ग्रामीण विकास मंत्रालय
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ग्रामीण अवसंरचना हेतु एकीकृत मास्टर प्लान

प्रविष्टि तिथि: 11 AUG 2026 6:00PM by PIB Delhi

अपनी व्यापक नीतिगत रूपरेखा के तहत, ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) देश के ग्रामीण क्षेत्रों के एकीकृत और सतत विकास के लिए विभिन्न लक्षितपहलेंकर रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास, आजीविका के अवसरों को बढ़ाने, ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और आजीविका के अवसरों का विस्तार करने पर मुख्य ध्यान केंद्रित करते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों सहित पूरे देश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), विकसित भारत - रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) और दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) को कार्यान्वित कर रहा है।

कार्यक्रमों के कार्यान्वयन ढांचे के अनुसार, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र ग्रामीण आबादी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पहलों की वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सड़कों और टिकाऊ संपत्तियों सहित बुनियादी ढांचे के लिए परियोजना प्रस्ताव, लाभार्थियों की पहचान, रोजगार के लिए मांग का सृजन, आजीविका कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। देश में ग्रामीण विकास की गति को अनुकूलतम बनाने के लिए उपर्युक्त कार्यक्रमों को विभिन्न केंद्रीय और राज्य की योजनाओं के साथ अभिसरण में कार्यान्वित किया जाता है। हालांकि, वर्तमान में, इस मंत्रालय में प्रत्येक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे और आजीविका विकास के लिए एक एकीकृत मास्टर प्लान का कोई प्रस्ताव नहीं है।

 

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रदर्शन समीक्षा समिति की बैठकों, राष्ट्रीय स्तर के मॉनिटरों (एनएलएम), क्षेत्र अधिकारी योजनाओं, सामान्‍य समीक्षामिशन, मध्यावधि समीक्षा, श्रम बजट बैठकों, श्रमबजट संशोधन बैठकों, कार्यक्रम समीक्षा बैठकों, समवर्ती मूल्यांकन और प्रभाव आकलन अध्ययनों के माध्यम से अपनी ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति और परिणामों के आवधिक आकलन एवं समीक्षा की एक व्यापक बहु-स्तरीय और बहु-प्रारूप प्रणाली विकसित की है। समय-समय पर राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की विशिष्ट समीक्षाएं भी की जाती हैं और उनके निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई की जाती है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण विकास मंत्रालय जिला स्तर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजनाओं/कार्यक्रमों सहित प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संसद, राज्य विधान सभाओं और स्थानीय सरकारों (पंचायती राज संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों) के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संबंधित संसद सदस्यों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय विकास समन्वय और निगरानी समितियों का गठन करता है।

 

यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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आर सी/ पीयू


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