य में कथित बंधुआ मजदूरी के 27 मामलों की सुनवाई की। इस दौरान गुजरात के श्रम सचिव और संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट भी उपस्थित थे। आयोग ने जिला मजिस्ट्रेटों की दलीलों को सुना और इन मामलों से जुड़ी रिपोर्टों पर विचार किया। उन्होंने अधिकारियों को महिलाओं और बच्चों के मामलों में संवेदनशील रहने और ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करते समय बंधुआ मजदूरी के संकेतों पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और श्रीमती विजया भारती सयानी की खंडपीठ ने अनुपालन मामलों और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की अन्य शिकायतों सहित 57 मामलों की सुनवाई की और पक्षों को सुनने तथा मृतक के परिजनों को 27 लाख रुपये के मुआवजे के भुगतान के प्रमाण के साथ अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद 46 मामलों को बंद कर दिया। शेष मामलों में अधिकारियों से आगे की रिपोर्ट मांगी गई है।

आयोग ने एनजीओ, सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से भी बातचीत की। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के बेहतर कार्यान्वयन; पॉक्सो पीड़ितों के लिए न्याय; कम उम्र की लड़कियों की संस्थागत देखभाल; सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और असंगठित क्षेत्र में पॉश अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ने हितधारकों और आयोग के बीच बेहतर तालमेल की बात को माना।

इसके बाद, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। इनमें रिपोर्ट न सौंपना, बंधुआ मजदूरी के मामलों पर संबंधित अधिकारियों को जागरूक करना, पुलिस द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन और निषेध कानूनों के उचित कार्यान्वयन की आवश्यकता जैसे मुद्दे शामिल थे। अध्यक्ष ने मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत दिलाने में अधिकारियों के सहयोग की सराहना की। जन सुनवाई और शिविर बैठक मीडिया ब्रीफिंग के साथ संपन्न हुई।

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पीके/केसी/एसके


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