सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग और रामकृष्ण मिशन ने तीन पीढ़ियों के बीच आपसी रिश्तों को मज़बूत करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए


200 पायलट स्कूलों को शामिल करने और बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी को करीब लाने की देशव्यापी पहल

केंद्रीय मंत्री श्री वीरेंद्र कुमार ने कहा, ‘जब हर पीढ़ी साथ चलती है, तो देश आगे बढ़ता है’

प्रविष्टि तिथि: 01 SEP 2026 6:43PM by PIB Delhi

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) ने आज राष्ट्रीय राजधानी में रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन (आरकेएम) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

इस एमओयू पर हस्ताक्षर करने का उद्देश्य ‘पीढ़ियों के बीच आपसी रिश्तों को लागू करना है। यह एक देशव्यापी पहल है जिसका मकसद स्कूल प्रणाली के ज़रिए बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव मज़बूत करना है।

इस एमओयू पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा, डीओएसजेई के संयुक्त सचिव श्री सजीश कुमार एन., डीओएसजेई की निदेशक सुश्री काजल सिंह और आरकेएम के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद के साथ-साथ दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

इस एमओयू पर हुए हस्ताक्षर बुजुर्गों के सम्मान और हर पीढ़ी के समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विज़न को प्रतिबिंबित करता है कि 'सबका साथ, सबका विकास' तभी पूरा होता है, जब हर पीढ़ी एक साथ आगे बढ़ती है।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि परिवार हमारे समाज की आधारशिला हैं और रामकृष्ण मिशन के साथ यह सहयोग हमारे बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी को साथ रहने के महत्व को फिर से समझने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए हर पीढ़ी को साथ चलना होगा, जो 'सबका साथ, सबका विकास' की सच्ची भावना है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हमारी सरकार देश भर में पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन के साथ एमओयू एक ऐसा मॉडल बनाने में मदद करेगा, जिसे दोहराया जा सकता हो और जो हमारे स्कूलों के माध्यम से तीन पीढ़ियों को एक-दूसरे के करीब लाता हो।

आरकेएम के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने कहा कि रामकृष्ण मिशन शिक्षा और चरित्र-निर्माण के माध्यम से सेवा में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि मिशन को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के साथ साझेदारी करने में खुशी है, ताकि परिवारों को अपने बुजुर्गों की समझदारी को फिर से जानने और साझा मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सके।

अपने संबोधन की शुरुआत में, डीओएसजेई के संयुक्त सचिव श्री सजीश कुमार एन. ने इस पहल के लिए विभाग के विज़न को रेखांकित किया और परिवार की भागीदारी के स्थायी, स्कूल-आधारित मॉडल बनाने की दिशा में एक कदम के रूप में रामकृष्ण मिशन के साथ सहयोग का स्वागत किया।

रामकृष्ण मिशन के एक अधिकारी ने धन्यवाद प्रस्ताव में मंत्रालय को उसके सहयोग के लिए और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाले सभी गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया।

 

इस एमओयू के तहत देश के चार क्षेत्रों के 50 प्रतिनिधि स्कूलों में गंभीर अध्ययनों के माध्यम से आधुनिक परिवारों के सामने पीढ़ियों से संबंधित चुनौतियों पर शोध किया जाएगा। इसमें स्कूलों में इस्तेमाल के लिए सबूत-आधारित 20 'सह-शिक्षा ज्ञान प्राप्ति खेल का डिज़ाइन, पायलट-परीक्षण और उन्हें अंतिम रूप देना भी शामिल है।

 

शिक्षकों को सत्र आयोजित करने में मदद करने के लिए एक द्विभाषी (अंग्रेजी-हिंदी) संसाधन केंद्र वेबसाइट विकसित की जाएगी। इस पहल में शिक्षकों के लिए प्रमाणपत्र प्रशिक्षण और देश भर के 200 पायलट स्कूलों में सह-शिक्षा ज्ञान प्राप्ति खेल सत्रों की शुरुआत भी शामिल होगी।

 

एक स्वतंत्र मूल्यांकन अध्ययन इस पहल के परिणामों का आकलन करेगा और देश भर में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के बारे में जानकारी देगा।

 

यह पहल मंत्रालय के मौजूदा वरिष्ठ नागरिक कल्याण इकोसिस्टम, जिसमें 'अटल वयो अभ्युदय योजना' (एवीवाईएवाई) भी शामिल है, पर आधारित है। इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि बुजुर्ग अपनी समझ और मूल्य अगली पीढ़ी को सौंप सकें, माता-पिता परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का काम कर सकें, और बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हुए और भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करते हुए बड़े हो सकें।

 

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन - जो श्री रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं से प्रेरित संस्था है, जो  शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और मानवीय कार्यों में एक सदी से अधिक समय से सेवा कर रही है - इस पहल के लिए कार्यान्वयन भागीदार के रूप में काम करेंगे। एक 'ज्ञान विकास साझीदार' शोध, डिज़ाइन और मूल्यांकन के कामों में सहयोग करेगा।

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पीके / केसी / जेके  


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