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इंडियाएआई मिशन ने भारत के एआई-अनुकूल डेटा इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एआईकोष विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया


उद्योग जगत, सरकार, शिक्षाविदों और स्टार्टअप्स ने डेटा शासन, सामंजस्य और एआई-अनुकूल डेटा के जिम्मेदार उपयोग पर विचार-विमर्श किया

प्रविष्टि तिथि: 20 AUG 2026 7:06PM by PIB Delhi

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आज इंडियाएआई मिशन के तहत राष्ट्रीय डेटासेट और मॉडल प्लेटफॉर्म, एआईकोष पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सरकार, उद्योग, शिक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रतिनिधियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए भारत के डेटा की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

दिन की शुरुआत इंडियाएआई मिशन के निदेशक श्री मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला. के. के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने प्रतिनिधियों को एआईकोष का परिचय दिया, इसके बाद इंडियाएआई मिशन के सीओओ श्री सुदीप श्रीवास्तव ने उद्घाटन भाषण देकर दिन का एजेंडा बताया।

"डेटा राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में: सॉवरेन एआई के लिए भारत की ज़रूरत" विषय पर बात करते हुए, इंडियाएआई मिशन के सीईओ श्री सौरभ विजय ने भारत के सॉवरेन एआई लक्ष्यों के लिए डेटा के रणनीतिक महत्व और नवाचार व राष्ट्रीय विकास के लिए देश की डेटा परिसंपत्तियों के पूरे मूल्य का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

 “एआईकोष वह प्लेटफ़ॉर्म है, जो भारत ने इस इकोसिस्टम के लिए प्रदान किया है। अगर हमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ के साथ का मुक़ाबला करना है, तो इस पहल का हमारा सामूहिक स्वामित्व ही इसे उस वैश्विक मानक तक ले जाएगा।“

 

श्री सौरभ विजय, सीईओ, इंडियाएआई मिशन

कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने किया, जिन्होंने भारत के डेटा इकोसिस्टम को मजबूत करने और उभरती एआई क्षमताओं का समर्थन करने के लिए डेटा के जिम्मेदार उपयोग को सक्षम करने के महत्व को रेखांकित किया।

 “इंडियाएआई मिशन के साथ मिलकर हम जिस प्रमुख चुनौती को हल कर रहे हैं, वह यह सुनिश्चित करना है कि डेटा सभी मंत्रालयों में खोजने योग्य, समझने योग्य, अंतःसंचालनीय और सुरक्षित रूप से सुलभ हो।"

डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, एमओएसपीआई

इसके बाद “एआईकोष का अवलोकन: वर्तमान और भविष्य का दृष्टिकोण” पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसे श्रीमती शिखा दहिया, संयुक्त निदेशक, इंडियाएआई मिशन और श्री स्वदीप सिंह, महाप्रबंधक, डेटा साइंस, इंडियाएआई मिशन ने संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया।

 

डेटा शासन और साझा करने पर विचार-विमर्श

पहले सत्र, “विचार नेतृत्व: बड़े पैमाने पर एआई डेटा का उपयोग,” में उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के डेटा और एआई विशेषज्ञ   एक साथ आये, जिसमें गूगल डीपमाइंड, यूआईडीएआई, विश्व बैंक, आईआईटी जोधपुर, एकस्टेप और कोरोवर.एआई के प्रतिनिधि शामिल थे। इन प्रतिनिधियों ने कानूनी तौर पर उपयुक्त डेटा साझाकरण, निजता की सुरक्षा के साथ इस्तेमाल, और डेटा की कुछ विशेष श्रेणियों को साझा करने के पक्ष और विपक्ष पर पैनल चर्चा की। इस सत्र का संचालन श्री सुहेल बिदानी, उप-निदेशक, डिजिटल और एआई, गेट्स फ़ाउंडेशन ने किया और इसका समापन दर्शकों के साथ खुली चर्चा के साथ हुआ।

 

सत्र के बाद तीन छोटे संबोधन हुए: श्री नंद कुमारम, सीईओ, नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीज़न (NeGD) का “शासन में एआई के लिए डेटा का उपयोग करना” विषय पर संबोधन; यूआईडीएआई की उप महानिदेशक सुश्री तनुश्री देब बर्मा का "डिजिटल सार्वजनिक भलाई के लिए डेटा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल" विषय पर संबोधन; और सॉकेटएआई के संस्थापक और सीईओ श्री अभिषेक उप्परवाल का "खुले डेटा इकोसिस्टम की ज़रूरतें" विषय पर संबोधन।

 

एआई निर्माताओं की जरूरतों को समझना

दूसरा सत्र, “डेवलपर इकोसिस्टम की जरूरतें,” में मॉडल निर्माता, क्षेत्रीय नवप्रवर्तक और डेटा संग्रहकर्ता एक साथ आए ताकि उन डेटासेट, प्लेटफॉर्म्स और डेटा संरचना पर विचार किया जा सके, जो भारत के संदर्भ में एआई अनुप्रयोग और बुनियादी मॉडल बनाने के लिए जरूरी हैं। इस सत्र का संचालन डॉ. संतोष मिश्रा, पार्टनर, पीडब्लूसी ने किया और इसका समापन दर्शकों के साथ खुली चर्चा के रूप में हुआ।

 

क्षेत्र-वार विस्तृत विश्लेषण: डेटा से लेकर इस्तेमाल के उदाहरणों तक

दोपहर में, प्रतिनिधि तीन समानांतर गोलमेज में बंट गए: स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान; कृषि और आजीविका; और शिक्षा, विज्ञान और तकनीक, प्रत्येक गोलमेज की शुरुआत सुबह सत्रों से उभरने वाले प्रमुख जानकारियों और प्रश्नों पर एक छोटी प्रस्तुति के साथ हुई।

तीनों गोलमेज बैठकों में, प्रतिभागियों ने प्रमुख अवसरों की पहचान की, उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक डेटासेट्स, डेटा रखने वालों द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख चुनौतियों और जिम्मेदार डेटा साझाकरण को सक्षम करने के संभावित तरीकों पर चर्चा की।

 

भारत के एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एमओयू  

कार्यशाला के हिस्से के रूप में, इंडियाएआई, राष्ट्रीय ई-शासन प्रभाग (एनईजीडी) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना केंद्र (सीडीपीआई) ने अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु (आईआईआईटी-बी) के माध्यम से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, ताकि भारत के एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना इकोसिस्टम को मजबूत करने में आपसी सहयोग बढ़ाया जा सके। यह साझेदारी इंडियाएआई और एनईजीडी को तकनीकी, संरचनात्मक, नीतिगत और ज्ञान संबंधी सहयोग मुहैया कराएगी, जिसमें बड़े पैमाने पर एआई-आधारित शासन समाधान तैयार करना और एआईकोष पर एआई के लिए तैयार डेटासेट, मॉडल और अन्य संसाधनों के लिए आसानी से और सुरक्षित रूप से डेटा का आदान-प्रदान करना शामिल है।

यह एमओयू ज्ञान के आदान-प्रदान, इकोसिस्टम की भागीदारी और भारत के एआई और डीपीआई इकोसिस्टम का समर्थन करने के लिए रूपरेखा, टेम्पलेट, डैशबोर्ड, प्रोटोटाइप और परीक्षण वातावरण के विकास को भी आसान बनाएगा।

भारतएआई मिशन और एकस्टेप फाउंडेशन के बीच भारत के एआई भविष्य की ओर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दूसरे  समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किये गये। इस समझौते पर श्री सुदीप श्रीवास्तव, सीओओ, इंडियाएआई मिशन और श्री जगदीश बाबू, सीओओ, एकस्टेप फाउंडेशन ने हस्ताक्षर किये।

इस साझेदारी का लक्ष्य सामूहिक समझ, किफायती और आसानी से बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले एआई परिचालन प्रणाली, ओपन-गेट मॉडल, प्लेटफॉर्म और समाधानों को बढ़ावा देना है। ये सभी मिलकर पूरे इकोसिस्टम की क्षमताओं को एक साथ लाते हैं, ताकि बड़े पैमाने पर सुलभ और प्रभावी एआई नवाचार को संभव बनाया जा सके।

 

कार्रवाई-उन्मुख डेटा इकोसिस्टम की दिशा में

कार्यशाला का समापन एक समीक्षा सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रत्येक समूह के संचालकों  ने चर्चाओं और प्रस्तावित कार्यों का ब्योरा पेश किया। आगे की कार्रवाई के लिए पहचाने गए मुख्य क्षेत्रों में शामिल थे: ज़्यादा अहमियत वाले डेटासेट को प्राथमिकता देना, डेटा तालमेल को मज़बूत करना, निजता का ध्यान रखते हुए डेटा आदान-प्रदान की क्षमताएं विकसित करना, डेटा संरक्षकों की चिंताओं का समाधान करना, और एआईकोष में शामिल करने के लिए डेटा स्ट्रीम की पहचान करना।

मुख्य भाषण देते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सचिव श्री एस. कृष्णन ने भारत के एआई लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए डेटा के ज़िम्मेदार और प्रभावी इस्तेमाल हेतु एक अनुकूल इकोसिस्टम बनाने के महत्व पर ज़ोर दिया।

“किसी भी तकनीक का सबसे अहम पहलू यह है कि समाज पर उसका क्या असर होता है, यह जीवन की गुणवत्ता को कैसे बेहतर बनाती है और देश के लोगों को क्या देती है। भारत के लिए, एआई जैसी व्यापक और हर क्षेत्र में काम आने वाली तकनीक का इस्तेमाल करने का यह एक शानदार मौका है, ताकि देश 2047 तक 'विकसित भारत' बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ सके।”

 

– श्री एस. कृष्णन, सचिव, एमईआईटीवाई

 यह कार्यशाला भारत के डेटा इकोसिस्टम को मजबूत करने और डेटा संरक्षकों, तकनीक विकसित करने वालों और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल को सक्षम बनाने की दिशा में एक कदम है, ताकि बड़े पैमाने पर एआई नवाचार को आगे बढ़ाया जा सके।

 

एआईकोष के बारे में

इंडियाएआई मिशन के तहत एआईकोष, डेटासेट, एआई मॉडल और संबंधित संसाधनों के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म है। भारत के एआई इकोसिस्टम के लिए एआई-तैयार संसाधनों को आसानी से खोजने, उन तक पहुँचने और उनके ज़िम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए इसे डिजाईन किया गया है। एआईकोष में अभी 15,000 से ज़्यादा डेटासेट, 300 एआई मॉडल और 30 टूलकिट मौजूद हैं, जो शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, डेवलपर और छात्रों को भरोसेमंद राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग करके एआई  समाधान बनाने में मदद करते हैं।

 

इंडियाएआई मिशन के बारे में

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत इंडियाएआई मिशन, कंप्यूटर गणना क्षमता, डेटा सेट और मॉडल्स, नवाचार, एआई अनुप्रयोग, भविष्य के कौशल, स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित और भरोसेमंद एआई जैसी पहलों के माध्यम से भारत के एआई इकोसिस्टम को आगे बढ़ा रहा है।

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