ग्रामीण विकास मंत्रालय
प्रवासन संबंधी अध्ययन
प्रविष्टि तिथि:
11 AUG 2026 5:58PM by PIB Delhi
ग्रामीण विकास मंत्रालय प्रवासन-प्रवण क्षेत्रों या प्रवासन प्रवृत्तियों से संबंधित आंकड़े नहीं रखता है। तथापि, अन्य बातों के साथ-साथ ग्रामीणों के प्रवासन से संबंधित समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने एक बहु-आयामी कार्रवाई अपनाई है, जैसे कि बेहतर अवसंरचनात्मक सुविधाओं (जैसे सड़कें, पेयजल आपूर्ति, आवास, स्वच्छता एवं संपर्कता) का प्रावधान, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने हेतु संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, रोजगार सृजन, कौशल प्रदान करना, उद्यमशीलता गतिविधि को प्रोत्साहित करना और वित्तीय सहायता एवं ऋण सुविधाओं तक आसान पहुंच प्रदान करना आदि।
इस दिशा में, ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाएं/कार्यक्रम, जैसे विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी), प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जलग्रहण विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) कार्यान्वित कर रहा है।
सरकार निर्धारित उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित करने की दिशा में ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की प्रगति का नियमित आकलन एवं समीक्षा करती है। मनरेगा योजना, डीएवाई-एनआरएलएम और पीएमएवाई-जी के अंतर्गत क्रमशः सृजित श्रम-दिवसों, गठित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और पूर्ण किए गए आवासों का ब्यौरा नीचे दिया गया है:-
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कार्यक्रम का नाम
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प्राप्त प्रमुख लाभ
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मनरेगा योजना
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वर्ष 2006 में कार्यक्रम की शुरूआत के बाद से 30.06.2026 तक कुल 4994.17 करोड़ श्रम-दिवस सृजित किए गए हैं
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डीएवाई-एनआरएलएम
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वर्ष 2011 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत 30.06.2026 तक कुल 10.08 करोड़ महिलाओं को 92 लाख स्वयं सहायता समूहों में शामिल किया गया है
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पीएमएवाई-जी
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वर्ष 2016 से अब तक कुल 3.11 करोड़ आवास पूर्ण किए जा चुके हैं
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विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025, दिनांक 01 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ, जो प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की सांविधिक गारंटी प्रदान करता है तथा टिकाऊ परिसंपत्तियों के सृजन एवं संवहनीय ग्रामीण आजीविकाओं को सुदृढ़ करने पर बल देता है। इस कार्यक्रम में आजीविका अवसंरचना पर एक समर्पित विषयगत क्षेत्र शामिल है, जिसमें कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां, ग्रामीण उद्यम, स्वयं सहायता समूह और अन्य आय-सृजन गतिविधियां शामिल हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में संवहनीय आजीविका अवसरों का सृजन और सुदृढ़ीकरण होता है। इसके अतिरिक्त, जल सुरक्षा के अंतर्गत कार्य, जिसमें जल संरक्षण, जलग्रहण विकास, भूजल पुनर्भरण और स्रोत संवहनीयता शामिल हैं, जल संसाधनों की उपलब्धता एवं संवहनीयता में सुधार करके कृषि गतिविधियों की सहायता करते हैं, जिससे कृषि उत्पादकता एवं ग्रामीण आजीविकाओं में वृद्धि होती है।
इसी प्रकार, चरम मौसमी घटनाओं का न्यूनीकरण एवं आपदा तैयारी के अंतर्गत कार्य, जिसमें सूखा, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाओं हेतु उपाय शामिल हैं, कृषि एवं ग्रामीण आजीविका परिसंपत्तियों की सुरक्षा करने तथा ग्रामीण समुदायों की समुत्थानशक्ति को सुदृढ़ करने में सहायक हैं। इस प्रकार, आजीविका अवसंरचना, जल सुरक्षा, जलवायु समुत्थानशक्ति और ग्रामीण अवसंरचना पर संयुक्त बल का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार अवसरों को बढ़ाना, कृषि एवं संबद्ध आजीविकाओं को सुदृढ़ करना तथा संवहनीय ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है। ये प्रावधान महाराष्ट्र के जलगांव लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र सहित देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हैं, और इनका उद्देश्य आजीविकाओं को सुदृढ़ करना तथा मौसमी एवं जलवायु-संबंधी आजीविका संकट के प्रति संवेदनशीलता को कम करना है।
यह जानकारी केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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आर सी/ पीयू
(रिलीज़ आईडी: 2297778)
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