पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण ने जैव-विविधता संरक्षण के लिए पहुँच एवं लाभ-साझाकरण निधि में 5.68 करोड़ रुपये जारी किए
प्रविष्टि तिथि:
30 AUG 2026 9:09PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण(एनबीए) ने जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न पहुंच एवं लाभ-साझाकरण(एबीएस) तंत्र के अंतर्गत 5.68 करोड़ की राशि वितरित की है। यह धनराशि मुख्य रूप से भिंडी, खीरा और तरबूज के अलावा निर्दिष्ट सूक्ष्मजीवों एवं कृषि जैविक संसाधनों के संबंध में राज्य जैव विविधता बोर्डों(एसबीबी), केन्द्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों(यूटीबीसी) और एक राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान को भेजी गई है।
सबसे बड़ा एबीएस घटक भिंडी से संबंधित है, जिसमें 139 किस्में और 28 हाइब्रिड किस्में शामिल हैं। इसके लिए एनबीए ने 32 राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को ₹3.51 करोड़ जारी किए हैं। यह एबीएस राशि एम/एस ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से भिंडी तक पहुंच के संबंध में प्राप्त हुई थी।
अन्य प्रमुख एबीएस घटक तरबूज और खीरा से संबंधित है। इनमें तरबूज की 662 किस्में और 15 हाइब्रिड, तथा खीरे की 1009 किस्में और 14 हाइब्रिड शामिल है। इन जैविक संसाधनों तक एम/एस ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस बेयर विज्ञान और नवाचार प्राइवेट लिमिटेड ने बाजारों/व्यापारियों के माध्यम से प्राप्त किया था।
राज्य जैव-विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव-विविधता परिषदों में एबीएस राशि प्राप्त करने वाले प्रमुख निकाय निम्नलिखित हैं:
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क्रम संख्या
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राज्य/यूटी
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जारी की गई राशि (रु.)
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1.
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गुजरात
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88,79,304
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2.
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पश्चिम बंगाल
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78,08,691
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3.
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मध्य प्रदेश
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64,90,418
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4.
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ओडिशा
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59,01,641
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5.
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बिहार
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45,59,602
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6.
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उत्तर प्रदेश
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36,90,952
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7.
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तमिलनाडु
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34,11,119
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8.
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आंध्र प्रदेश
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30,58,472
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9.
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छत्तीसगढ़
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24,82,991
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10.
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महाराष्ट्र
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17,57,359
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11.
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अन्य
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87,77,728
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कुल
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5,68,18,277
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इन मामलों में, जैविक संसाधनों तक बाजारों और व्यापारियों के माध्यम से पहुंच प्राप्त की गई थी। इसलिए उन्हें किसी विशिष्ट किसान, समुदाय या एक निश्चित भौगोलिक स्रोत से जोड़ना संभव नहीं था। अतः विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित और प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार, लाभार्थी हिस्से का वितरण उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच किया जाएगा, जहां संबंधित जैविक संसाधन की खेती की जाती है।
इसके अलावा, एनबीए ने एम/एस हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड(एचपीसीएल), मुंबई से प्राप्त एबीएस राशि में से सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला(एनसीएल) – राष्ट्रीय औद्योगिक सूक्ष्मजीव संग्रह(एनसीआईएम), पुणे को भी लाभ-साझाकरण निधि जारी किया है।
एसबीबी और यूटीबीसी को वितरित की गई धनराशि का उपयोग जैव-विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32 के अनुसार, अधिनियम के उद्देश्यों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के लिए किया जाना है। इनमें जन जैव-विविधता रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण और अद्यतन; जैविक संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग; क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों का पुनर्स्थापन; खेती किए जाने वाले पौधों के जंगली संबंधियों का संरक्षण; जैव-विविधता विरासत स्थलों को सुदृढ़ करना; जैव-विविधता संबंधी डेटाबेस का विकास और रखरखाव; क्षमता निर्माण; अनुसंधान; तथा समुदाय-केंद्रित आजीविका संवर्धन गतिविधियां शामिल हैं।
अनुसंधान संस्थान को वितरित की गई धनराशि का उपयोग जैविक संसाधनों के भंडारों के रखरखाव, अनुसंधान एवं जैव-सर्वेक्षण गतिविधियों, वर्गीकरण विज्ञान और संरक्षण के क्षेत्र में क्षमता निर्माण तथा इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण जैसी गतिविधियों के लिए किया जाना है।
इस भुगतान के साथ, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण(एनबीए) द्वारा अब तक वितरित की गई कुल एबीएस राशि 191 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह भुगतान एनबीए की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि भारत के जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों को जैव-विविधता संरक्षण, सतत उपयोग, संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने तथा जैव-विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग से जुड़े समुदायों एवं अन्य हितधारकों के लाभ के लिए उपयोग किया जाए।
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पीके/केसी/पीकेपी/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2304780)
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