विधि एवं न्याय मंत्रालय
यौन अपराधों के मामलों में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश
प्रविष्टि तिथि:
07 AUG 2026 11:58PM by PIB Delhi
माननीय उच्चतम न्यायालय ने 14.07.2026 को 'सुओ मोटो रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2025' में दिए गए अपने फैसले में, यौन अपराधों से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए, पीड़ितों और अन्य कमजोर लोगों से जुड़ी न्यायिक प्रक्रियाओं में दया, सहानुभूति और संवेदनशीलता की जरूरत पर जोर दिया। माननीय उच्चतम न्यायालय ने कहा कि न्यायिक फैसलों में दया, इंसानियत और समझ जैसे मूल्य होने चाहिए, जो न्याय की एक निष्पक्ष, जवाबदेह और असरदार व्यवस्था के लिए बहुत जरूरी हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय ने 'नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी' (राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी) के माध्यम से बनाई गई विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है।
माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में दिए गए दिशानिर्देशों गाइडलाइंस का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही में, खासकर यौन अपराधों से जुड़े मामलों में, लिंग से जुड़े पहलुओं और मानसिक आघात को ध्यान में रखकर अपनाए गए नजरिये को बढ़ावा देना है। इन दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य असंवेदनशील जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) से होने वाले पुनः उत्पीड़न को रोकना है, साथ ही न्यायिक प्रशिक्षण और जागरूकता के जरिए न्याय प्रक्रिया में सहानुभूति, गरिमा और निष्पक्षता को बढ़ावा देना है। इस रिपोर्ट की मुख्य विशेषताओं में ये बातें शामिल हैं:
- यह लिंग-आधारित न्याय के बदलते संवैधानिक और न्यायिक सिद्धांतों को रेखांकित करता है, जिसमें गरिमा, समानता, निजता, शारीरिक अखंडता और स्वायत्तता पर जोर दिया गया है। इससे मुख्य रूप से आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों को लिंग-संबंधी मामलों में संवेदनशील और सम्मानजनक तरीके से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
- यह ऐसे मामलों में जिरह करने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन देता है, जिसमें पीड़ित के यौन इतिहास और अन्य अनुचित बातों पर निर्भरता से बचने के उपाय भी शामिल हैं।
- यह जांच और न्याय-निर्णय की प्रक्रियाओं में संभावित लिंग-आधारित भेदभाव और पूर्वाग्रहों की पहचान करने के लिए प्रगतिशील न्यायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
- यह न्यायिक आदेशों और फैसलों में लिंग-संवेदनशील और सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की सिफारिश करता है।
- यह सहानुभूतिपूर्ण, मानसिक आघात-संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित अदालती प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करता है, जो सभी संबंधित पक्षों की गरिमा और निजता की रक्षा करती हैं।
सुओ मोटो रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2025 में फैसला, सुओ मोटो रिट याचिका (आपराधिक) संख्या 1/2025 में विविध आवेदन संख्या 1998/2026 में फैसला और 'फैसला और न्याय (फैसले लिखते समय संवेदनशीलता और सहानुभूति)' नाम का प्रकाशन भारत के उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।
यह जानकारी विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।
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पीके / केसी/ एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2296447)
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